- Hindi News
- संस्कारों व साधना को ग्रहण करना भी दीक्षा है : गौतम मुनि
संस्कारों व साधना को ग्रहण करना भी दीक्षा है : गौतम मुनि
भास्कर न्यूज - पाली
आचार्य रघुनाथ स्मृति भवन में मुमुक्षु सोनू लुंकड़ के दीक्षा महोत्सव के तहत बुधवार को उप प्रवर्तक गौतम मुनि, संजय मुनि, डॉ.ज्ञान प्रभा सहित अन्य साध्वीमंडल के सानिध्य में मेहंदी की रस्म हुई। इस कार्यक्रम का शुभारंभ जप-तप और तीन-तीन सामयिकों के साथ हुआ। इससे पूर्व मुमुक्षु का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में गौतम मुनि महाराज ने उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को संबोधित करते हुए कहा कि समाज में जो गौरव बढ़ाने का कार्य करते हैं, उन्हें गौरवशाली स्थान मिलता है। दीक्षा का अर्थ समझाते हुए उन्होंने बताया कि शुभ साधना व संस्कारों को ग्रहण करना भी एक प्रकार की दीक्षा है। इसके लिए हमें संसार के किसी भी कार्य करने से पूर्व प्रभु का अवश्य स्मरण करना चाहिए। इस अवसर पर साध्वी नियम प्रभा ने दीक्षा अनुमोदन गीत प्रस्तुत किया।
इसलिए होती है मेहंदी की रस्म
दीक्षा से पूर्व धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन की कड़ी में मेहंदी की रस्म निभाई जाती है। समाज के लोगों ने बताया कि दीक्षा से पहले मेहंदी की रस्म एक तरह से प्रलोभन है, लेकिन जब मेहंदी लगने के बाद रंग छोड़ती है तो वह त्याग का प्रतीक होता है। यानी, यह सांसारिक मोह माया के त्याग का प्रतिक है। इस दौरान इस रस्म में मौजूद सभी महिलाएं भी अपने हाथों में मेहंदी लगाती हैं, ताकि हर जन मानस को यह संदेश प्रसारित हो।