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डाउनलोड करेंउदयपुर. जनजाति क्षेत्रों में बालिकाओं को माध्यमिक शिक्षा तक आजादी है, लेकिन सामाजिक पाबंदियां बहुत हैं। गांवों में बालिकाओं के विवाह में अब शिक्षा का भी पैमाना बनाया गया है। उच्च शिक्षा को तवज्जो नहीं है, लेकिन घर में पढ़ी लिखी बहु लाना इन परिवारों की प्राथमिकता बनती जा रही है। शादी ब्याह में घर वालों की जवाबदेही है, तो शादी की उम्र में कोई निर्धारित सीमा नहीं है।
निष्कर्ष आए हैं आईआईएम उदयपुर के विद्यार्थियों द्वारा जिले की जनजाति बालिकाओं पर हुए सर्वे में। द्वितीय बैच के 60 विद्यार्थियों ने दल बनाकर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में यह सर्वे किया। जहां उनकी सामाजिक सुरक्षा आदि पर सर्वे हुआ। इधर, इन बालिकाओं के लिए सरकारी योजनाओं की बात की जाए तो शिक्षा विभाग ही एकमात्र विकल्प हैं, जहां इन बालिकाओं को इन योजनाओं तक पहुंचाया जा सकता है।
जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इन बालिकाओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करें।
सामाजिक स्वतंत्रता को लेकर अधिक जोर देना होगा। बालक बालिका के भेदभाव को मिटाने के प्रयास होने चाहिए।
गांवों में सामाजिक समानता की विचारधारा के कार्यक्रम होने चाहिए।
गांवों की परंपरागत रुढिय़ों आदि के दुष्प्रभावों को समझाया जाना चाहिए।
बालिका अत्याचार के प्रति प्रशासन को सचेत रहना आवश्यक है।
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