- Hindi News
- मेडिकल कॉलेज की जमीन के लिए वन विभाग ने यूआईटी को किया इनकार
मेडिकल कॉलेज की जमीन के लिए वन विभाग ने यूआईटी को किया इनकार
भास्कर न्यूज - पाली
पिछली सरकार के आखिरी बजट में पाली को मिली मेडिकल कॉलेज की सौगात फिलहाल जमीन के चक्कर में अटकी हुई है। चिकित्सा विभाग ने मेडिकल कॉलेज और नर्सिंग कॉलेज प्रोजेक्ट के लिए यूआईटी से बांगड़ स्टेडियम के पीछे पड़ी वन विभाग की खाली पड़ी 250 बीघा जमीन की मांग की थी। वन विभाग ने फिलहाल यह कहते हुए इनकार कर दिया है कि जमीन चिकित्सा विभाग को चाहिए तो वह नियमानुसार सीधे डिमांड करे। किसी दूसरे विभाग की जरूरत के लिए यूआईटी को जमीन ट्रांसफर नहीं की जा सकती। ऐसे में चिकित्सा विभाग अब दुबारा इस जमीन के लिए वनविभाग से मांग करेगा। जमीन के कारण यह प्रोजेक्ट चार से पांच महीने और देरी से शुरू होगा।
पिछली सरकार के आखिरी बजट में जिले को यूआईटी के साथ मेडिकल कॉलेज की भी सौगात मिली थी। यूआईटी ने अपना कामकाज शुरू कर दिया तो करीब छह माह पहले चिकित्सा विभाग ने मेडिकल कॉलेज के लिए यूआईटी के अधिकारियों को पत्र लिखकर स्टेडियम के पीछे वन विभाग की करीब 250 बीघा जमीन की मांग की थी। इस पर यूआईटी ने वन विभाग के जयपुर मुख्यालय को फाइल भेज दी। वन विभाग ने फोरेस्टएक्ट का हवाला देते हुए इस जमीन को देने से इनकार कर दिया। अब यूआईटी ने चिकित्सा विभाग को पत्र भेजकर अपने स्तर पर जमीन लेने का प्रयास करने को कहा है। इसके बाद चिकित्सा विभाग ने दुबारा इस जमीन के लिए प्रस्ताव बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। शेष - पेज १५
मेडिकल और नर्सिंग कॉलेज एक साथ बनाने की भी योजना
वन विभाग की जिस जमीन पर चिकित्सा विभाग मेडिकल कॉलेज बनाना चाहता था, उसी पर नर्सिंग कॉलेज बनाने का भी प्रस्ताव रखा था। मेडिकल कॉलेज के लिए करीब 100 से 150 बीघा जमीन चाहिए जबकि नर्सिंग कॉलेज के लिए करीब 100 बीघा जमीन की मांग की गई है। अब जमीन नहीं मिलने से फिलहाल यह दोनों प्रोजेक्ट रुक गए हैं।
यह है नियम - वन विभाग की जमीनों पर वन संरक्षण अधिनियम लागू होता है। चूंकि इन जमीनों का स्वामित्व भारत सरकार का होता है इसलिए इनका आवंटन राज्य सरकार नहीं कर सकती। एक्ट के अनुसार जिस विभाग को जिस पर्पज से जमीन चाहिए, उसे सामने होना चाहिए। यह प्रपोजल मुख्यालय से केंद्र सरकार के पास जाता है और वहीं से मंजूरी मिलती है। अगर वन विभाग यह जमीन देता है तो बदले में वह इतनी ही जमीन और नियमानुसार राशि भी वसूल करेगा।
चार से पांच महीने लेट शुरू होगा प्रोजेक्ट, लेकिन विभाग को जमीन मिलने की उम्मीद
चिकित्सा विभाग के अधिकारियों की मानें तो वन विभाग की ओर से मना करने पर एक बार फिर से कागजी कार्रवाई पूरी कर उन्हीं से जमीन मांगी जाएगी। इसके लिए रेवेन्यू विभाग को डिमांड भेजी जाएगी। यह डिमांड रेवेन्यू विभाग से वन विभाग जाएगी। यदि इसके लिए विभाग राजी हो जाता है तो वह जमीन देने के लिए रेवेन्यू विभाग को स्वीकृति देगा और इसके बाद यह जमीन चिकित्सा विभाग को दे दी जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया में करीब चार से पांच महीने और लग जाएंगे।
अब फिर से वन विभाग को प्रस्ताव भेजने की तैयारी
॥हमने मेडिकल कॉलेज के लिए वन विभाग की जमीन के लिए यूआईटी को लिखा था, लेकिन विभाग ने जमीन देने से मना कर दिया है। अब एक बार फिर से इस जमीन के लिए प्रयास किए जाएंगे। वैसे रामासिया में अस्थाई जमीन दी गई है, पर विभाग चाहता है कि मेडिकल कॉलेज व नर्सिंग कॉलेज का निर्माण बेहतर जगह पर हो।
डॉ. आरके पामेचा, पीएमओ, बांगड़ अस्पताल, पाली
॥चिकित्सा विभाग की ओर से मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन की डिमांड की गई थी। इस पर यूआईटी ने करीब तीन सौ बीघा जमीन वन विभाग से मांगी थी। फोरेस्ट एक्ट के तहत वह जमीन नहीं दी जा सकी। इसके लिए हमने चिकित्सा विभाग को लिख दिया है कि विभाग अब अपने स्तर पर जमीन की डिमांड करे।
- छगनलाल श्रीमाली, सचिव, यूआईटी
ठ्ठ इसी जमीन पर एक साथ मेडिकल व नर्सिंग कॉलेज बनाने का प्रस्ताव था, शहर से नजदीक होने के कारण विभाग ने यह जमीन यूआईटी के मार्फत मांगी थी
ठ्ठ वन विभाग ने फिलहाल यह कहते हुए इनकार किया है कि जमीन चिकित्सा विभाग को चाहिए तो वह सीधे मांगे, किसी और विभाग के लिए यूआईटी को नहीं दे सकते, अब चिकित्सा विभाग फिर से इसी जमीन के लिए कागजी कार्यवाही शुरू करेगा, फिर भी नहीं मिली तो रामासिया में उपलब्ध 96 बीघा जमीन पर मेडिकल कॉलेज बनाने के विकल्प पर करेंगे विचार
आगे
क्या
वन विभाग से जमीन नहीं मिली तो रामासिया में बनेगा मेडिकल कॉलेज
वन विभाग की जमीन नहीं मिलती है तो मेडिकल कॉलेज के लिए चिकित्सा विभाग नए सिरे से तैयारियां शुरू करेगा। अधिकारियों के अनुसार रामासिया में चिकित्सा विभाग को आवंटित करीब 96 बीघा जमीन उपलब्ध है। इस पर मेडिकल कॉलेज बनाया जा सकता है। हालांकि विभाग चाहता है कि मेडिकल कॉलेज के लिए अच्छी और शहर से जुड़ी लोकेशन मिले, ताकि पूरी तरह से सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें ।
अटकी घोषणा
जमीन के कारण एक बार फिर अटका मेडिकल कॉलेज का प्रोजेक्ट, चिकित्सा विभाग ने यूआईटी से मांगी थी बांगड़ स्टेडियम के पीछे पड़ी वन विभाग की 250 बीघा जमीन