- Hindi News
- 0073 साल बाद मेवाड़ का सबसे कम उम्र का दीक्षार्थीपदराड़ा ((गोगुंदा)) के नौ वर्षीय मुमुक्षु प्रिंस दो
0073 साल बाद मेवाड़ का सबसे कम उम्र का दीक्षार्थीपदराड़ा ((गोगुंदा)) के नौ वर्षीय मुमुक्षु प्रिंस दो फरवरी को गंगाशहर में आचार्य महाश्रमण से लेंगे दीक्षा
नगर संवाददाता - उदयपुर
दो दिन बाद आचार्य महाश्रमण से दीक्षा लेने जा रहे मुमुक्षु प्रिंस की उम्र 9 वर्ष एक माह 25 दिन है। प्रिंस को संभवतया मेवाड़ का दूसरे सबसे कम उम्र का दीक्षार्थी माना जा रहा है। इससे पहले स्थानकवासी जैन समाज के आचार्य देवेंद्र मुनि ने 9 वर्ष से भी कम उम्र में दीक्षा ली थी। उनकी दीक्षा 73 साल पहले हुई थी। इस बीच दीक्षा लेने वालों की उम्र मुमुक्षु प्रिंस की उम्र से अधिक रही है। मुमुक्षु प्रिंस 2 फरवरी को गंगाशहर में आचार्य महाश्रमण से दीक्षा लेगा। बीते 73 साल में दीक्षा लेने वालों में तेरापंथ जैन समाज के ही सेमड़ ((गोगुंदा)) निवासी मृदु मुनि व अनुशासन मुनि ने 11-13 साल की उम्र में दीक्षा ली थी। मंदिर मार्गी जैन समाज में करीब 60 साल पहले साध्वी चंद्रकला श्री व कल्पलता श्री ने 10-10 साल की उम्र में दीक्षा ग्रहण की थी। तरपाल में जन्मी स्थानकवासी जैन समाज की साध्वी सोहन कुंवर ने भी 9-10 वर्ष की उम्र में दीक्षा ली थी। प्रिंस का जन्म 8 दिसंबर 2004 को सूरत ((गुजरात)) में हुआ था। पिता के मुंबई चले जाने पर वे सपाला में रह रहे हैं। मूल रूप से पदराड़ा ((गोगुंदा)) के रहने वाले प्रिंस के दीक्षा लेने को लेकर समूचे जैन समाज में हर्ष है। दीक्षा से पहले शुक्रवार सुबह 9.30 बजे पदराड़ा ((गोगुंदा)) में मुमुक्षु का वरघोड़ा निकाला जाएगा। मुमुक्षु प्रिंस व उसके परिवार ने बुधवार को सायरा, नांदेशमा, रावलिया, गोगुंदा आदि गांवों में आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।
आलोक मुनि से मिली प्रेरणा
- आचार्य महाश्रमण जी गंगाशहर में देंगे दीक्षा
- पदराड़ा ((गोगुंदा)) के नौ वर्षीय मुमुक्षु प्रिंस लेंगे दीक्षा
आचार्य महाश्रमण
मुनियों से कम नहीं दिनचर्या
सालभर से मुमुक्षु प्रिंस की जो दिनचर्या है, वह किसी संत से कम नहीं। वह सर्द मौसम में भी अलसुबह उठकर सामयिक करता है। दिनभर में सुविचार के बीच रहने के साथ ही संयमित बात करता है। महिलाओं से तो जरूरी होने पर ही बोलता है। संध्या समय की पूजा-अर्चना करता है। वह पक्का ((उबला)) पानी ही पीता है। जमीकंद ((जमीन में पैदा होने वाले कंद-मूल, फल-सब्जी आदि)) का सेवन बरसों से नहीं किया। जीव दया के लिए वह हरी घास पर पांव नहीं रखता और सूर्यास्त के बाद कभी भोजन नहीं करता।
प्रिंस को दीक्षा की प्रेरणा आलोक मुनि से 2 साल पहले मिली। मुनिश्री होली चातुर्मास के लिए सपाला ((मुंबई)) में विराजित थे। प्रिंस रोज प्रवचन सुनता, मुनिश्री से मिलता। कई दिन तक मुनिश्री के साथ तपस्या भी की। उसके परिवार में भी धार्मिक माहौल होने से प्रेरणा मिलती रही। प्रिंस की मासी और छोटे दादा ने भी दीक्षा ली थी। मासी को महिमा श्री व छोटे दादा को मुनि अरध कुमार नाम मिला। परिवार में दादा फूलचंद बापना, दादी सोहन देवी, पिता कांति लाल, माता निर्मला देवी, बड़ी बहन मानसी, बड़ा भाई मीत और छोटा भाई नमन है।
बेटे के सन्मार्ग पर जाने का गर्व : माता-पिता
मुंबई में व्यवसायी कांतिलाल बापना और निर्मला देवी मुमुक्षु प्रिंस के माता-पिता हैं। प्रिंस के दीक्षा ग्रहण करने पर उन्हें गर्व है। उनका कहना है कि 6 साल की उम्र से ही प्रिंस में आध्यात्मिक भावना जागने लगी। वह सपाला के रावजी गुरु महाराज विद्यालय में पढ़ता है, लेकिन उसका मन पढ़ाई के बजाय आध्यात्मिक शिक्षा में ज्यादा लगता रहा।
प्रभु भक्ति की कोई उम्र नहीं : मुमुक्षु प्रिंस
प्रिंस का कहना है कि गुरुदेव के आशीर्वाद से दीक्षा ले रहा हूं, संयमित जीवन जी रहा हूं। दीक्षा के बाद भी उन्हीं की प्रेरणा से धर्म मार्ग पर बढूंगा। प्रभु की भक्ति करने की कोई उम्र नहीं होती। खुद को सौभाग्यशाली मानता है, जिसे गुरुदेव ने दीक्षा योग्य माना।
दो फरवरी को गंगाशहर में दीक्षा
आचार्य देवेन्द्र मुनि ने ली थी सबसे कम उम्र में दीक्षा, कल पदराड़ा में निकलेगा वरघोड़ा