उदयपुर में खुल सकती है वन उपज मंडी
वाणिज्य संवाददाता - उदयपुर
कृषि एवं फल सब्जी मंडी के बाद अब उदयपुर में विशिष्ट वन उपज मंडी खुलने की भी संभावना बढ़ गई है। कृषि उपज मंडी ((अनाज)) द्वारा तैयार किए गए राज्य की पहली विशिष्ट वन उपज मंडी के प्रस्ताव के आधार पर कलेक्टर आशुतोष ए.टी पेडणेकर ने कृषि विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अशोक सम्पतराम को पत्र लिखा है। उदयपुर संभाग में वन उपज उत्पादन व संग्रहण से लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी है। लेकिन अभी तक वन उपज के विपणन के लिए राज्य में ना कोई संगठित बाजार है ना ही कोई मंडी है। इसके कारण वन उपज उत्पादन को उचित व प्रतिस्पद्र्धात्मक मूल्य प्राप्त नहीं हो रहा है। ऐसे में विशिष्ट वन उपज मंडी शुरू होने से जनजाति संग्रहणकर्ताओं को उचित मूल्य के साथ साथ वन उपज का राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ाव हो सकेगा।
मंडी आने से ये होगा फायदा
कोटड़ा, झाड़ोल, फलासिया, खेरवाड़ा, गोगुंदा आदि क्षेत्रों में होने वाली वन उपज रतनजोत, महुआ, पूवाड़, डोलमा, सफेद मूसली, शहद, बेर और आंवला आदि शहरवासियों को एक ही छत के नीचे किफायती दामों पर उपलब्ध हो सकेगी। साथ ही अवैध रूप से होने वाला व्यापार भी रुकेगा और गरीब आदिवासियों को इनकी सही कीमत मिलेगी।
पहले भी सरकार को भेजा जा चूका है प्रस्ताव
मंडी समिति के सचिव भगवान सहाय जाटवा ने बताया कि कृषि उपज मंडी समिति अनाज द्वारा दिसंबर 2012 में हुई बोर्ड बैठक में तत्कालीन खेल मंत्री मांगीलाल गरासिया की उपस्थिति सवीना स्थित मंडी परिसर में विशिष्ट वन उपज मंडी बनाने का प्रस्ताव लिया गया था। इसके बाद फरवरी 2013 में प्रस्ताव को कृषि मंत्रालय को भी भेजा था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।