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भाषा के स्वरूप में परिवर्तन नई सदी की बड़ी चुनौती : अग्रवाल
उदयपुर - आलोचक और साहित्यकार प्रो. पुरुषोत्तम अग्रवाल ने कहा कि भाषा के स्वरूप में परिवर्तन नई सदी की बड़ी चुनौती है। प्रो. अग्रवाल गुरुवार को सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि परिवर्तनों की गति तीव्र है। सूचना प्रोद्यौगिकी के कारण दूरियां कम हुई है, लेकिन इसने भाषा को उसके वास्तविक अर्थों से दूर कर दिया है। दूसरे आधार सत्र में डॉ. हेतु भारद्वाज ने सभ्यता के इतिहास और मानवीय मूल्यों के संदर्भ में नई शताब्दी को चुनौतीपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश शासन के दौर में शुरू हुई पाश्चात्यकरण की प्रवृत्ति आज तक जारी है। इस नकल में हमने अपने सभी वांछनीय जीवन मूल्य भी खो दिए। साहित्यकार और विचारक सी.पी. देवल ने कहा कि हमें भाषा की दुर्दशा के विषय में विचार करने की आवश्यकता है। इस मौके पर डॉ. नवीन नंदवाना की संपादित क्रसमकालीन कविता : विविध संदर्भ’ और डॉ. आशीष सिसोदिया के रिसर्च जर्नल क्रनव सृजन’ का विमोचन किया गया।