पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंचंडीगढ़. रॉबर्ट वाड्रा लैंड डील मामले से चर्चा में आए वरिष्ठ आईएएस अशोक खेमका को अब कैग की स्पेशल ऑडिट और सीबीआई जांच के नाम पर फंसाने की राजनीतिक साजिश की जा रही है। हरियाणा कैग को 24 जनवरी, 2014 को लिखे गए एक पत्र में खुद खेमका ने यह आशंका जाहिर की है। हालांकि उन्होंने अपने खिलाफ साजिश में शामिल किसी नेता का नाम नहीं बताया है। उन्होंने कहा है कि जन प्रतिनिधि और अफसरों ने कैग को भेजे रेफरेंस में जानबूझकर तथ्यों को छिपाया गया है, ताकि उन्हें बदनाम किया जा सके।
खेमका का आरोप है कि लिखित आवेदन के बावजूद उन्हें वांछित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। यहां तक कि फाइलों का निरीक्षण करने तक की इजाजत नहीं दी गई। कैग को स्पेशल ऑडिट करने का रेफरेंस भेजने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर भी नहीं दिया गया, जबकि नेचुरल जस्टिस के तहत उन्हें ये अवसर मिलने चाहिए थे।
इसलिए फंसाना चाहते हैं: लोकसभा चुनाव आने वाले हैं। इनमें यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की कंपनियों की लैंड डील रद्द करने का मामला मुद्दा बन सकता है। इन कंपनियों का म्यूटेशन 15 अक्टूबर, 2012 को वरिष्ठ आईएएस अशोक खेमका ने ही रद्द किया था। इसके बाद खेमका की छवि एक ईमानदार अफसर के रूप में बनी। अब सीबीआई जांच और कैग रिपोर्ट को आधार बनाकर फंसाना चाहते हैं।
सब्सिडी घोटाला खुलने से डरे हुए हैं अफसर : राज्य सरकार के अफसर गेहूं बीज में सब्सिडी का घोटाला खुलने की आशंका से डरे हुए हैं। इस मामले में खेमका ने सीबीआई में शिकायत की हुई है। इसमें बताया गया है कि बिना ओपन टेंडर प्रक्रिया के किस तरह बिचौलियों के माध्यम से ऊंचे दामों पर वर्ष 2010 में गेहूं का 99,996 क्विंटल बीज खरीदा गया और केंद्र से मिलने वाली सब्सिडी को हड़पने की कोशिश की गई। सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है।
खेमका ने किया सीबीआई और कैग जांच का स्वागत: कैग को लिखे पत्र में खेमका ने सीबीआई और कैग जांच का स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि सभी तथ्यों का गहराई से विश्लेषण किया जाना चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
सरकार को संवैधानिक संस्थाओं पर नहीं भरोसा: सरकार को सीएजी ((कैग)) जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर भी भरोसा नहीं रहा है। वेयर हाउसिंग के गोदामों में जिस गेलवलयूम शीट्स के उपयोग को लेकर कैग को स्पेशल ऑडिट के लिए रेफरेंस भेजा गया था, उन्हीं तथ्यों पर सीबीआई जांच के लिए रेफरेंस भेजे जाने की भी सीएम स्तर से मंजूरी दे दी गई। जबकि पहले कैग की रिपोर्ट का इंतजार किया जाना चाहिए था। इसमें तथ्यों को जानबूझकर इसलिए छिपाया जा रहा है ताकि कैग की रिपोर्ट को खेमका के खिलाफ कार्रवाई करने का आधार बनाया जा सके।
अफसरों ने छिपाए ये तथ्य:
- हरियाणा वेयर हाउसिंग स्वतंत्र निकाय है। सरकार की पूर्वानुमति लिए जाने का नियमों में कोई प्रावधान नहीं है।
-गोदामों की छत बदलवाने में गेलवल्यूम शीट्स के उपयोग को सीएम ने 18 दिसंबर, 2008 को ही मंजूरी दे दी थी, जबकि पहला टेंडर जनवरी, 2009 में किया गया था। सीएम को गेलवल्यूम शीट्स के उपयोग का प्रस्ताव खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के तत्कालीन निदेशक अनिल मलिक और प्रिंसिपल सेक्रेटरी एलएसएम साइलेंस के माध्यम से 5 दिसंबर, 2008 को भिजवाया गया था। सीएम की मंजूरी की सूचना वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन को 31 दिसंबर, 2008 को दी गई।
