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एसएचओ तक पहुंच सकती है रिश्वत की आंच

8 वर्ष पहले
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नगर संवाददाता - उदयपुर
रिश्वत लेते दो सिपाहियों के गिरफ्तार होने के मामले की आंच सुखेर थाने के एचएचओ तक पहुंच सकती है। पुलिस जिस हिस्ट्रीशीटर को पाबंद कराने एडीएम कोर्ट ले गई थी, उसके खिलाफ कोर्ट से वारंट होने के बावजूद उसे गिरफ्तार नहीं किया गया। इसी गिरफ्तारी से बचाने के लिए सिपाहियों ने हिस्ट्रीशीटर से रिश्वत ली थी। मामला एचएचओ के ध्यान में होने के बावजूद गिरफ्तारी नहीं किए जाने के सवाल पर ही एसपी ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। बताया गया कि परिवादी विक्रम सिंह सुखेर थाने का हिस्ट्रीशीटर है। कांस्टेबल नाहर सिंह के फोन पर विक्रम सिंह गुरुवार सुबह थाने पहुंच गया। तीनों आरोपी कांस्टेबल उसे एडीएम कोर्ट ले गए और पाबंद कराया। कोर्ट के बाहर ही कांस्टेबल ने परिवादी को न्यायिक मजिस्ट्रेट उत्तर-2 से गिरफ्तारी वारंट जारी है। इसकी तामील 3 फरवरी तक करानी है। गिरफ्तारी से बचने के लिए रुपए देने होंगे। परिवादी ने तब जेब में पड़े 15 सौ दे दिए। इसके बाद पूरा सौदा 20 हजार रुपए में तय हुआ।



थाने के बाहर लग गई लोगों की भीड़

एसीबी के हाथों दो वर्दीधारी कांस्टेबलों को पकड़कर ले जाते हुए, जिसने देखा वह अचंभित रह गया। लोगों को यह तो नहीं पता था कि एसीबी ने पकड़ा या क्राइम ब्रांच ने। लेकिन आरोपियों के हाथ में रुपए देखकर उन्हें रिश्वत में पकड़े जाने का आभास जरूर हो गया।



दोपहर में मिली थीं हिदायतें

शुक्रवार दोपहर में कंट्रोल रूम में एसपी अजयपाल लांबा ने शहर के एसएचओ की बैठक ली थी। इसमें गणतंत्र दिवस पर सुरक्षा पर बातचीत हुई थी। फिर सुखेर थाने में हुई लूट जैसे वारदात दोबारा न हो इसके लिए निर्देशित किया था। तब सुखेर सहित तीन थानों के नाम लेते हुए एसपी ने संबंधित एसएचओ को कई हिदायतें दी थीं।

चार से छह साल का है आरोपियों का कार्यकाल

नाहर सिंह अक्टूबर 2010 में उदयपुर जिला पुलिस में कांस्टेबल पद पर भर्ती हुआ था। यह अम्बामाता थाने के क्वार्टर में रह रहा है और अप्रैल 2012 से सुखेर थाने में तैनात है। धीरज शर्मा 2008 में उदयपुर जिला पुलिस में कांस्टेबल पद भर्ती हुआ था। एक साल से सुखेर में तैनात है और वहीं के बैरक में रख रहा है। खुशीराम जाट जिला पुलिस में कांस्टेबल था।

डिप्टी-एसएचओ के पकड़े जाने की घटना से सबक लेकर सिपाहियों को पकड़वाया

विक्रम सिंह ने पिछले दिनों उसने अखबार में कोटड़ा डीएसपी, एसएचओ और हेडकांस्टेबल के ट्रैप की खबर पढ़ी थी। इसके बाद जब इन कांस्टेबल ने रिश्वत मांगी तो उसने इन्हें पकड़वाने का मन बना लिया। बताया गया कि विक्रम सिंह ने जमीन संबंधी काम करता है। उसके खिलाफ 16 मुकदमे थे।

कार्रवाई करने वाली एसीबी टीम : सीआई हरीश चन्द्र के नेतृत्व में कांस्टेबल दिनेश कुमार, अख्तर खान, जितेन्द्र सनाढ्य, औंकार सिंह, दानिश, मुनीर, रामअवतार, विक्रम सिंह, गजेंद्र सिंह ने की है।

पहले कहा-घर आएंगे, फिर थाने के बाहर बुलाया

एसएचओ के खिलाफ करेंगे विभागीय जांच

एसएचओ भले ही एसीबी कार्रवाई से बच गया हो, लेकिन विभागीय कार्रवाई होगी। एक सप्ताह पहले ही जिला के सभी एसएचओ को निर्देश दिए थे कि हिस्ट्रीशीटर को पाबंद कराएं और इनका रिकॉर्ड अपडेट करें। जानकारी में आया है कि एसएचओ ने इस हिस्ट्रीशीटर की पत्रावली में नोट अंकित किया था। इसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट था, तो इसे गिरफ्तार करना चाहिए था।

अजयपाल लांबा, एसपी, उदयपुर

कांस्टेबल नाहर सिंह ने शुक्रवार सुबह परिवादी को फोन पर कहा 20 हजार रुपए का इंतजाम कर लेना, रुपए लेने घर आ रहे हैं। लेकिन फिर तीनों कांस्टेबल परिवादी के घर नहीं पहुंचे और परिवादी को ही थाने के बाहर बुलाया। शाम तक परिवादी थाने के बाहर पहुंचा। तब कांस्टेबल नाहर सिंह और धीरज अल्फा ड्यूटी में पुलिस बाइक पर थे। विक्रमसिंह कांस्टेबल से बाहर मिला। ये सभी थाने के सामने गली में पहुंचे, नाहर सिंह और धीरज बीस हजार रुपए लेकर रवाना हो गए। दोनों गली से निकलकर थाने के बाहर पहुंचे ही थे कि एसीबी टीम ने गिरफ्तार कर लिया। थाने में संतरी की ड्यूटी कर रहा कांस्टेबल खुशीराम जाट भनक लगते ही थाने से भाग गया।

थाने से कोर्ट के बीच हुआ सौदा

सुखेर थाने के बाहर २० हजार रुपए की रिश्वत लेते दो पुलिस कांस्टेबल की गिरफ्तारी का मामला