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३ महीने गुजरे, अब १ सप्ताह तक और करना होगा एंबुलेंस का इंतजार
भास्कर न्यूज - जालोर
प्रदेश में चिकित्सा व्यवस्थाओं के सुचारू संचालन के लिए राज्य सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों का आमजन को लाभ नहीं मिल पा रहा है। आपातकालीन स्थिति या दुर्घटना के दौरान घायलों को प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराने तथा नजदीकी अस्पताल तक पहुंचाने के लिए शुरू की गई 108 एंबुलेंस सेवा की जिला मुख्यालय पर ही पिछले महीने से सेवा नहीं मिल पा रही है। 26 अक्टूबर को थर्ड फेस में दुर्घटना के बाद से जोधपुर वर्कशॉप में सर्विस के लिए गई एंबुलेंस अब तक ठीक नहीं हो पाई है। पहले जिला प्रभारी जहां 15 जनवरी तक एंबुलेंस सेवा शुरू करने का दावा कर रहे थे, वहीं अब एक सप्ताह का समय और लगने की बात कर रहे हैं। हैरत की बात यह है कि इन तीन महीनों में एंबुलेंस की वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर न तो संबंधित कंपनी की ओर से कोई कार्रवाई की गई और ना ही जिला प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई प्रयास नहीं किए गए। जिला मुख्यालय पर एंबुलेंस नहीं होने के कारण घायलों को सायला या आहोर से एंबुलेंस आने तक इंतजार करना पड़ता है। शेष - पेज १५
इंतजार करने को मजबूर घायल
जिला मुख्यालय पर 108 एंबुलेंस खराब होने के बाद कंपनी की ओर से सायला व आहोर की एंबुलेंस से सेवाएं ली जा रही है। जालोर से सायला की दूरी 40 किलोमीटर तथा आहोर की दूरी करीब 18 किलोमीटर है। ऐसे में मुख्यालय तक पहुंचने में सायला की एंबुलेंस को करीब 40-45 मिनट तथा आहोर की एंबुलेंस को 15-20 मिनट तक लग जाते हैं। एंबुलेंस के मौके पर पहुंचने तक इंतजार करते घायल मौके पर ही तड़पते रहते हैं।
कंपनी व प्रशासन ने नहीं किए
वैकल्पिक व्यवस्था के प्रयास
26 अक्टूबर को एंबुलेंस क्षतिग्रस्त होने के बाद तीन महीने से अधिक समय गुजरने के बाद भी कंपनी या प्रशासन की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर कोई प्रयास नहीं किए गए हैं। जिला प्रभारी के अनुसार जालोर में इमरजेंसी सेवाओं के लिए रोजाना करीब 8-10 कॉल आते हैं लेकिन एंबुलेंस नहीं होने के कारण सायला व आहोर की एंबुलेंस को इन कॉल्स के बारे में सूचना देनी पड़ती है। ऐसे में घायलों को समय पर प्राथमिक उपचार नहीं मिल पाता है।
कर्मचारी भी दे रहे वैकल्पिक ड्यूटी
जिला मुख्यालय पर एंबुलेंस में वर्तमान में 4 कर्मचारी कार्यरत है। एंबुलेंस खराब होने से कंपनी ने कर्मचारियों को भी जिले में अन्य स्थानों पर भेजकर वैकल्पिक तौर पर ड्यूटी करवाई जा रही है। एंबुलेंस सेवा सुचारू नहीं होने के कारण ये कर्मचारी भी मौके पर पहुंचकर घायलों को अस्पताल पहुंचाने का कार्य नहीं कर पा रहे हैं।
6-7 दिनों में शुरू होगी एंबुलेंस सेवा
॥जोधपुर स्थित शोरूम में गाड़ी की मरम्मत का कार्य प्रगति पर है। विभागीय प्रक्रिया के चलते मरम्मत में देरी हुई है। 6-7 दिनों में जालोर में एंबुलेंस सेवा शुरू कर दी जाएगी। वैकल्पिक व्यवस्था के लिए 1-2 दिनों में अन्य एंबुलेंस की व्यवस्था के प्रयास कर रहे हैं।
-मनीष व्यास, प्रभारी, जोधपुर जोन, 108 एंबुलेंस सेवा
कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा है
॥जिला व संभाग प्रभारी से एंबुलेंस सेवा शुरू करने के लिए कई बार पूछे जाने के बाद भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला और ना ही अब तक एंबुलेंस सेवा शुरू की गई है। इस संबंध में परियोजना निदेशक जयपुर को कंपनी के खिलाफ उचित कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है।
-चरणसिंह, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, एनआरएचएम, जालोर
तीन माह से नहीं जिला मुख्यालय पर एंबुलेंस
बीएमआई जयपुर फर्म की ओर से जिला मुख्यालय पर लगाई गई 108 एंबुलेंस 26 अक्टूबर की शाम को दुर्घटनाग्रस्त हो जाने के बाद जोधपुर स्थित वर्कशॉप में मरम्मत के लिए भिजवाया गया था। लेकिन तीन महीने से भी अधिक समय गुजर जाने के बाद भी अब तक जिला मुख्यालय पर एंबुलेंस सेवा शुरू नहीं हो पाई है। वहीं एंबुलेंस सेवा के जोधपुर जोन प्रभारी की ओर से अभी भी सेवाएं सुचारू होने में सप्ताह भर का समय और लग जाने की बात कही जा रही है।
प्रशासन की ओर से भी नहीं किए वैकल्पिक व्यवस्था के प्रयास
> 26 अक्टूबर को हुई दुर्घटना के बाद से जिला मुख्यालय पर नहीं है एंबुलेंस
> दुर्घटना होने पर सायला व आहोर से एंबुलेंस आने तक घायलों को करना पड़ता है इंतजार, मौके पर तड़पते रहते हैं मरीज
> एनआरएचएम जिला प्रभारी ने कंपनी के खिलाफ कार्रवाई के लिए परियोजना निदेशक जयपुर को लिखा पत्र
पहले 15 जनवरी तक व्यवस्था सुचारू होने के किए थे दावे, 15 दिन बाद भी एक सप्ताह में सेवा बहाल करने की बात कर रहे हैं संभाग प्रभारी