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प्रदूषण बोर्ड ने गड़बडिय़ों के लिए आरओ से मांगा स्पष्टीकरण, उधर जारी कर दी कंसेंट टू ऑपरेट

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - पाली
शहर की औद्योगिक इकाइयों को कंसेंट-टू-ऑपरेट तथा कंसेंट-टू-स्टेब्लिश के लिए बनाई गई रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आने के बाद भी एक फर्म को कंसेंट-टू-ऑपरेट जारी करने का मामला उजागर हुआ है। इसी फर्म की रिपोर्ट में काफी कांट-छांट होने तथा ओवरराइटिंग के अलावा पृष्ठों पर अलग-अलग अधिकारियों के हस्ताक्षर होने पर राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सीनियर एनवायरमेंटल इंजीनियर ((टैक्सटाइल)) ने गंभीरता से लेते हुए स्थानीय क्षेत्रीय अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा था। एक फैक्ट्री मालिक ने क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारियों की मिलीभगत से अपने स्तर पर सीधे ही जयपुर मुख्यालय में ही कंसेंट-टू-ऑपरेट तथा कंसेंट-टू-स्टेब्लिश के लिए सिफारिशें बनाकर प्रेषित कर दी थी। चौंकाने वाली बात तो यह है कि इस उद्यमी के पास मूल दस्तावेज कैसे पहुंचे, जबकि मूल कागजात विभाग अपने पास ही रखता है। इस गड़बड़ी के बाद भी इस पर पर्दा डाल दिया गया तथा उक्त फर्म को कंसेंट-टू-ऑपरेट भी जारी कर दी। इसके चलते पूरी कार्रवाई संदेह के दायरे में है। जानकारी के अनुसार शहर की कई फैक्ट्रियों के पास अपनी इकाई में प्रोडक्शन करने के लिए राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल की एनओसी यानी कंसेंट-टू-ऑपरेट नहीं है। शेष - पेज १६

