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कोहरे की चादर ने बढ़ाई किसानों की चिंता

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - जालोर
हाडौती क्षेत्र में हुई बरसात के बाद मारवाड़ में सर्दी का असर दोगुना हो गया, जिसके चलते सवेरे साढ़े सात बजे तक तो शहर कोहरे की आगोश में लिपटा रहा। उसके बाद गलन शुरू होने के साथ ठंडी हवाएं बदन को चीरती महसूस हुई। सर्दी का असर अचानक बढऩे के कारण लोगों की दिनचर्या देरी से शुरू हुई।
  लोगों ने अपने आवश्यक कार्य भी देरी से शुरू किए। सुबह सुबह शहर की सड़कों पर सन्नाटा छाया रहा। ठंडी हवाओं के चलते शुक्रवार को बाजार भी दस बजे के बाद करीब खुलने शुरू हुए। व्यापारियों ने आते ही दुकान के आगे अलाव जला हाथ सेक काम पर बैठे। इधर, क्षेत्र में लगातार पड़ रहे कोहरे के कारण जीरा व ईसबगोल की फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। जिससे किसानों को इस महंगी फसल के बर्बाद होने की चिंता सता रही है। हालांकि किसान समय समय पर मौसम वैज्ञानिकों की सलाह के अनुरूप फसल को बचाने का जतन कर रहे हैं, फिर भी लगातार बिगड़ रहे मौसम को लेकर किसान अपनी फसल के प्रति निश्चिंत नहीं है।
  जोधपुर काजरी के मौसम वैज्ञानिक सुरेंद्र पूनिया के अनुसार सोमवार तक कमोबेश मौसम इसी तरह रहेगा। हालांकि बादलों की आवाजाही से तापमान में थोड़ा बहुत उतार चढ़ाव आ सकता है पर सर्दी का असर बरकरार रहेगा। वैज्ञानिकों ने किसानों को फसल को पाले से बचाने के लिए विभिन्न दवाईयों के छिड़काव के साथ खेतों में धुआं कर फसल को बचाने की सलाह दी है। इधर नर्मदा नहर वाले इलाके में फैले पानी के कारण सर्दी का असर दोगुना हो गया है। जिससे मैदानी इलाकों में रहने वाले लोगों का जीना दुश्वार हो गया है। गर्म कपड़े भी उन्हें सर्दी से राहत नहीं दे पा रहे हैं। ऐसे में इस क्षेत्र के लोग सपरिवार अलाव के सहारे बैठ सर्दी से बचने का जतन कर रहे हैं।



आगे क्या

> डूंगरी. क्षेत्र के एक खेत में खड़ी जीरे की फसल।

जीरे : झुलसा रोग

यूं करें बचाव

आगामी दिनों मे बादल छाए रहने की संभावना को देखते हुए जीरे की फसल में झुलसा ((ब्लाइट)) रोग के प्रकोप की संभावना है। यह रोग आल्टरनेरिया बर्नसाई नामक कवक से होता है, फसल में फूल आने के बाद से लेकर फसल पकने तक कभी भी हो सकता है मौसम अनुकूल होने पर यह रोग फसल को बहुत नुकसान पहुंचाता है। किसान फसल को झुलसा रोग से बचाने के लिए 2 ग्राम जाइनेब दवा का प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर छिड़काव करें।

छाछ्या रोग

यूं करें बचाव

जीरे की फसल में छाछ्या रोग ((पाउडरी मिल्डयू)) के प्रकोप की भी संभावना है। इस रोग में पौधे की पत्तियों एवं टहनियों पर सफेद चूर्ण दिखाई देता है। छाछया रोग का प्रकोप दिखाई देने पर गंधक के चूर्ण का 25 किलो प्रति हैक्टेयर के हिसाब से भुरकाव करें या कैरोथेन एलसी 1 मि.ली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

वैज्ञानिकों ने फसल को बचाने के लिए दवाइयों के छिड़काव धुआं करने की दी सलाह

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है अगले कुछ दिनों तक इस प्रकार का ही मौसम रहेगा, ऐसे में मौसम में ठंडक बरकरार रहेगी। अगले 29 दिसंबर तक आकाश में बादल छाए रहेंगे। वैज्ञानिकों ने न्यूनतम तापमान 8 से 9 डिग्री के बीच रहने तथा अधिकतम तापमान 25 से 26 डिग्री तक रहने की संभावना जताई है। हवा की गति 3 से 5 किलोमीटर प्रतिघंटा रहने की संभावना जताई है। ऐसे मौसम से जीरे की फसलों में झुलसा, सरसो में सफेद रोली, चेपा रोग लगने की संभावना बढ़ गई है।

किसानों को सता रही चिंता

पिछले कुछ दिनों से लगातार आकाश में बादल छाए रहने और कोहरा छाए रहने से किसानों के चेहरों की रौनक गायब हो गई है। ऐसे मौसम में खेतों में खड़ी जीरे, ईसबगोल, सरसो समेत कई फसलों में नुकसान होने की आशंका सता रही है। किसानों का कहना है कि इससे पूर्व भी कई दिनों तक ऐसा मौसम रहा था, अब वापस ऐसा होने से फसलों में नुकसान हो रहा है।

वैज्ञानिकों ने दी किसानों को सावधानी रखने की सलाह

कृषि सलाह केंद्र, केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान, जोधपुर के वैज्ञानिकों ने किसान भाइयों को इस मौसम में पूर्वानुमान के आधार पर रबी फसलों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है।

गेहूं : रोली रोग

यूं करें बचाव

गेहूं में रोली रोग का प्रकोप दिखाई देने पर 25 किलो गंधक चूर्ण का भुरकाव प्रति हैक्टेयर की दर से करें अथवा कैरोथेन 1 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।

चेपा रोग :

यूं करें बचाव

सरसों में माहू ((चेपा)) या मोयला नियंत्रण के लिए नीम की निंबोली के सत का 5 प्रतिशत ((100 लीटर पानी में 5 लीटर सत)) घोल बनाकर छिड़काव करें। कीटनाशक दवाओं मैलाथियॉन 50 ई.सी. अथवा डायमिथोएट 30 ई.सी. का 1 लीटर प्रति हैक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करें

सरसो : सफेद रोली रोग यूं करें बचाव

आसमान में बादल छाए रहने की स्थिति में सरसों की फसल में तुलासिता व सफेद रोली रोग की संभावना रहती है। फसल में सफेद रोली रोग लगने लगे तो इसके बचाव के लिए किसान मेटालेकसल 1 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।

मौसम का असर

लगातार बादल व कोहरे का असर जारी रहने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें, कोहरे के कारण जीरा व ईसबगोल की फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है, लोगों की दिनचर्या भी हुई प्रभावित