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मिडिल स्कूलों में नहीं होंगे प्रधानाध्यापक, सिर्फ विषय अध्यापक होंगे
सीकर. मिडिल स्कूलों में सिर्फ विषय अध्यापक पढ़ाई कराएंगे। राइट टु एजुकेशन एक्ट में यह व्यवस्था की गई है। कानून में राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियमों में सिर्फ विषय अध्यापक रखने का ही प्रावधान किया गया है। इसके अलावा प्रधानाध्यापक जैसा कोई पद इन स्कूलों में नहीं होगा। इन नियमों से अब उच्च प्राथमिक विद्यालयों के द्वितीय श्रेणी शिक्षकों में हलचल बढ़ गई है। शिक्षा विभाग के साथ-साथ पंचायतीराज के शिक्षक भी इस वरिष्ठता में शामिल हैं। आरटीई पर केंद्र सरकार द्वारा दी गई गाइड लाइन के बाद प्रदेश सरकार ने अपने स्तर पर कुछ बदलाव किए, जिसमें विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर शिक्षकों की संख्या तय की गई। इससे पूर्व तक उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक व विषय अध्यापक होते थे। प्रदेश सरकार के नियमों के अनुसार अब सिर्फ पांच विषय अध्यापक ही होंगे। यदि विद्यार्थियों की संख्या बढ़ती है तो शिक्षकों की संख्या बढ़ेगी।
यह होगा असर
प्रदेश सरकार के इस प्रावधान के बाद उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक नहीं रहेंगे। ऐसे में प्रधानाध्यापक को दी जाने वाली जिम्मेदारियों को लेकर खींचतान शुरू हो जाएगी। वरिष्ठता के अभाव में शिक्षकों पर से नियंत्रण खत्म हो जाएगा। वर्तमान में प्रधानाध्यापक नोडल केंद्रों द्वारा दिए जाने वाले कामकाज के साथ-साथ पोषाहार, डाक, छात्रवृत्ति, राज्य व केंद्र सरकार की योजनाओं को लागू करवाने के लिए जिम्मेदार होते हैं।