वहीं संचालन को सुचारू रखने की अनुमति कंसेंट-टू-स्टेब्लिश के लिए भी विभाग में आवेदन लगा रखे हैं। गत दिनों विभाग ने कंसेंट-टू-ऑपरेट तथा कंसेंट-टू-स्टेब्लिश के लिए नए सिरे से आवेदन मांगे थे। इस दौरान आपाधापी में कई उद्यमियों ने आनन-फानन में दस्तावेज तैयार करवा कर उसमें कई खामियां रख दीं। इसके साथ ही रिपोर्ट में भी अपने स्तर पर कांट-छांट कर दी। कई उद्यमियों ने तो निरीक्षण रिपोर्ट भी जुगाड़ कर अपने कब्जे में कर ली थी, जबकि किसी को भी निरीक्षण रिपोर्ट की मूल दस्तावेज की प्रति नहीं देना नियमों में अंकित है। जब यह रिपोर्ट जयपुर में उच्चाधिकारियों के सामने पहुंची तो वे भी हैरत में पड़ गए। कई इकाइयों की पत्रावलियों में मूल दस्तावेज होने के साथ ही उनमें काफी कांट-छांट पाई गई। जांच के दौरान यह भी पता चला कि उद्यमियों के दस्तावेजों में अलग-अलग अधिकारियों ने हस्ताक्षर कर दिए थे, जबकि ऐसा होना नियमों के विपरीत है। किसी भी पत्रावली को आरओ ही सिफारिश के लिए भेज सकता है,लेकिन कई पृष्ठों पर जेएसक्यू के भी दस्तखत थे।
प्रदूषण बोर्ड ने पकड़ी गड़बड़ी, आरओ से स्पष्टीकरण मांगा, फिर भी फैक्ट्री को कंसेंट टू ऑपरेट जारी
प्रदूषण बोर्ड ने मंडिया रोड स्थित एक फर्म के कंसेंट टू ऑपरेट के आवेदन और उसके साथ क्षेत्रीय अधिकारी की जांच रिपोर्ट को आधार बनाते हुए आरओ आरबी मौर्य से स्पष्टीकरण मांगा। प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के मुख्यालय द्वारी जारी इस नोटिस के अनुसार फर्म के कंसेंट-टू-ऑपरेट और स्टेब्लिश के लिए गलत रिपोर्ट दी गई थी। इतना ही नहीं इनके कई पेज पर अलग-अलग अधिकारियों के हस्ताक्षर हो रखे हैं। जांच में यह भी पाया गया है कि यूनिट रिप्रजेंटेटिव की ओर से सीधे रूप से रिपोर्ट की ऑरिजनल कॉपी हैड ऑफिस को भेजी गई थी, जो नियमों की घोर अवहेलना की श्रेणी में आता है। रिपोर्र्ट के मुताबिक डीजी सेट और उसके इंस्टालेशन की जानकारी रिपोर्ट में मेंशन नहीं की गई थी। 25-10-13 की निरीक्षण रिपोर्ट और औद्योगिक इकाइयों की ओर से जो लिस्ट दी गई हैं, उसमें वाशिंग टैंक की साइज व डाइंग पैडिंग के नंबर में समानता नहीं है।
सीए की रिपोर्ट में भी ओवरराइटिंग मिली थी
जांच में यह भी कहा गया कि उक्त फैक्ट्री की निरीक्षण रिपोर्ट 24-12-11 व 25-10-13 में वाशिंग टैंक की साइज में समानता नहीं है। इंडस्ट्री द्वारा जो सीए सर्टिफिकेट दिया गया था उसमें भी ओवर राइटिंग है। 2007 के सर्वे के बाद इंडस्ट्री द्वारा डाईंग पेंडिंग को डिस्मेंटल नहीं किया गया है। विभाग की तरफ से 25 अक्टूबर 13 की निरीक्षण रिपोर्ट के अनुसार उसके पेज समान रंग के नहीं है। साथ ही पेज के नंबर भी सीरियल वाइज नहीं होकर अलग-अलग नंबर के पेज पाए गए। जैसे पेज नं. 3 व 4 अलग तरह के थे। 25 अक्टूबर 13 की रिपोर्ट में ही अलग-अलग पेज पर अलग-अलग अधिकारियों के हस्ताक्षर है। जैसे पेज नं. 1, 2, 5 और 6 पर आरओ के और 3 व 4 नंबर पेज पर जेएसक्यू के हस्ताक्षर पाए गए हैं। इसमें पेज नंबर 1, 2, 5 व 6 तो ऑरिजनल रिपोर्ट के पेज है व 3 और 4 फोटो कॉपी है।




ऑरिजनल इंस्पेक्शन रिपोर्ट उद्यमियों के पास कैसे पहुंची?

राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सीनियर एनवायरमेंटल इंजीनियर ((टैक्सटाइल)) की आरओ को भेजी गई रिपोर्ट में बताया कि इन सभी तथ्यों से यह साबित होता है कि फैक्ट को बदलना, ओवर राइटिंग यानि काटा छांटी और पेज को बदलना यूनिट प्रतिनिधियों द्वारा किया गया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पूर्व में इसके लिए फोन पर भी सूचित कर दिया गया था कि उद्यमियों को जांच रिपोर्ट की ऑरिजनल कॉपी न दें, लेकिन इसके बावजूद कई यूनिट प्रतिनिधियों द्वारा ऑरिजनल कॉपी मुख्यालय में पेश की गई।

