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‘बजे उदयपुर में बधाई कि नगरी में वीर जनमे...’

8 वर्ष पहले
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नगर संवाददाता . उदयपुर

महावीर जयंती की पूर्व संध्या पर टाउन हॉल परिसर में भक्ति गीतों की शाम सजी। रात 8.30 बजे आयोजन की शुरुआत णमोकार महामंत्र जाप से हुई। भोपाल के कलाकारों ने एक से बढ़कर एक भजन प्रस्तुतियां दी, जिन पर भक्त झूम उठे। सबसे आकर्षक प्रस्तुति ‘बजे उदयपुर में बधाई, की नगरी में वीर जनमे...’ और ‘महावीरा झूले पालना जरा हौले झोंका दीज्यो...’ रही। आयोजन में सैकड़ों भक्तों की मौजूदगी रही।

भक्ति संध्या की शुरुआत में मंगलाचरण के साथ ही विजयलक्ष्मी गलूंडिया व मोहन नागदा ने ‘मंत्र नवकार हमें प्राणों से प्यारा...’, ‘धीरे-धीरे गाओ सब मिल के...’ आदि प्रस्तुति दी। भोपाल के केशव जैन एंड पार्टी के सिद्धार्थ अंबर ने ‘लल्ला अभी-अभी सोयो है जगइयो मत ना...’, ‘जैन धर्म का यारों क्या कहना, ये धर्म है जैनों का गहना...’, ‘दीवाना गुरुवर का...’, ‘वीरा मेरे सन्मति वीरा...’, ‘भर दे रे वीर झोली भर दे...’, ‘भगवन वो ज्ञान हमें...’, ‘प्रभु से तुम प्यार करो...’, ‘हमको दर्शन दो प्रभुजी हमको दर्शन दो...’, ‘मेरे घर के सामने वीर प्रभु तेरा मंदिर...’ प्रस्तुति दी। केशव जैन ने ‘ध्यान यों लगाते रहे...’, ‘प्यारा हो प्यारा प्रभु का द्वारा...’, ‘मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है...’, ‘ज्ञान का दीया जला दो प्रभु...’, ‘जग में सुंदर है ये नाम, मेरे वीर प्रभु...’, ‘वीरा तेरे चरणों में अपना शीष...’, ‘ताकते रहते भगवन मूरत तुम्हारी...’, ‘बाबा तेरे ही भरोसे मेरा परिवार है...’ आदि गीत प्रस्तुत किए। संजय कुमार ने नृत्य-नाटिका पेश की, जिसमें कांच के टुकड़े, गिलास, थाल पर नृत्य किया।

परिषद के मुख्य संयोजक राजकुमार फत्तावत ने अतिथियों का स्वागत किया। नौ दिवसीय आयोजनों में सकल जैन समाज की भूमिका पर आभार जताया। मुख्य अतिथि जिला प्रमुख मधु मेहता, विशिष्ट अतिथि वीरेंद्र डांगी, दिनेश मेहता, मोहनलाल नवलखा थे। कोषाध्यक्ष कुलदीप नाहर, दिलीप सुराणा ने अभिनंदन किया।





चौगान मंदिर

वाड़ी जी मंदिर



आयड़ तीर्थ

रोड पर स्थित चौगान मंदिर को महाराणा जगत सिंह द्वितीय के काल ((1790-1808)) में बनवाया गया। इसी परिसर में महावीर स्वामी का मंदिर भी है। इसमें सफेद पत्थर की 21 इंच ऊंची प्रतिमा है।यहां प्रतिमा संवत 1938 में स्थापित की गई। इससे पहले संवत 1862 में छतरी बनाकर महावीर स्वामी प्रतिमा स्थापित की हुई थी। चौगान मंदिर में शांति नाथ भगवान की प्रतिमा की प्रतिष्ठा पद्म सागर महाराज ने संवत 1806 में करवाई।

मंदिर स्थित है। मंदिर की जगह पूर्व में भंडारियों की वाड़ी थी। ऐसे में मंदिर का नाम भी वाड़ी जी का मंदिर हुआ। इस मंदिर को बने 260 से अधिक वर्ष हो चुके हैं। मंदिर परिसर में महावीर स्वामी की 17 इंच ऊंची सफेद पत्थर की प्रतिमा है। प्रतिमा पर लेख ‘संवत 1808 वर्ष शाके 1673 प्र. ज्येष्ठ सुदी 9 बुधवार, तपागच्छे तप श्री विजय दया सुरिभि आचार्य श्री विजय धर्मसुरी राज्ये उदयपुर श्रेयार्थश्री महावीर बिंब करापित प्रतिष्ठित...’ अंकित है।



यहां भी हैं महावीर की प्राचीन प्रतिमाएं

बड़ा बाजार में 450 वर्ष पुराने संभव नाथ दिगंबर जैन मंदिर, वारियों की घाटी स्थित मोहली चौहट्टा में 250 वर्ष पुराने चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर ((जूना मंदिर)), बदनोर की हवेली के सामने स्थित 200 वर्ष पुराने आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में महावीर की प्राचीन प्रतिमाएं हैं। इसके अलावा बड़ा बाजार स्थित अजीत नाथ मंदिर, आदिनाथ मंदिर, गांछीवाड़ा स्थित शीतल नाथ मंदिर, पाश्र्वनाथ मंदिरों में भी प्राचीन महावीर प्रतिमाएं हैं।

