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‘आप प्रदूषण के समाधान की योजना बनाकर लाओ, सरकार मदद करेगी’

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूजक्च पाली
शहर की प्रमुख प्रदूषण समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार ने हरसंभव मदद देने का भरोसा दिलाया है। मंगलवार को जयपुर में विधायक ज्ञानचंद पारख की अगुवाई में पाली जल प्रदूषण नियंत्रण एवं परिशोधन अनुसंधान फाउंडेशन के पदाधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री वसुंधराराजे से मिलकर उनके समक्ष प्रदूषण समस्या के समाधान में आ रही अड़चनों के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दी। सीएम ने कहा कि वे योजना बनाकर लाए, सरकार उसे पूरा करने में सहयोगी करेगी।
विधायक के नेतृत्व में जयपुर पहुंचे सीईटीपी के अध्यक्ष अनिल मेहता, सचिव विनय बंब तथा मुकेश नाहर समेत अन्य उद्यमियों ने मुख्यमंत्री से मिलकर उनको प्रदूषण समस्या को लेकर उद्योग जगत के सामने आ रही निरंतर नई चुनौतियों के बारे में जानकारी दी। इस प्रतिनिधिमंडल ने इस समस्या का एकमात्र हल जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्रोजेक्ट बताते हुए कहा कि इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में करीब 250 करोड़ रुपए की आवश्यकता है। अगर सरकार इनमें उद्यमियों के साथ सहयोग करे, तो इस समस्या से किसानों को भी निजात मिलने के साथ ही उद्योग जगत भी अधिक विकसित होगा। राजे ने कहा कि राज्य सरकार भी इस समस्या को लेकर काफी गंभीर है तथा इसे अब ज्यादा लंबित नहीं रखना चाहती। राजे ने कहा कि वो इस पूरे प्रोजेक्ट की रिपोर्ट वे सरकार को बनाकर दे, इसके बाद इसे हर हाल में पुरा कराया जाएगा। विधायक पारख का कहना है कि आने वाले समय में प्रदूषण को पूरी तरह से खात्मा करा दिया जाएगा।



प्रदूषण बोर्ड से मांगी निर्माणाधीन प्लांट की सब्सिडी

सीईटीपी के पदाधिकारियों के साथ विधायक पारख ने प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सदस्य सचिव डी.एन पांडेय से मिलकर उनको अभी तक प्रदूषण की रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयासों के बारे में बताया। इसके साथ ही उन्होंने शहर में निर्माणाधीन प्लांट 5 व 6 की रुकी हुई 1-1 करोड़ रुपए की सब्सिडी भी शीघ्र ही देने की मांग की। उनका कहना था कि दोनों प्लांटों का निर्माण कार्य करीब 70 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। सब्सिडी राशि के अभाव में निर्माण कार्य को तेज गति से कराने में परेशानी आ सकती है। यह सब्सिडी राज्य सरकार के पास आ चुकी है। इस पर पांडेय ने शीघ्र ही यह राशि सीईटीपी को हस्तांतरित करने का आश्वासन दिया है।

नई मशीनरी तथा वॉशर की अनुमति भी मांगी

जयपुर पहुंचे सीईटीपी के दल ने प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों से मिलकर उनको टैक्सटाइल यूनिट में काम आने वाली मशीनरी को चेंज करने तथा वॉशर शुरू करने की अनुमति देने का आग्रह भी किया। सीईटीपी सचिव विनय बंब का कहना था कि वर्तमान में कई ऐसी मशीनें मार्केट में आ गई है, जिनसे पानी की मात्रा कम हो सकती है। अगर इस मशीनरी को पाली में रंगाई-छपाई की इकाइयों में लगा दी जाए, तो रंगीन पानी की मात्रा में कमी आ जाएगी तथा ट्रीटमेंट प्लांटों पर भी अतिरिक्त पानी का भार नहीं पड़ेगा। इसके साथ ही उन्होंने वॉशर में कपड़ा धुलाई की अनुमति देने की भी मांग की।

15 दिन में सैटेलाइट फ्लोमीटर लगाने का वादा

सीईटीपी पदाधिकारियों का दावा है कि फैक्ट्रियों से निकलने वाले रंगीन पानी की मॉनिटरिंग के लिए प्रस्तावित सैटेलाइटयुक्त फ्लोमीटर 15 दिन में लगा दिए जाएंगे। इसके लिए संबंधित कंपनी को निर्देशित किया जा चुका है। फ्लोमीटर लगने के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी कि कौनसी फैक्ट्री से कितना पानी आ रहा है। इसके बाद आगे की योजना तैयार की जाएगी, जिससे प्रदूषण को पूरी तरह से समाप्त किया जा सके।

प्रदूषण समस्या के निस्तारण में सहयोग मांगा, जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्रोजेक्ट के लिए बजट आबंटन कराने का आग्रह, सीएम ने आश्वस्त किया कि जो भी सहयोग होगा

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