पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • ड्राप आउट का आंकड़ा बढ़ा तो टीकाकरण में पिछड़ा जिला

ड्राप आउट का आंकड़ा बढ़ा तो टीकाकरण में पिछड़ा जिला

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
भास्कर न्यूज - पाली
टीकाकरण को लेकर पाली जिला फिर से पिछड़ता नजर आ रहा है। राज्य में टीकाकरण क्षेत्र में पहले पायदान पर पहुंचने वाले पाली जिले की स्थिति इस बार टीकाकरण में काफी पीछे है। डब्ल्यूएचओ द्वारा मॉनिटरिंग और बांगड़ अस्पताल के चिकित्सा अधिकारियों की ओर से प्रस्तुत की गई रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक इस बार टीकाकरण की मॉनिटरिंग सही नहीं होने से ड्राप आउट ((जो बच्चे टीकाकरण से रह गए)) में पहले की तुलना से करीब 40 गुणा बढ़ोतरी होने से यह स्थिति बनी है। इतना ही नहीं, जिले में खारची, पाली और बाली में ब्लॉक में सबसे ज्यादा ड्राप आउट बच्चों की संख्या पाई गई है। जिले में टीकाकरण की स्थिति को सुधारने के लिए विभागीय अधिकारियों की ओर से ब्लॉक स्तर के सभी प्रभारियों को निर्देशित किया है।
एक भी टीका छूटने पर रखा जाता है ड्राप आउट की श्रेणी में
चिकित्सा अधिकारियों की माने तो बच्चों को संक्रमित बीमारी से बचाने के लिए दिए जाने वाले डीपीटी वैक्सीन के डोज और मिजल्स डोज ((ओरी का टीका)) दिया जाता है। ऐसे में यदि एक भी टीका छूट जाता है तो उसे ड्राप आउट श्रेणी में रखा जाता है। पिछले कुछ समय से यही हो रहा है। इसी वजह से ड्राप आउट की संख्या बढ़ती जा रही है। 2011-12 में ड्राप आउट का प्रतिशत जहां पहले 0.3 प्रतिशत था। वहीं इस बार ड्राप आउट के प्रतिशत में हुई बढ़ोतरी के कारण अरबन क्षेत्र में इसका प्रतिशत 13.41 तो रूरल एरिया में 5.11 प्रतिशत है।
क्या है डीटीपी और मिजल्स
बच्चों को संक्रमित बीमारी से बचाने के लिए डेढ़ माह के बच्चे को पहले डीपीटी ((डिप्थीरिया परटूसिस टिटनेस वैक्सीन)) वन का टीका दिया जाता है। इसके बाद पहले टीके के हर एक माह के अंतराल के बाद बाकी के दो डीटीपी टू व थ्री का टीका दिया जाता है। यह तीनों टीके लगने के बाद ओरी से बचने के लिए बच्चे को नौ माह बाद मिजल्स का टीका और डेढ़ साल बाद बूस्टर का टीका लगाया जाता है। इससे बच्चों में होने वाली गलघोंटू, खांसी और अन्य बीमारियों से बचाया जा सके। इस प्रक्रिया के दौरान यदि एक भी टीका छूट जाता है तो उस बच्चे को ड्राप आउट में रखा जाता है।
विशेष टीकाकरण सप्ताह में भी हालात जस के तस
गत वर्ष 2013 में जिलेभर की टीकाकरण को लेकर रिपोर्ट पेश की गई थी। इसके बाद जून माह में विशेष टीकाकरण सप्ताह भी शुरू किया गया था। इस अभियान के तहत टीकाकरण की टीम भी बनाई गई, लेकिन स्थिति जस की तस ही बनी रही। जिले में झुग्गी झोपडिय़ों और घुमंतु श्रेणी में आने वाले कई ऐसे बच्चे थे इस अभियान में छूट गए थे, जिन्हें टीकाकरण की आवश्यकता थी। इतना ही नहीं, जुलाई और अगस्त माह में भी विशेष टीकाकरण सप्ताह अभियान चलाया गया था।
पूरे जिले में खारची का ड्राप आउट प्रतिशत सबसे अधिक
टीकाकरण की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा गंभीर समस्या जिले के खारची ब्लॉक की है। यहां का ड्राप आउट प्रतिशत पूरे जिले के सभी ब्लॉक में से अधिक है। इस श्रेणी में पाली और बाली ब्लॉक का भी प्रतिशत अन्य ब्लॉक की तुलना में ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक बाली का आउट ड्राप 5.76 प्रतिशत, देसूरी 0.83, जैतारण 4.17, खारची 9.56, पाली 8.32, रायपुर 5.12, रानी स्टेशन 4.53, रोहट .25, सोजत 5.13 और सुमेरपुर ब्लॉक का आउट ड्राप 0.8 प्रतिशत है।



