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रसोई गैस उपभोक्ताओं की नाराजगी संचालकों पर पड़ेगी भारी
नगर संवाददाता. सीकर.
रसोई गैस उपभोक्ताओं की नाराजगी एजेंसी संचालकों पर भारी पड़ सकती है। ऑयल कंपनियों ने नए आदेश में एजेंसियों की हर गलती पर जुर्माने की व्यवस्था की है।
पेट्रोलियम कंपनियों की तरफ से उपभोक्ताओं को राहत देने तथा गैस एंजेसियों के संचालकों की मनमानी रोकने के लिए गाइडलाइन जारी कर उसमें प्रत्येक गलती के लिए जुर्माना राशि का प्रावधान किया है। तेल कंपनियों की नई मार्केट डिसिप्लिन गाइडलाइन में 2001 के बाद यह संशोधन किया गया है। जानकारी के अनुसार नए गैस कनेक्शन पर संचालकों की तरफ से जबरन थमाए जाने वाले चूल्हे, लाइटर समेत अन्य सामान देने पर अब पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। साथ ही गाइडलाइन के तहत जुर्माने और कमीशन में कटौती के अलावा अनियमितता पाए जाने पर एजेंसियों को बर्खास्त करने का प्रावधान भी तय कर दिया है। उपभोक्ता के साथ दुव्र्यवहार करने पर एजेंसी के कमीशन में कटौती की जा सकती है। शेष पेज : २२
अति गंभीर अनियमितताएं
रिफिलिंग के कारोबार में लिप्तता पाए जाने पर।
डिलीवरी वाहन में 25 फीसदी से अधिक गैस सिलेंडर में कम गैस होना।
गोदाम में 10 से अधिक नकली सिलेंडर या रेगुलेटर मिलना।
सब्सिडी और नॉन सब्सिडी के 10 से अधिक भरे सिलेंडरों का स्टॉक इधर-उधर होना।
यूं कटेगा कमीशन
पहली बार एक माह के डीलर कमीशन की 50 फीसदी राशि काटने का प्रावधान तय किया है।
दूसरी बार में एक माह का कमीशन और तीसरी बार गलती करने पर एजेंसी का लाइसेंस तक बर्खास्त किया जा सकता है।
इसके अलावा संचालक की गलती के हिसाब से जुर्माना राशि अलग से वसूली जाएगी।
गंभीर अनियमितताएं
नए कनेक्शन, सिलेंडर डिलीवरी एवं अन्य सेवाओं की तेल कंपनी की निर्धारित दर से अधिक पैसा वसूलना।
चूल्हे और अन्य नॉन एलपीजी प्रोडक्ट खरीदने के लिए दबाव।
यूं कटेगा कमीशन
पहली बार डीलर के एक महीने के कमीशन में 25 फीसदी राशि काटने का प्रावधान।
दूसरी बार में 50 फीसदी कमीशन और तीसरी बार गलती करने पर 75 फीसदी कमीशन काटा जाएगा।
इसके बाद चौथी गलती पर एजेंसी बर्खास्त की जा सकती है।
अल्प गंभीर अनियमितताएं
डिलीवरी वैन के सिलेंडरों में 10 फीसदी में कम गैस।
सब्सिडी और नॉन सब्सिडी के 5 भरे सिलेंडरों का स्टॉक इधर-उधर होना।
बुकिंग तोड़कर उपभोक्ताओं को सप्लाई या नया कनेक्शन, बिल न देना, उपभोक्ताओं से दुव्र्यवहार, एजेंसी बंद रखना, समय पर सप्लाई न देना।
एजेंसी पर पर्याप्त संसाधन, मय यूनिफार्म स्टॉफ इंटरनेट सेवा न होना, लेखा संधारण में खामी।