- गोदामों के निर्माण में तकनीकी मंजूरी देने के लिए चीफ इंजीनियर और उचित मैटेरियल का चयन करने के लिए एक्सईएन को बोर्ड की 172वीं मीटिंग में अधिकृत कर दिया गया था।
- कृषि विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी रोशनलाल की अध्यक्षता में 21 दिसंबर, 2009 को हुई बोर्ड मीटिंग में फतेहाबाद के गोदाम की वीडियो फिल्म भी दिखाई गई थी। इसे देखने के बाद मीटिंग में मौजूद एक्सपर्ट्स और अन्य लोगों ने गेलवल्यूम शीट्स के प्रयोग की काफी प्रशंसा की थी। इसी मीटिंग में गोदामों निर्माण में आगे भी गेलवल्यूम शीट्स का ही उपयोग करने का फैसला किया गया।
- तत्कालीन मुख्य सचिव उर्वशी गुलाटी की अध्यक्षता में 16 नवंबर, 2009 को हुई रिव्यू मीटिंग में भी इस नए प्रयोग की प्रशंसा की गई थी। इसके बाद फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ((एफसीआई)) ने 30 मई, 2013 को गेलवल्यूम शीट्स को सभी गोदामों के लिए स्टैंडर्ड मानक घोषित कर दिया था।
-वेयर हाउसिंग में एक बार एसबेस्टो एसीसी सीमेंट शीट्स को लाने की दोबारा कोशिश की गई, लेकिन बोर्ड ने उसे नहीं माना। बोर्ड ने 28 सितंबर, 2010 की मीटिंग में गेलवल्यूम शीट्स के प्रयोग को ही जारी रखने का फैसला किया था।
एक्सपर्ट व्यू:
तथ्य छिपाना तो गंभीर अपराध है: जैन
चंडीगढ़ के वरिष्ठ वकील सत्यपाल जैन का कहना है कि मुझे भी जानकारी मिली है कि खेमका के खिलाफ कैग को भेजे गए रेफरेंस में कुछ तथ्य छिपाए गए हैं। किसी भी मामले में कोर्ट, किसी जांच एजेंसी अथवा किसी अन्य स्तर पर फैक्ट्स छिपाना सरासर धोखाधड़ी है। इसके लिए तथ्य छिपाने वाले के खिलाफ धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का आपराधिक मामला दर्ज करके कार्रवाई की जानी चाहिए।
हमने तथ्य नहीं छिपाए: रोशन लाल
इधर, प्रिसिंपल सेक्रेटरी, ((एग्रीकल्चर)) रोशन लाल ने कहा कि हमने कोई तथ्य नहीं छिपाए हैं। अशोक खेमका को पत्र लिखने के अलावा कोई काम नहीं है, वे पत्र लिखते रहें, हमें और बहुत से काम हैं। हमें विभाग चलाना है। हम तो अपनी रिपोर्ट सरकार को भेज चुके हैं। रिपोर्ट में सच्चाई ही लिखी है। खेमका ने बिना फ्रेश टेंडर किए एक ही पार्टी को १८ करोड़ के टेंडर दे दिए। वे इन गड़बडिय़ों को जवाब दें।
तथ्य छिपाना अपराध है: जैन
चंडीगढ़ के वरिष्ठ वकील सत्यपाल जैन का कहना है कि मुझे भी जानकारी मिली है कि खेमका के खिलाफ कैग को भेजे गए रेफरेंस में कुछ तथ्य छिपाए गए हैं। किसी भी मामले में कोर्ट, किसी जांच एजेंसी अथवा किसी अन्य स्तर पर फैक्ट्स छिपाना सरासर धोखाधड़ी है। इसके लिए तथ्य छिपाने वाले के खिलाफ धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का आपराधिक मामला दर्ज करके कार्रवाई की जानी चाहिए।
गिरिराज अग्रवाल - चंडीगढ़
रॉबर्ट वाड्रा लैंड डील मामले से चर्चा में आए वरिष्ठ आईएएस अशोक खेमका को अब कैग की स्पेशल ऑडिट और सीबीआई जांच के नाम पर फंसाने की राजनीतिक साजिश की जा रही है। हरियाणा कैग को 24 जनवरी, 2014 को लिखे गए एक पत्र में खुद खेमका ने यह आशंका जाहिर की है। हालांकि उन्होंने अपने खिलाफ साजिश में शामिल किसी नेता का नाम नहीं बताया है। उन्होंने कहा है कि जन प्रतिनिधि और अफसरों ने कैग को भेजे रेफरेंस में जानबूझकर तथ्यों को छिपाया गया है, ताकि उन्हें बदनाम किया जा सके।
उनका आरोप है कि लिखित आवेदन के बावजूद उन्हें वांछित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। यहां तक कि फाइलों का निरीक्षण करने तक की इजाजत नहीं दी गई। कैग को स्पेशल ऑडिट करने का रेफरेंस भेजने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर भी नहीं दिया गया, जबकि नेचुरल जस्टिस के तहत उन्हें ये अवसर मिलने चाहिए थे। पत्र में खेमका ने सीबीआई और कैग जांच का स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि सभी तथ्यों का गहराई से विश्लेषण किया जाना चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
