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छत्तीसगढ़ को मनरेगा में राष्ट्रीय पुरस्कार

8 वर्ष पहले
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सचिन देव - नई दिल्ली
छत्तीसगढ़ को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी ((मनरेगा))योजना के तहत वर्ष २०१२-१३ के लिए केंद्र के प्रतिष्ठित पहले अभिसरण ((कंवर्जन्स)) पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। यह पुरस्कार केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा मनरेगा दिवस पर फरवरी में आयोजित सम्मेलन में दिया जाएगा। इस पुरस्कार के लिए देश के अनेक रा\\\'य दावेदार थे।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक छत्तीसगढ़ को यह पुरस्कार मनरेगा के लिए उपलब्ध राशि का अन्य योजनाओं के साथ बेहतर प्रबंधन और इस्तेमाल के किए दिया जाएगा। इस पुरस्कार के लिए मध्यप्रदेश, तमिलनाडू, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार सहित अन्य रा\\\'यों ने अपनी प्रविष्टियां भेजी थीं। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने सभी प्रस्तावों की समीक्षा के बाद संबंधित रा\\\'यों के प्रमुख सचिवों को अपनी प्रस्तुति के लिए आमंत्रित किया था। अपने प्रजेंटेशन में छत्तीसगढ़ सरकार ने बताया था कि उसने मनरेगा के तहत दो हजार २३२ करोड़ रुपए व्यय करते हुए १२.१० करोड़ मानव दिवस निर्मित किए थे। इससे रा\\\'य के २.४४ लाख लोगो को सौ दिन का रोजगार मिला था। इस योजना में प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले ५१ फीसदी परिवार लाभान्वित हुए।
प्रदेश सरकार ने वन विभाग के माध्यम से मनरेगा का ९९ करोड़ रुपए का कार्य किया था। इसमें वृक्षारोपण और बांस रोपण आदि कार्यो को हरियाली प्रसार योजना के साथ समन्वित करके मनरेगा की राशि का बेहतर प्रबंधन और उपयोग किया। इसी प्रकार मनेरगा में १४६ करोड़ रुपए व्यय करते हुए ५३ हजार से अधिक वनभूमि पट्टाधारियों की जमीन को समतल कराया गया था। इस कार्य में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना से समंवय करते हुए इन पट्टाधारियों को खाद और बीज के मिनी किट मुहैया कराए गए। इस प्रकार दो योजनाओं के समंवय से ग्रामीणों को जीविकोपार्जन के और बेहतर अवसर मिले। इसी तरह मछली पालन के लिए १५ हजार ४०० से \\\'यादा तालाबों को गहरा कराया गया। साथ ही दो हजार से अधिक गरीब किसानों के खेतों में कुंए खुदवाए गए। रा\\\'य के दंतेवाड़ा में आमंों की खेती, कोरिया में चारागार और बस्तर में काजू के पौधे लगाए गए।
इसमें प्रदेश सरकार की शाकम्बरी योजना से बेहतर समन्वय किया गया। ऐसा करने से ग्रामीणों को शाक-सब्जी उत्पादन में मदद मिली। इसके अलावा प्रदेश में मनेरगा की राशि को निर्मल भारत अभियान से जोड़ते हुए रा\\\'य में १९ हजार ६०० से अधिक शौचालय निर्मित किए गए। इस तरह आकार में छोटा होते हुए भी छत्तीसगढ़ सरकार ने मनरेगा की राशि न केवल बेहतर प्रबंधन किया बल्कि उसका अधिकाधिक उपयोग भी किया। इस प्रस्तुति के आधार पर छत्तीसगढ़ को बेहतर कंवर्जन्स के लिए पहले पुरस्कार का हकदार माना गया।
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