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एक प्रवचन ने बदल दी जीवन की दिशा, अब अनंत सुख की तलाश : मुमुक्षु सोनू
भास्कर न्यूज - पाली
7 जुलाई 2011 का दिन था वह। चातुर्मास के दौरान यहां पाली में गुरुवर्या डॉ. ज्ञानप्रभाजी के प्रवचन चल रहे थे। मैं भी अपने मम्मी-पापा एवं परिवार के अन्य सदस्यों के साथ नियमित जाती थी। इस दिन अचानक मैंने घर लौटकर प्रवचनों पर चिंतन शुरू किया। फिर तो यह प्रक्रिया प्रतिदिन की हो गई। प्रवचनों पर चिंतन के दौरान ही इस संसार का असली स्वरूप सामने आया। तब मुझे यह भी समझ आया कि इंसान जिन सुखों के पीछे भाग रहा है वे क्षणिक हैं। अनंत सुख तो ईश्वर की शरण में ही है। संसारी पथ और संयम पथ के बीच का अंतर भी इस अंतराल में मालूम हुआ। तब मन में वैराग्य अवस्था की चेतना विकसित होने लगी और संयम पथ पर चलने का निर्णय लिया। चातुर्मास के बाद जब उन सभी उपदेशों को दोहराना शुरू किया तो पता चला जिसका दिन डिप्रेशन में और रात टेंशन में बीते वह संसारी है। संयमी वह है जिसका दिन ज्ञान में और रात ध्यान मे बीते। तभी मैंने तय किया कि मैं चरित्र संपन्न जीवन जीकर अपना जीवन उज्जवल तथा तेजस्वी बनाना चाहती हूं। प्रभु महावीर का मार्ग अनंत-सुख-शांति प्रदान करने वाला है। इस दौरान लक्ष्य बनाया कि संयम पथ पर चलकर भगवान महावीर के ही सिद्धंातों को अपने समाज और जन हित में प्रसार करूंगी। ताकि समाज और लोगों में अहिंसा, प्रेम और करूणा का संदेश प्रसारित हो।