विशेष टीकाकरण सप्ताह में भी हालात जस के तस

गत वर्ष 2013 में जिलेभर की टीकाकरण को लेकर रिपोर्ट पेश की गई थी। इसके बाद जून माह में विशेष टीकाकरण सप्ताह भी शुरू किया गया था। इस अभियान के तहत टीकाकरण की टीम भी बनाई गई, लेकिन स्थिति जस की तस ही बनी रही। जिले में झुग्गी झोपडिय़ों और घुमंतु श्रेणी में आने वाले कई ऐसे बच्चे थे इस अभियान में छूट गए थे, जिन्हें टीकाकरण की आवश्यकता थी। इतना ही नहीं, जुलाई और अगस्त माह में भी विशेष टीकाकरण सप्ताह अभियान चलाया गया था।

पूरे जिले में खारची का ड्राप आउट प्रतिशत सबसे अधिक

टीकाकरण की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा गंभीर समस्या जिले के खारची ब्लॉक की है। यहां का ड्राप आउट प्रतिशत पूरे जिले के सभी ब्लॉक में से अधिक है। इस श्रेणी में पाली और बाली ब्लॉक का भी प्रतिशत अन्य ब्लॉक की तुलना में ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक बाली का आउट ड्राप 5.76 प्रतिशत, देसूरी 0.83, जैतारण 4.17, खारची 9.56, पाली 8.32, रायपुर 5.12, रानी स्टेशन 4.53, रोहट .25, सोजत 5.13 और सुमेरपुर ब्लॉक का आउट ड्राप 0.8 प्रतिशत है।

एक भी टीका छूटने पर रखा जाता है ड्राप आउट की श्रेणी में

चिकित्सा अधिकारियों की माने तो बच्चों को संक्रमित बीमारी से बचाने के लिए दिए जाने वाले डीपीटी वैक्सीन के डोज और मिजल्स डोज ((ओरी का टीका)) दिया जाता है। ऐसे में यदि एक भी टीका छूट जाता है तो उसे ड्राप आउट श्रेणी में रखा जाता है। पिछले कुछ समय से यही हो रहा है। इसी वजह से ड्राप आउट की संख्या बढ़ती जा रही है। 2011-12 में ड्राप आउट का प्रतिशत जहां पहले 0.3 प्रतिशत था। वहीं इस बार ड्राप आउट के प्रतिशत में हुई बढ़ोतरी के कारण अरबन क्षेत्र में इसका प्रतिशत 13.41 तो रूरल एरिया में 5.11 प्रतिशत है।

क्या है डीटीपी और मिजल्स

बच्चों को संक्रमित बीमारी से बचाने के लिए डेढ़ माह के बच्चे को पहले डीपीटी ((डिप्थीरिया परटूसिस टिटनेस वैक्सीन)) वन का टीका दिया जाता है। इसके बाद पहले टीके के हर एक माह के अंतराल के बाद बाकी के दो डीटीपी टू व थ्री का टीका दिया जाता है। यह तीनों टीके लगने के बाद ओरी से बचने के लिए बच्चे को नौ माह बाद मिजल्स का टीका और डेढ़ साल बाद बूस्टर का टीका लगाया जाता है। इससे बच्चों में होने वाली गलघोंटू, खांसी और अन्य बीमारियों से बचाया जा सके। इस प्रक्रिया के दौरान यदि एक भी टीका छूट जाता है तो उस बच्चे को ड्राप आउट में रखा जाता है।



राज्य में टीकाकरण क्षेत्र में पहले पायदान पर रहने वाला पाली जिला फिर पिछड़ा, इस बार करीब 40 गुणा बढ़ोतरी हुई, ब्लॉक स्तर पर अधिकारियों को स्थिति सुधारने के लिए किया है निर्देशित, पूर्व में जुलाई और अगस्त माह में चलाया था विशेष टीकाकरण सप्ताह