पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • संयम और त्याग की अनंत यात्रा पर चलने का नाम है दीक्षा

संयम और त्याग की अनंत यात्रा पर चलने का नाम है दीक्षा

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

भास्कर न्यूज - पाली
सुख भोगने में नहीं त्याग का परिचायक है दीक्षा। दीक्षा ह्रदय परिवर्तन की प्रक्रिया है और इसी से जुड़ा है जीवन परिवर्तन का अनुष्ठान। यह बात साध्वी श्रमणी सूर्या डॉ. ज्ञान प्रभा ने दीक्षा के महत्व को बताते हुए कही। ‘भास्कर’ से हुई बातचीत में उन्होंने दीक्षा के महत्व को समझाया। साथ ही उन्होंने दीक्षा से पूर्व होने वाली विभिन्न रस्मों की भी जानकारी दी जो सांसारिक जीवन से कहीं ना कहीं और किसी न किसी रूप में जुड़ी रहती हैं। उन्होंने बताया कि दीक्षा से जुड़ी हर रस्म त्याग और धर्म के संयम पथ पर चलने का प्रतीक है। तिलक रस्म यानी, पाट बिठाई से लेकर अंतिम दीक्षा महोत्सव तक दीक्षार्थी को हर रस्म में प्रलोभन से जोडऩे के साथ उसे त्याग और सांसारिक मोह का परित्याग करने का संदेश दिया जाता है, ताकि वह संयम पथ को धारण कर समाज और जनमानस में धर्म की प्रभावना को बढ़ाए।
मुनि मिश्रीमल से लेकर मूल मुनि तक ने ली यहीं से दीक्षा : पाली की धर्म धरा पर यह पहला मौका नहीं है। इससे पूर्व भी कई दीक्षार्थियों ने यहां दीक्षा ग्रहण कर श्रमण जीवन को स्वीकारा। इस धरा से दीक्षा लेकर अपनी आत्मा का कल्याण करने के साथ जैन धर्म को गौरवान्वित किया। इसमें मरुधर केसरी मिश्रीमल महाराज सा भी शामिल हैं। साथ ही श्रमण संघ के वरिष्ठ उपाध्याय मूल मुनि महाराज सा भी पाली के निवासी हैं। उन्होंने भी जैन दिवाकर चौथमल महाराज सा से दीक्षा ली। इसके अलावा कई और भी ऐसे आचार्य व संत हुए जिन्होंने यहां से दीक्षा ग्रहण कर धर्म की प्रभावना को बढ़ाया। इतना ही नहीं, महासती मंडल में भी महान तपस्वी और विदुषी हुई, उन्होंने भी पाली से ही दीक्षा ली। इनमें साध्वी उगम कंवर, झंकार कंवर, उम्मेद कंवर, नवीन ज्योति, डॉ. दर्शन प्रभा,भाग्यवंती और विश्वास साध्वी मुख्य रहीं।
प्रलोभनों के साथ संयम की परीक्षा : दीक्षा से पूर्व होने वाली सभी रस्में कहीं ना कहीं प्रलोभनों से भरी होती हैं, लेकिन इसके साथ ही संयम की परीक्षा भी ली जाती है। इससे पता चल सके दीक्षा से पूर्व इतने प्रलोभन देने के बावजूद दीक्षार्थी संयम पथ पर चलने के लिए कितना संयमी है।
नवकार मंत्र के साथ हुआ रक्षाबंधन कार्यक्रम,
आज बड़ी बिंदोली
रघुनाथ स्मृति जैन भवन में गुरुवार को उप प्रवर्तक गौतम मुनि, संजय मुनि और डॉ. ज्ञान प्रभा महाराज के सानिध्य में नवकार मंत्रों के साथ रक्षाबंधन सूत्र कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुमुक्षु सोनू लुंकड़ ने मंगल पाठ भी सुनाया। इस दौरान मुमुक्षु ने सभा भवन मे उपस्थित सभी भाई-बहिनों के माथे पर तिलक कर कलाई में रक्षा सूत्र बांधा। इस दौरान मुमुक्षु लुंकड़ का वरघोड़ा निकाला गया।