सरकार को संवैधानिक संस्थाओं पर नहीं भरोसा: सरकार को सीएजी ((कैग)) जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर भी भरोसा नहीं रहा है। वेयर हाउसिंग के गोदामों में जिस गेलवलयूम शीट्स के उपयोग को लेकर कैग को स्पेशल ऑडिट के लिए रेफरेंस भेजा गया था, उन्हीं तथ्यों पर सीबीआई जांच के लिए रेफरेंस भेजे जाने की भी सीएम स्तर से मंजूरी दे दी गई। जबकि पहले कैग की रिपोर्ट का इंतजार किया जाना चाहिए था। इसमें तथ्यों को जानबूझकर इसलिए छिपाया जा रहा है ताकि कैग की रिपोर्ट को खेमका के खिलाफ कार्रवाई करने का आधार बनाया जा सके।
अधिकारियों पर ये तथ्य छिपाने का आरोप
इसलिए फंसाना चाहते हैं
सब्सिडी घोटाला खुलने से डरे हुए हैं अफसर
राज्य सरकार के अफसर गेहूं बीज में सब्सिडी का घोटाला खुलने की आशंका से डरे हुए हैं। इस मामले में खेमका ने सीबीआई में शिकायत की हुई है। इसमें बताया गया है कि बिना ओपन टेंडर प्रक्रिया के किस तरह बिचौलियों के माध्यम से ऊंचे दामों पर वर्ष 2010 में गेहूं का 99,996 क्विंटल बीज खरीदा गया और केंद्र से मिलने वाली सब्सिडी को हड़पने की कोशिश की गई। सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है।
ञ्चहरियाणा वेयर हाउसिंग स्वतंत्र निकाय है। सरकार की पूर्वानुमति लिए जाने का नियमों में कोई प्रावधान नहीं है।
ञ्चगोदामों की छत बदलवाने में गेलवल्यूम शीट्स के उपयोग को सीएम ने 18 दिसंबर, 2008 को ही मंजूरी दे दी थी, जबकि पहला टेंडर जनवरी, 2009 में किया गया था। सीएम को गेलवल्यूम शीट्स के उपयोग का प्रस्ताव खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के तत्कालीन निदेशक अनिल मलिक और प्रिंसिपल सेक्रेटरी एलएसएम साइलेंस के माध्यम से 5 दिसंबर, 2008 को भिजवाया गया था। सीएम की मंजूरी की सूचना वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन को 31 दिसंबर, 2008 को दी गई।
ञ्चगोदामों के निर्माण में तकनीकी मंजूरी देने के लिए चीफ इंजीनियर और उचित मैटेरियल का चयन करने के लिए एक्सईएन को बोर्ड की 172वीं मीटिंग में अधिकृत कर दिया गया था।
ञ्च कृषि विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी रोशनलाल की अध्यक्षता में 21 दिसंबर, 2009 को हुई बोर्ड मीटिंग में फतेहाबाद के गोदाम की वीडियो फिल्म भी दिखाई गई थी। इसे देखने के बाद मीटिंग में मौजूद एक्सपट्र्स और अन्य लोगों ने गेलवल्यूम शीट्स के प्रयोग की काफी प्रशंसा की थी। इसी मीटिंग में गोदामों के निर्माण में आगे भी गेलवल्यूम शीट्स का ही उपयोग करने का फैसला किया गया।
ञ्चतत्कालीन मुख्य सचिव उर्वशी गुलाटी की अध्यक्षता में 16 नवंबर, 2009 को हुई रिव्यू मीटिंग में भी इस नए प्रयोग की प्रशंसा की गई थी। इसके बाद फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ((एफसीआई)) ने 30 मई, 2013 को गेलवल्यूम शीट्स को सभी गोदामों के लिए स्टैंडर्ड मानक घोषित कर दिया था।
लोकसभा चुनाव आने वाले हैं। इनमें यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की कंपनियों की लैंड डील रद्द करने का मामला मुद्दा बन सकता है। इन कंपनियों का म्यूटेशन 15 अक्टूबर, 2012 को वरिष्ठ आईएएस अशोक खेमका ने ही रद्द किया था। इसके बाद खेमका की छवि एक ईमानदार अफसर के रूप में बनी। अब सीबीआई जांच और कैग रिपोर्ट को आधार बनाकर फंसाना चाहते हैं।
कहा, भेजे गए रेफरेंस में तथ्यों को छिपाया गया
नहीं मिला अपना पक्ष रखने का उचित अवसर
कैग को लिखे पत्र में आईएएस ने जताई आशंका
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.