- Hindi News
- आज दिल्ली के राजपथ पर खनकेगी पाली की तेरहताली
आज दिल्ली के राजपथ पर खनकेगी पाली की तेरहताली
तोषचंद्र चौहान. पाली
पाली की सांस्कृतिक विरासत तेरहताली इस गणतंत्र दिवस पर दिल्ली के राजपथ की शोभा बनेगी। गणतंत्र दिवस पर राजधानी में प्रस्तुत की जाने वाली राजस्थान की झांकी में जिले के पादरला गांव के कलाकार इस नृत्य को पूरे कौशल के साथ पेश करेंगे। दिल्ली पहुंचे इन लोक कलाकारों ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री के समक्ष भी अपने हुनर की बानगी दिखाई। इस दल में 10 कलाकार हैं और सभी जिले के पादरला गांव के हैं।
इस वर्ष रक्षा मंत्रालय की सक्षम कमेटी के सामने प्रस्तुत राज्य सरकार की विशेषज्ञ समिति के तीन प्रस्तावों में तेरहताली नृत्य कला को झांकी की झलक बनाने का निर्णय लिया गया। गंगादेवी, पूजा, भूरीबाई, कंचन, सोहनी देवी, अणची बाई, राधिका, रूपदास और ओमप्रकाश के इस दल ने 8 जनवरी से जयपुर में तीन दिवसीय रिहर्सल किया। इसके बाद 11 जनवरी से दिल्ली के रंगशाला शिविर में नियमित रिहर्सल हुआ। इन कलाकारों को प्रधानमंत्री के यहां भी अपनी कला दिखाने का अवसर मिला।
शेष - पेज १४
यह है तेरहताली
शारीरिक कौशल और रोमांच से समृद्ध इस नृत्य में तेरह मंजीरों की ताल पर रोजमर्रा जिंदगी के तेरह पहलुओं की मुद्राएं अभिव्यक्त की जाती हैं। अनाज काटना, साफ करना, कूटना, पीसना, छानना, आटे को गूंथना, रोटियां बनाना, चरखा चलाना, सूत लपेटना, दही, मक्खन व घी बिलौना तथा सिर पर कलश रखकर संतुलन साधते हुए नृत्यांगनाएं जमीन पर लेटकर तो कभी बैठकर तो कभी पांव फैलाकर तो कभी बदन को सिमटाते हुए कोणीय तौर- तरीको से विभिन्न हाव-भाव पेश करती हैं।
रोमांच से भरपूर करतब भी
यह नृत्य भजन, लीलागाथा व सोरठा के बोल और ढोलक की पाश्र्व धुन पर तेरह मंजीरों की खनकदार सरगम पर होता है। इसमें रोमांच का रंग भरने के लिए सिर पर कांसे की थाली में जलता हुआ दीपक व मुंह में नंगी तलवार दबाकर हैरतअंगेज करतब वाली मुद्राएं भी दर्शाई जाती हैं।