पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • फीस रिकॉर्ड की खामियां, 629 स्कूलों का भुगतान रोका

फीस रिकॉर्ड की खामियां, 629 स्कूलों का भुगतान रोका

8 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
नगर संवाददाता. सीकर
प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने प्रदेश के 24 हजार और सीकर जिले के 629 स्कूलों को दी जाने वाली पुनर्भरण राशि का भुगतान रोक दिया है। ऑनलाइन वेबपोर्टल के जरिए निर्धारित की गई भुगतान प्रक्रिया में तकनीकी पेंच फंसने के कारण विभाग खुद उलझन में पड़ गया है। कई स्कूलों के फीस रिकॉर्ड में खामियों, दान अथवा चंदे के नाम पर फीस वसूलने समेत अन्य पेचीदगियों के चलते ऑनलाइन भुगतान रोक दिया गया है।
25 फीसदी सीटों पर दाखिले के बदले निजी स्कूलों को सरकार की तरफ से पुनर्भरण राशि दी जानी है। पहली किस्त अक्टूबर में ही मिलनी चाहिए थी लेकिन अभी तक यह राशि स्कूलों को नहीं मिल पाई है। राज्य में 26 हजार 686 निजी स्कूलों ने 25 फीसदी सीटों पर सवा लाख से अधिक गरीब बच्चों को प्रवेश दिया है। सीकर में करीब छह हजार विद्यार्थियों को दाखिला मिला लेकिन जांच में सिर्फ चार हजार ही खरे उतरे। स्कूलों का सत्यापन होने के बाद विभाग ने भुगतान के लिए बजट भी जारी कर दिया है लेकिन प्रदेश के तीन हजार स्कूलों का भुगतान होते ही इसे रोक दिया गया है। एसएसए के आयुक्त नरेशपाल गंगवार ने बताया कि पुनर्भरण राशि के ऑनलाइन भुगतान के दौरान कई समस्याएं सामने आने के कारण भुगतान रोका गया है। मामला उच्चाधिकारियों के पास विचाराधीन है।



सबसे ज्यादा सीकर शहर के स्कूलों को पुनर्भरण राशि मिलेगी। यहां 2911 स्टूडेंट के दाखिले जांच के बाद सही पाए गए हैं। सबसे कम धोद में सिर्फ दो स्कूलों के नौ स्टूडेंट को आरटीई के तहत फीस मिलेगी। शिक्षा विभाग ने स्कूलों को फीस देने के लिए डाटा तैयार करना शुरू कर दिया है। सरकार ने जिले के लिए 90 लाख 95363 रुपए की राशि ट्रांसफर की है।

इतनी फीस सरकार ने की है निर्धारित: पिछले सत्र में अधिकतम पुनर्भरण राशि 9,748 रुपए निर्धारित की थी। चालू सत्र के लिए इसे बढ़ाकर 11,704 रुपए किया गया। सरकार के राशि बढ़ाए जाने के कारण अधिकतर स्कूलों ने अधिक पुनर्भरण राशि लेने के लिए मौजूदा सत्र में फीस 300 प्रतिशत तक बढ़ा दी है। सरकार को यह जानकारी मिलने पर पिछले सत्र के अनुसार ही पुनर्भरण राशि देने का फैसला किया गया है।



सबसे ज्यादा सीकर शहर के स्कूलों को मिलनी है पुनर्भरण राशि