उदयपुर. महावीर जयंती की पूर्व संध्या पर टाउन हॉल परिसर में भक्ति गीतों की शाम सजी। रात 8.30 बजे आयोजन की शुरुआत णमोकार महामंत्र जाप से हुई। भोपाल के कलाकारों ने एक से बढ़कर एक भजन प्रस्तुतियां दी, जिन पर भक्त झूम उठे। सबसे आकर्षक प्रस्तुति ‘बजे उदयपुर में बधाई, की नगरी में वीर जनमे...’ और ‘महावीरा झूले पालना जरा हौले झोंका दीज्यो...’ रही। आयोजन में सैकड़ों भक्तों की मौजूदगी रही।

भक्ति संध्या की शुरुआत में मंगलाचरण के साथ ही विजयलक्ष्मी गलूंडिया व मोहन नागदा ने ‘मंत्र नवकार हमें प्राणों से प्यारा...’, ‘धीरे-धीरे गाओ सब मिल के...’ आदि प्रस्तुति दी। भोपाल के केशव जैन एंड पार्टी के सिद्धार्थ अंबर ने ‘लल्ला अभी-अभी सोयो है जगइयो मत ना...’, ‘जैन धर्म का यारों क्या कहना, ये धर्म है जैनों का गहना...’, ‘दीवाना गुरुवर का...’, ‘वीरा मेरे सन्मति वीरा...’, ‘भर दे रे वीर झोली भर दे...’, ‘भगवन वो ज्ञान हमें...’, ‘प्रभु से तुम प्यार करो...’, ‘हमको दर्शन दो प्रभुजी हमको दर्शन दो...’, ‘मेरे घर के सामने वीर प्रभु तेरा मंदिर...’ प्रस्तुति दी। केशव जैन ने ‘ध्यान यों लगाते रहे...’, ‘प्यारा हो प्यारा प्रभु का द्वारा...’, ‘जग में सुंदर है ये नाम, मेरे वीर प्रभु...’, ‘वीरा तेरे चरणों में अपना शीष...’, ‘ताकते रहते भगवन मूरत तुम्हारी...’, ‘बाबा तेरे ही भरोसे मेरा परिवार है...’ आदि गीत प्रस्तुत किए। संजय कुमार ने नृत्य-नाटिका पेश की, जिसमें कांच के टुकड़े, गिलास, थाल पर नृत्य किया। परिषद के मुख्य संयोजक राजकुमार फत्तावत ने अतिथियों का स्वागत किया। नौ दिवसीय आयोजनों में सकल जैन समाज की भूमिका पर आभार जताया। मुख्य अतिथि जिला प्रमुख मधु मेहता, विशिष्ट अतिथि वीरेंद्र डांगी, दिनेश मेहता, मोहनलाल नवलखा थे। कोषाध्यक्ष कुलदीप नाहर, दिलीप सुराणा ने अभिनंदन किया।

आयड़ जैन तीर्थ में ही स्थित मंदिर में महावीर स्वामी की 21 इंच सफेद पत्थर की प्रतिमा है। आयड़ तीर्थ को तांबावती नगरी के जैन मंदिर भी कहते हैं। इस तीर्थ में स्थित प्रतिमाएं संप्रति महाराज कालीन है। यहां आचार्य यशोभद्र सूरी महाराज ने संवत 1029 में प्रतिमाएं स्थापित करवाई थी।माना जाता है कि यहां की प्रतिमाएं खुदाई में मिली थी। आयड़ तीर्थ के पास ही एक अन्य मंदिर में 2500 वर्ष पुरानी भगवान महावीर की 17 इंच ऊंची सफेद पत्थर की प्राचीन प्रतिमा है।

पंकज वैष्णव . उदयपुर

आप भगवान महावीर की जन्म स्थली कुंडलपुर जाएं या किसी अन्य तीर्थंकर की तपो भूमि पर। सदियों पुराने मंदिरों और प्रतिमाओं के प्रति जितनी आस्था और श्रद्धा होती है, वैसी अतिशय आस्था उदयपुर में स्थित जिन मंदिरों की महावीर प्रतिमाओं के प्रति भी होती है। लेकसिटी में जैन समाज के अनेक मंदिर हैं, जिनमें 24 तीर्थंकरों की प्रतिमाएं हैं। इनमें से कुछ मंदिर ऐसे हैं, जिनमें भगवान महावीर की प्रतिमाएं स्थापित हैं और वे सदियों पुराने हैं। प्रतिमाएं जितनी पुरानी हैं, उतनी ही आकर्षक और सौम्य छवि वाली भी हैं। महावीर जयंती के मौके पर अधिकाधिक शहरवासी इन प्राचीन प्रतिमाओं के दर्शन करें, इसलिए यहां शहर की प्रमुख प्राचीन प्रतिमाओं की जानकारी दी जा रही है। जानकारी जैन साहित्यकार मोहन लाल बोल्या व दलपत दोशी ने उपलब्ध कराई है।

कसौटी मंदिर की महावीर प्रतिमा

सिटी पैलेस रोड पर स्थित पाŸवनाथ मंदिर ((कसौटी का मंदिर)) के बाहरी सभा मंडप में भगवान महावीर की काले पत्थर की प्राचीन प्रतिमा है। इस प्रतिमा पर संवत 1709 शुक्ल प्रथमा तिथि अंकित है। यह शिखरबद्ध मंदिर खमेसरा परिवार द्वारा बनवाया गया था। ऐसा माना जाता है कि सिटी पैलेस निर्माण के बाद बचे पत्थरों से कुछ मंदिरों का निर्माण हुआ था। उनमें से एक कसौटी का मंदिर भी है। यह शहर में स्थित प्राचीन जैन मंदिरों में प्रमुख है।

आस्था का इतिहास समेटे हैं उदयपुर की महावीर प्रतिमाएं

भास्कर विशेष : अप्रतिम हैं शहर के जैन मंदिर और इनमें स्थापित तीर्थंकरों के बिंब