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कडिय़ा में देशप्रेम का मेला, कोल्यारी में वतन परस्ती की प्रभात फेरी

8 वर्ष पहले
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25 स्कूलों के बच्चे, कई गांवों के लोग जुटेंगे
गोगुंदा। उदयपुर से 35 किमी दूर बडग़ांव पंचायत समिति के कडिय़ा गांव के गांधी ग्राउंड में तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। गांधीजी की प्रतिमा संवारी जा चुकी है। मेले में 25 स्कूलों के बच्चों की भागीदारी रहती है। आसपास के दर्जनों गांवों से लोग मेले में जुटते हैं। हाट बाजार में डेढ़ सौ के करीब स्टॉल लगती हैं। डोलर, चकरी लगेंगे। सरपंच रतन सिंह राव रविवार सुबह 11 बजे झंडा रोहण करेंगे। इसके बाद सांस्कृतिक प्रस्तुतियां व मार्चपास्ट होता है। बरसों पहले तत्कालीन प्रधान किशन त्रिवेदी नेगांव के कुछ लोगों ने राष्ट्रीय पर्व को मेले की तरह मनाने की पहल की थी, जो कालांतर में बढ़ती गई और क्षेत्र में साल का सबसे बड़ा मेला बन गई।
तेजावत की जन्मस्थली पर जन-जन की भागीदारी
पवन लोहार ((फलासिया)). स्वतंत्रता सेनानी मोतीलाल तेजावत की जन्मस्थली कोल्यारी गांव में राष्ट्रीय पर्व पर हर वर्ग के जन-जन की भागीदारी रहती है। बरसों पहले तत्कालीन सरपंच मुस्तफा खान की पहल को शिक्षक कस्तूरचंद शर्मा, सुरेश तेजावत, नाहरसिंह भंडारी, रामेश्वरलाल शर्मा, हमीद भाई, डाडमचंद जैन आदि ने आगे बढ़ाया। 26 जनवरी को सभी लोग मिलकर प्रभात फेरी निकालते हैं। सरपंच ग्राम पंचायत भवन पर ध्वजारोहण करते हैं। यहां जुलूस बाकी सरकारी कार्यालयों की तरफ बढ़ता है और अंत में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में ध्वजारोहण होता है। यहीं पर सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं।



तमाम सरकारी दफ्तरों और स्कूलों की तरह कडिय़ा और कोल्यारी में भी राष्ट्रीय पर्व की तैयारी पूरी हो चुकी है। इन दो गांवों में अंतर है तो सिर्फ इतना कि यहां औपचारिकता से कहीं ज्यादा वतनपरस्ती का जज्बा है। इस 26 जनवरी पर भी कडिय़ा में मेला सजेगा तो कोल्यारी में मनेगा जन-जन का पर्व।