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पंथ सिर्फ मार्ग, लगाव धर्म सिद्धांत से हो

8 वर्ष पहले
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नगर संवाददाता - उदयपुर
पंथ की दीवारों में कैद कर मानवता के टुकड़े करने वाले, आपस में नफरत अलगाव फैलाने वाले कट्टरपंथी संत अलकायदा और तालिबान से कम नहीं है। जिन्होंने मानव को आपस मे दुश्मन की भांति खड़ा कर दिया। हमें सिद्धांतों से लगाव होना चाहिए पंथ और परम्परा तो मात्र साधन और मार्ग है।
यह बात राष्ट्रसंत कमलमुनि ‘कमलेश’ ने शुक्रवार को आयड़ स्थित ऋषभ भवन में धर्मसभा में कही। उन्होंने कहा कि पंथवादी संत अगली परंपरा की अच्छाइयों को अपनाने से कतराते हैं एवं अपनी विकृत परम्परा को त्यागने का साहस भी नहीं बटोर पाते। ऐसी विचारधारा वाले हठाग्रह व पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर सत्य का अनुसंधान नहीं कर सकते। संकीर्ण मानसिकता से ग्रसित इन लोगों को दूसरी परंपरा के पवित्र संत भी शैतान नजर आते हैं। बाहरी उपासना पद्धति की देश-काल-परिस्थिति के कारण उत्पन्न भिन्नता जो परिवर्तनशील सृष्टि का नियम है, उसके आधार पर मतभेद खड़े कर अखाड़ा बनाना घोर अज्ञानता का परिचायक है। मार्ग अनेक हो सकते हैं, लेकिन सबकी मंजिल एक ही होती है।
राष्ट्र संत ने कहा कि किसी भी पंथ के संत क्यों न हो, जो मानवता के रिश्ते में मिठास घोलता है, सद्भाव के रिश्ते मजबूत करता हैं, मानवीय एकता का पुजारी होता है, वही विश्व वंदनीय बनता है। आचार्य कनकनंदी ने स्पष्ट कहा कि विश्व के सभी महापुरुषों के सिद्धांत समान हैं, फिर उनके संतों में
मतभेद क्यों। जहां स्वार्थ और अहंकार आ जाता है, वहां धर्म की जाजम पर भी बिखराव शुरू हो जाता है। यह अधर्म है। मुनि सुविज्ञ सागर ने गीत प्रस्तुत किया। आचार्य कनकनंदी ने कमल मुनि को साहित्य भेंटकर समाज की ओर से अभिनंदन किया।



धर्मसभा - आयड़ स्थित ऋषभ भवन में राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश ने कहा