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पाप से घृणा करें, पापी से नहीं : कमल मुनि
उदयपुर - अपराधी सामान्य जीवन जीने का प्रयास भी करेगा तो हम पुराना जीवन याद दिलाकर बार-बार ताने कसेंगे। पापी ही पावन बनता है। पाप से घृणा करें, पापी से नहीं। यह संकल्प हमें लेना चाहिए। यही मानवता की सच्ची रक्षा करने के समान है। ये विचार राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश ने रविवार को सेंट्रल जेल में आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भगवान को छोड़कर विश्व में कोई ऐसा मानव नहीं, जिसने कभी गलती न की हो, किसी पर अंगुली उठाने से पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। मानव मात्र अपराध का पुतला है, जो भूल को सुधार ले, वह इंसान है। कुछ पारिवारिक मजबूरियां भी मानव को गलत राह पर ले जाती हैं। उसका दोषी संपन्न समाज है।