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क्रोध जैसा कोई शत्रु नहीं : रत्नसेन सूरीश्वर

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज. पाली
जैन संत आचार्य रत्नसेन सूरीश्वर महाराज ने कहा कि क्रोध जैसा कोई शत्रु नहीं है। संसार बढ़ाने का मुख्य कारण क्रोध है। ज्ञानियों ने क्रोध को अग्नि की उपमा देते हुए बताया कि क्रोधाग्नि वस्तु और व्यक्ति दोनों को भस्म कर देती है। काम और लोभी की तरह क्रोध भी नरक का द्वार है। वे शनिवार को महावीर नगर स्थित जैन उपाश्रय में ‘क्रोध आबाद तो जीवन बर्बाद’ विषय पर प्रवचन दे रहे थे। उन्होंने कहा कि क्रोध क्षणिक होता है, लेकिन वह चिरजीवी नुकसान करता है और संबंधों को तोडऩे का ही काम करता है। इसलिए, क्रोध को संग्रह करके नहीं रखना चाहिए। स्नेह, मैत्री, शांति, क्षमा व भूल को सच्चे भाव से स्वीकार करे तो मानव क्रोध के अनर्थ से बचा जा सकता है। अभय मेहता ने जानकारी देते हुए बताया कि रविवार को आचार्य महावीर नगर में सामयिक के रहस्य पर प्रवचन देंगे। इसके बाद 11 बजे विहार कर वीडी नगर स्थित संभवनाथ जैन मंदिर पहुंचेंगे। जहां आचार्य परमात्मा की भक्ति विषय पर प्रवचन देंगे और मंदिर संबंधी वार्षिक चढ़ावे बोले जाएंगे।