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बाल विवाह के खिलाफ चेतना टीमें गठित

7 वर्ष पहले
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जैसलमेर. उरमूल ट्रस्ट व यूनिसेफ के सहयोग से जिले में बाल विवाह को रोकने के लिए संचालित हो रही परियोजना गल्र्स नॉट ब्राइड के तहत संचालित किए जा रहे युवाओं के द्वितीय प्रशिक्षण शिविर के अंतिम दिन विभिन्न गांवों से आए संभागियों के सहयोग से चेतना टीमों का गठन किया गया।
उरमूल के जिला समन्वयक पंकज केवलिया ने बताया कि शिविर के दौरान संभागियों के साथ एक्शन प्लान तैयार कर गांवों में बाल विवाह के विरोध में गतिविधियों के संचालन के लिए नियोजन तैयार किया गया। केवलिया ने उरमूल द्वारा राजस्थान में बाल विवाह के विरुद्ध में जनजागृति के लिए किए जाने वाले का र्यो के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा आज विश्व में प्रति दिन 39 हजार बालिकाएं बाल वधुएं बनने का मजबूर है। जिससे समाज में मातृ मृत्यु, शिशु मृत्यु और महिलाओं व बच्चों में कुपोषण जैसी बीमारियों का सामना करना पड़ता है।
शिविर के अंतिम दिन संकुल प्रभारी नीतू परिहार ने संभागियों को निशुल्क सेवा 1098 चाइल्ड लाइन की कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से चर्चा की। शिविर के दौरान महिला सुरक्षा एवं सलाह केन्द्र की प्रभारी ललिता पुरोहित ने घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम 2005 विभिन्न प्रावधानों पर संभागियों को जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान संशोधित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक विकास आचार्य ने टी.बी. रोग के प्रति जागरूकता पर चर्चा की। आचार्य ने बताया कि वर्तमान में एम.डी.आर.टी.बी. के संक्रमण से भारत को क्षय मुक्त राष्ट्र घोषित करवाने में काफी अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जिले क्षय रोग से पीडि़त प्रत्येक व्यक्ति का उपचार सरकार द्वारा पूर्णत: निशुल्क करवाया जा रहा है। उन्होंने संभागियों को निवेदन किया कि यदि उन्हें गांव में कोई व्यक्ति एक माह से अधिक समय से खांसी से पीडि़त व्यक्ति मिले तो उसे तुरंत उपचार के लिए जिला मुख्यालय में संपर्क किया जा
सकता है।