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सदन से अनुमति लिए बिना शिक्षकों को बांट दिए 100 करोड़
शेखर घोष - नई दिल्ली
बंटवारे के बाद आर्थिक हालत सुदृढ़ करने की मशक्कत करने में जुटी नार्थ एमसीडी के अतिरिक्त शिक्षा निदेशक ने दरियादिली दिखाते हुए शिक्षकों को नियमों के विपरीत एश्योर्ड करियर प्रोबेशन ((एसीपी)) स्कीम व मोडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोबेशन ((एमसीपी)) स्कीम के लगभग सौ करोड़ रुपए बांट दिए। इसके लिए न तो वित्त विभाग से राय ली गई, न ही स्थाई समिति व सदन में प्रस्ताव लाया गया।
बस तीन अधिकारियों की कमेटी बनाई गई और कमिश्नर को भी गुमराह करते हुए इस फाइल को पास करवा कर लागू कर दिया गया। इसके चलते एमसीडी ने केंद्र व दिल्ली सरकार से भी अधिक वेतनमान अपने शिक्षकों को दे दिया। जबकि दिल्ली सरकार व एमसीडी के प्राइमरी स्कूलों में कक्षा एक से लेकर पांच तक पढ़ाने वाले छात्रों के शिक्षकों की योग्यता समान है। 10+2 एवं ईटीई की भर्ती, चयन प्रकिया, ड्यूटी से लेकर वेतनमान समान है। जबकि नार्थ एमसीडी के अधिकतर शिक्षक 6600 का ग्रेड एमएसीपी ((3)) का लाभ ले रहे हैं। जबकि अभी तक इस स्कीम का लाभ केंद्र और दिल्ली सरकार के प्राथमिक अध्यापकों को नहीं मिलता।
कैसे किया सदन को
गुमराह : नियमों को धता बताते हुए बिना एमएचआरडी, डीओपीटी, दिल्ली सरकार की सहमति के बिना शिक्षकों की सूची बनाकर उ\\\'च अधिकारियों को गुमराह करते हुए अधिकारियों की कमेटी बनाई। निगम प्रस्ताव संख्या 102 को पलटकर पहले 15 जून 2012 के प्राथमिक शिक्षकों को एसीपी -2 में 9 अगस्त 99 से ही 6500-10500 के स्थान पर 7500-12000 का वेतनमान दे दिया। इसे एक जनवरी 2006 से 9300-34800+जीपी 4800 के स्थान पर 15600-39100+जीपी 5400 करते हुए शिक्षकों को एरियर के रूप में करोड़ों का भुगतान कर दिया। यह अधिकारी यहीं नहीं रुका, इसके बाद 28 जनवरी 13 को नया आदेश निकालकर एसीपी -2 प्राप्त अध्यापकों को 30 वर्ष की सेवा पर एमएसीपी -3 में 9300-34800+जीपी 5400 के
स्थान पर दिनांक एक सितंबर 2008 से 15600-39100+जीपी 6600 दे दिया।
नाम नहीं छापने की शर्त पर वित्त विभाग के एक उ\\\'च लेखा अधिकारी का कहना है कि अतिरिक्त निदेशक ((शिक्षा)) ने दो आदेशों के द्वारा दो वर्षों में एरियर के रूप में 90 करोड़ रुपए अध्यापकों को मूल वेतन से अधिक बांट चुका है, जिसकी वित्त विभाग से अनुमति नहीं ली गई क्योंकि वित्त विभाग के अनुमति लेने के लिए इस धन के लिए सदन की संतुष्टि आवश्यक थी।