रिपोर्ट में साबित हुआ था कि बदल दिया फैक्ट्स

फिर भी जारी हो गई कंसेंट-टू-ऑपरेट

इसके लिए स्थानीय अधिकारियों को हर मुद्दे पर अपना क्लेरीफिकेशन देने को कहा गया है। इसके साथ ही इकाइयों के पुन: निरीक्षण जांच कर दस्तावेजों की पुष्टि करने, सारे दस्तावेज औद्योगिक इकाइयों से प्राप्त करने, डिटेल वेरीफिकेशन रिपोर्ट भी देने के लिए कहा गया था। निर्देश में यह भी कहा गया है कि अधिकारिक जो नियम व कायदे है उनके आधार पर रिपोर्ट हैड ऑफिस में पेश करें और इसकी ऑरिजनल कॉपी यूनिट के किसी भी प्रतिनिधि को न दें। इतना कुछ होने के बाद भी मुख्यालय ने इस फर्म के नाम पर कंसेंट-टू-ऑपरेट जारी कर दी गई है। इस बारे में स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि संबंधित फर्म ने अपनी कमियां पूरी कर दी थी, इसके बाद ही उसे कंसेंट-टू-ऑपरेट जारी की गई है। बताया जा रहा है कि अधिकारियों ने खुद को बचाने के लिए फर्म से गलती स्वीकार करने का जवाब पेश करवा दिया।

> फर्म द्वारा गलत तरीके से रिपोर्ट को पेश किया गया है इस संबंध में नोटिस भी भेजा गया है।

इसकी जानकारी मुझे नहीं है।

> संबंधित फर्म पर गलत रूप से रिपोर्ट पेश करने का आरोप लगा है।

पूर्व में फर्म में कुछ खामियां थी, इसके फलस्वरूप कार्रवाई के तौर पर बिजली कनेक्शन काटे गए थे।

> तो रिपोर्ट किस आधार पर भेजी गई थी।

रिपोर्ट की जानकारी मुझे नहीं है लेकिन इसके लिए जो कार्रवाई हुई थी इसके बाद बोर्ड की ओर से जो निर्देश मिले थे वो फर्म ने पूरे कर लिए थे।

> इसके खिलाफ कोई कार्रवाई।

- कार्रवाई किस आधार पर होगी। फर्म को कंसेंट के लिए परमिशन मिल चुकी है वो भी हैड ऑफिस से जारी की गई है। फर्म ने क्या किया और किस आधार पर किया मुझे नहीं पता। बस पूर्व में कार्रवाई के बाद हमने रिपोर्ट बनाकर भेज दी थी। फर्म की ओर से इसे पूरा कर दिया गया था, इसके बाद ही उसे कंसेंट की परमिशन मिल गई थी।

हैड ऑफिस ने तो कंसेंट टू ऑपरेट ही जारी कर दीआरवी मौर्य, आरओ, प्रदूषण बोर्ड

रिपोर्ट में गड़बड़ी सामने आने के बाद भी एक फर्म को कंसेंट-टू-ऑपरेट जारी की

पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने क्षेत्रीय कार्यालय की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, आरओ से मांगा स्पष्टीकरण दूसरी तरफ गड़बडिय़ों को दरकिनार कर जारी कर दी कंसेंट टू ऑपरेट, पूरी प्रक्रिया सवालों के घेरे में

उठ रहे सवाल

> जब फर्म ने अपनी गलती स्वीकार कर ली, इसका मतलब गड़बड़ी हुई है फिर कैसे कंसेंट टू ऑपरेट जारी हुई?

> पूरे मामले में क्षेत्रीय अधिकारी कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं, फिर भी कोईकार्रवाईक्यों नहीं की गई?

> ऐसी गड़बड़ी कई अन्य फर्मों की जांच रिपोर्ट के साथ भी है? बावजूद अधिकारी पर्दा क्यों डाल रहे हैं?

आरओ ने कहा - पूरी कर दी कमियां

इस संबंध में आरओ ने भी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जवाब पेश किया है। रिपोर्ट के मुताबिक आरओ ने बताया कि जो बोर्ड की ओर से निर्देश दिए गए थे उसे पूर्ण कर दिया गया है। इसके लिए क्लोजर नोटिफिकेशन को भी फिर से लेने की अपील की गई थी। उन्होंने बताया कि पूर्व में जो फ्लोमीटर, केएलडी, डिमेटलिंग और टैंकर व्यवस्था आदि को लेकर संबंधित फर्म द्वारा पूरी कार्रवाई कर दी गई है। इसके साथ ही फर्म की ओर से वाटर डिस्चार्ज के लिए आउटलेट्स को भी बंद कर दिया गया है।