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झीलों में कोई कचरा डाले तो कम से कम सौ रुपए जुर्माना वसूलो

7 वर्ष पहले
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उदयपुर - प्रदेश के केबिनेट मंत्री गुलाबचंद कटारिया का कहना है कि झीलों के संरक्षण के लिए सख्ती जरूरी है। झीलों में कोई कचरा डालता भी पकड़ा जाए तो उससे कम से कम 100 रुपया जुर्माना वसूला जाए। कटारिया ने यह बात रविवार को दूधतलाई समीप पीछोला किनारे झीलों की सफाई के लिए डीविडिंग मशीन के लोकार्पण समारोह में कही। उन्होंने कहा कि झील किनारे गार्ड तैनात किए जाएं। जनता भी सहयोगी बने। कटारिया ने कहा कि इस मशीन को लाने में संभागीय आयुक्त रहे डॉ. सुबोध अग्रवाल का भी अहम योगदान रहा। जरूरत पड़ी तो इस मशीन को उदयसागर, जयसमंद व राजसमंद झील की सफाई के काम भी लिया जाएगा। कटारिया ने कलेक्टर आशुतोष पेडणेकर से कहा कि वे व्यक्तिगत रुचि दिखाते हुए पीछोला की रिंग रोड का काम पूरा कराएं। कुछ लोगों के स्वार्थ के कारण काम अटका हुआ है। देवास प्रोजेक्ट को लेकर कटारिया ने कहा कि अगले मानसून में आकोदड़ा बांध का पानी हर हाल में पीछोला की ओर डायवर्ट कर दिया जाएगा। जबकि देवास 3 व 4 पांच साल में पूरा करवाने का प्रयास होगा। मेयर रजनी डांगी ने कहा कि झीलों को धार्मिक रस्मों व फुल मालाओं से भी बचाना होगा। निगम इसके लिए स्थान निर्धारित करेगा। कार्यक्रम में सांसद रघुवीर मीणा, यूआईटी चेयरमैन आशुतोष पेडणेकर, सचिव डॉ. आर.पी. शर्मा, निगम आयुक्त हिम्मतसिंह बारहठ, एनएलसीपी के टीम लीडर बी.एल. कोठारी, डीएफओ आई.पी.एस. मथारू भी मौजूद थे।
सुखानाका पुलिया की ऊंचाई बढ़ाई जाए : ग्रामीण विधायक फूल सिंह मीणा ने कहा कि उदयसागर के बैक वाटर से हर साल तीन माह तक सुखा नाका पुलिया पानी में डूब जाती है। इस कारण इस मार्ग से जुड़े गांवों के लोगों को लंबा रास्ता पार करना पड़ता है। इस पुलिया की ऊंचाई बढ़ाई जाए।


साथ ही उदयसागर को भी पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाए।
डेढ़ मीटर गहरी जलीय घास व जलकुंभी काटेगी मशीन

अमेरिका से मंगवाई गई सात टन वजनी डीविडिंग मशीन पानी में डेढ़ मीटर की गहराई तक जलीय घास, जलकुंभी को काट सकती है। डीजल से चलने वाली इस मशीन से जलीय घास, जलकुंभी कटकर ऑटोमेटिक कन्वेयर पर आएगी। इसके बाद इसी कन्वेयर से जलीय घास, जलकुंभी झील किनारे खाली हो जाएगी। जहां से इसे तीतरड़ी स्थित नगर निगम के ट्रेचिंग ग्राउंड पर ले जाकर खाली किया जाएगा। राष्ट्रीय झील संरक्षण परियोजना के तहत खरीदी गई मशीन की कुल लागत 4 करोड़ 10 लाख रुपए है। इसमें संबंधित कंपनी पांच साल तक मशीन का संचालन व रखरखाव भी करेगी।

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