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आय में पिछला टारगेट भी नहीं पा सका नगर निगम

7 वर्ष पहले
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उदयपुर. नगर निगम ने पिछले बजट (2013-14) में जितना लक्ष्य किया था, सालभर में उतनी कमाई कर पाने में नाकाम रहा। निगम को जो आय हुई है, उसमें बड़ी राशि से सरकार से अनुदान या चुंगी के पेटे पुनर्भरण के रूप में मिली है।

पिछले बजट पर नजर डालें तो कई मद ऐसे हैं, जिनमें साल भर (24 जनवरी, 14 तक) में निगम बहुत की कम वसूली कर पाया। साल भर में निगम को चुंगी के पेटे पुनर्भरण राशि के रूप में 47 करोड़ 65 लाख रुपए मिले हैं। निगम ने साल भर में विभिन्न टैक्स से 67 करोड़ 4 लाख की आय होने का लक्ष्य रखा था। उसके मुकाबले 49 करोड़ 72 लाख की वसूली ही हो सकी। विभिन्न नियम, उपनियम के तहत करीब 6 करोड़ लक्ष्य के मुकाबले साल भर में 3 करोड़ की आय ही हुई है।

वाणिज्यिक संस्थाओं से 1 करोड़ 20 लाख लक्ष्य के मुकाबले 63 लाख की वसूली ही हो सकी। हालांकि बायलॉज से साढ़े तीन करोड़ आय का लक्ष्य रखा गया था, उसके मुकाबले निगम ने करीब साढ़े पांच करोड़ की कमाई कर ली। पेनल्टी के रूप में चार करोड़ 65 लाख आय का लक्ष्य तय किया गया था उसके मुकाबले चार करोड़ 24 लाख की आय अर्जित हो गई।

इनमें कुछ भी नहीं मिला

वाटिकाओं, विवाह स्थल से सफाई शुल्क, संपत्तियों की बिक्री से आय, पार्किंग शुल्क, गोल्फ कार व सिटी बस से आय (संचालन शुरू ही नहीं हो सका)।

माकपा पार्षद ने उठाए सवाल

वित्त समिति से अनुमोदन कराए बगैर बजट पारित करने बोर्ड बैठक तय करने पर माकपा पार्षद ने सवाल उठाया है। पार्षद राजेश सिंघवी ने मेयर रजनी डांगी पर मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा है कि बजट फाइनल करने व बजट पारित करने के लिए बोर्ड बैठक तय करने से पहले पार्षदों से चर्चा भी नहीं की गई।

इन मदों में कम रही वसूली

लघु यंत्रालयों से लाइसेंस शुल्क, दुकानों, कियोस्क से आय, विज्ञापन बोर्ड शुल्क, रोड कटिंग शुल्क, वाटिका पंजीयन शुल्क, नगरीय विकास कर, फोटोग्राफी लाइसेंस शुल्क, सामुदायिक भवनों के किराए से आय, मोबाइल टॉयलेट, अनुपयोगी सामान की नीलामी से आय,वाटर टैंक व फायर ब्रिगेड से आय।