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एसके अस्पताल में मिलेगी डायलिसिस की सुविधा

7 वर्ष पहले
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सीकर. एसके अस्पताल में मरीजों को जल्द ही डायलिसिस की सुविधा मिलेगी। यहां एक दानदाता के सहयोग से हीमो डायलिसिस मशीन लगाई जाएगी, जिसका क्रोनिक रिनल फेल्योर ((किडनी फेल)) मरीजों को फायदा मिलेगा। सीकर प्रदेश का पहला जिला होगा, जहां जिला अस्पताल में ये सुविधा शुरू होगी। अब तक सिर्फ मेडिकल कॉलेजों में ही डायलिसिस की सुविधा थी। इस मशीन पर करीब 25 लाख रुपए का खर्चा आएगा। फिलहाल किडनी फेल होने पर डायलिसिस के लिए मरीजों को जयपुर जाना पड़ता है। एक अनुमान के मुताबिक जिले के करीब 600 लोगों को हर महीने डायलिसिस कराना पड़ रहा है। निजी अस्पताल में प्रति डायलिसिस के 800 से दो हजार रुपए तक देने पड़ते हैं। किसी मरीजों को एक महीने में तो किसी को एक सप्ताह या हर दूसरे दिन डायलिसिस कराना पड़ता है। सीकर के बिजनेस मैन सैयद मोहम्मद शाबीर ने गणतंत्र दिवस समारोह में अस्पताल को यह मशीन देने की घोषणा की। शाबीर का कहना है कि लायंस क्लब क्राउन की ओर से इस बारे में कई बार कहा भी गया था। क्लब अध्यक्ष डॉ. महेश सचदेवा ने बताया कि सैयद ने यहां पहले डीप फ्रीजर दिया था। इसके अलावा ऑटो किरेटो रेफक्टो मीटर के लिए करीब सवा चार लाख रुपए दिए हैं।
॥दानदाता ने मशीन देने की घोषणा की है। इसके लिए स्टाफ को प्रशिक्षित किया जाएगा। इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार करेंगे। मरीजों को इस सुविधा से फायदा होगा। -डॉ. एसके शर्मा, पीएमओ




डायलिसिस के जरिए ब्लड किया जाता है फिल्टर

क्रोनिक रिनल फेल्योर यानी किडनी फेल होने पर शरीर में यूरिया, अमोनिया, क्रिएटिनिन, यूरिक एसिड जैसे जहरीले अवयव की मात्रा बढऩे के साथ ब्लड कम होने लगता है। डायलिसिस के जरिए इन जहरीले अवयवों को बाहर कर ब्लड को फिल्टर किया जाता है। इस बीमारी को इरीवर्सिबल भी कहा जाता है जो एक बार होने पर दोबारा ठीक नहीं हो सकती और मरीज को समय-समय पर डायलसिस ही करना पड़ता है। ऐसे में खर्चा भी काफी होता है। खासकर ब्लड में क्रिएटिनिन का .5 से 1.5 लेवल नॉर्मल माना जाता है, लेकिन लेवल आठ होने पर डायलिसिस जरूरी है। ऐसा न होने पर मरीज की जान तक जा सकती है।

किडनी फेल होने के ये भी हैं साइड इफेक्ट : फिजिशियन डॉ. दर्शन भार्गव के मुताबिक किडनी फेल होने के साइड इफेक्ट भी हैं। ब्लड कम होने के साथ इन्फेक्टेड हो जाता है। जोड़ों में दर्द, उल्टी, स्किन का कमजोर होना, भूख कम लगना आदि भी होता है। हार्ट इफेक्ट होता है और क्रिटिनन की मात्रा ज्यादा बढऩे पर ब्लीडिंग तक शुरू हो जाती है।