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जावर माइंस बंद, ग्रामसभा में एनओसी के लिए गांव वालों ने किया इनकार

8 वर्ष पहले
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उदयपुर. हिंदुस्तान जिंक की जावर माइंस वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से स्वीकृति नहीं मिलने पर गुरुवार मध्यरात्रि से बंद कर दी गई। माइंस के 16 सौ अस्थाई ठेका श्रमिकों को इकाई बंद होने से घर बैठने की नौबत आ गई है। जिंक की जावर माइंस को वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने ग्रामीणों से ग्राम सभा में अनुमोदित अनापत्ति प्रमाण पत्र लाने के लिए एक साल का समय दिया गया था।

ग्रामीणों के विरोध के चलते यह संभव नहीं हो पाया और समय पूरा होने पर गुरुवार रात 12 बजे से माइंस में खनन कार्य रोक दिया गया। जिंक और शीशा की अंडर ग्राउंड माइंस में तीन पारी में सोलह सौ अस्थाई ठेका श्रमिक और छह सौ स्थाई श्रमिक कार्यरत है। रात को आठ बजे की पारी में गुरुवार को करीब छह सौ अस्थाई और दो सौ स्थाई श्रमिक काम पर पहुंचे।

उन्हें प्रबंधन ने रात 12 बजे हटवा दिया। कॉर्पोरेट कम्यूनिकेशन हैड पवन कौशिक ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से स्वीकृति के लिए प्रयास जारी है। तब तक के लिए खनन कार्य रोक दिया गया जबकि माइंस दफ्तर और अन्य कार्य संचालित होगा।