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तीस रा\'यों के नेताओं को चाहिए ‘अपना चैनल

8 वर्ष पहले
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ञ्चसूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी भी ट्राई के साथ
संतोष ठाकुर - नई दिल्ली
देश के लगभग तीस रा\\\'यों के नेता जी को अपना एक अदद चैनल चाहिए। नहीं समझे। मामला जब अपनी छवि और अपनी पार्टी की नीति को जन-जन तक पहुंचाने का हो तो अपने मालिकाना हक वाले टीवी चैनल से बेहतर क्या हो सकता है। लेकिन इससे पूर्वाग्रह या पक्षपात वाली खबर और नजरिया जनता तक पहुंचने की शंका को देखते हुए ट्राई ने इसका विरोध किया है। इससे पहले ट्राई राजनैतिक पार्टियों की ओर से टीवी चैनल चलाने की मांग को ठुकरा चुका है। प्रसारण क्षेत्र के सीईओ के एक गोलमेज सम्मेलन में ट्राई के चेयरमेन राहुल खुल्लर ने इसका साफ शब्दों में विरोध किया। अपनी बेबाकी और साफगोई के लिए पहचान वाले खुल्लर ने दो-टूक कहा कि ऐसे प्रयास को सरकार को असफल करना चाहिए। अगर किसी ‘नेताजी’ को चैनल की दरकरार ही है तो वह पहले से मौजूद चैनल के माध्यम से अपने इरादे और संदेश लोगों तक पहुंचाए। उन्हें टीवी चैनल के स्वामित्व की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।
खुल्लर यहीं नहीं रुके। उन्होंने प्रसारण क्षेत्र के वितरण में भी नेताओं के परोक्ष दखल को खत्म करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि प्रसारण क्षेत्र में भी सेरोगेट पॉलिटिकल ऑनरशिप या परोक्ष मालिकाना अधिकार है। यहां भी नेता हैं। इस तरह की कोशिश पर रोक होनी चाहिए। रोचक यह है कि सम्मेलन में मौजूद सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने भी अपना समर्थन खुल्लर को दिया और कहा कि सेरोगेट पॉलिटिकल डिस्ट्रिब्यूशन को अवश्य रोकना चाहिए। गोलमेज सम्मेलन में प्रसारण क्षेत्र में डिजिटलीकरण, माइग्रेशन फीस, डायरेक्ट टू होम एंटीना और सैट टॉप बॉक्स की पोर्टिबिलिटी जैसे मसलों पर चर्चा होनी थी। लेकिन टीवी चैनलों की बढ़ती संख्या और उसमें नेताओं की रूचि को भी राहुल खुल्लर ने अपने संबोधन में छुआ। सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने कहा कि भारत में चैनलों की संख्या पर कोई रोक नहीं है। ऐसे में लगातार नए चैनल के प्रस्ताव आ रहे हैं। ऐसे में कंटेंट या विषयवस्तु जरूरी हो जाता है। चैनलों को चाहिए कि वह आम आदमी के हित और शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए भी कार्य करें।