मलारना डूंगर में मुशायरा
मलारना डूंगर - कस्बे के मुसाफिर खाना में गुरुवार रात मुशायरे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि टोंक से आए सउदी सईदी थे तथा अध्यक्षता प्रो. रियाद बंूदी ने की। मंच संचालन जकिया
टोंकवी ने की।
इस अवसर पर डॉ. जलील बुरहानपुरी ने तमाम उम्र वो दौलत की जुस्तजू में रहा जो दौलत आई तो बीमारियों ने घेर लिया। डॉ. जिया टोंक ने लाहौर में ले जाओ कराची में रखो
तुम दहशत का यहां कोई खरीदार नहीं।नदीम शाद देवबंदी ने रात दिन मुस्तकिल कोशिशें जिंदगी बेहतर कैसे बने, इतने दुख जिंदगी के लिए और इसी का भरोसा नहीं। मैसूर से आई आयशा चांद ने मै रे हाथों से न निकल जाए कहीं जन्नत, इसलिए मैं मां के चरणों में पड़ी रहती हूं। रे हार फारूखी ने ए रात जरा तू भी इमदाद मेरी करना मैने भी कोई आंगन सपनों से सजा रखा है, जैसी प्रस्तुतियां देकर श्रोताओं को मोहित कर दिया। इनके अलावा कई शायरों ने भी अपनी मनमोहक प्रस्तुतियां देकर लोगों की वाहवाही लूटी।
गुरुवार देर हुए इस मुशायरे को सुनने के लिए लोगों की काफी भीड़ थी। बाहर से आए कवियों ने अपनी रचनाओं से सभी को मुशायरा सुनने आए श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया।
अब्दुल मजीद सफदर
नस्तर जैदी
आयशा चांद
डॉ. अय्यूब गाजी
नदीम शाद