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मप्र के वित्तीय समावेशन मॉडल ‘समृद्धि’ की सराहना
नेशनल ब्यूरो - नई दिल्ली
सुदूर ग्रामीण अंचलों तक बैंकिंग और वित्तीय सुविधाएं मुहैया कराने तथा बैंकों के जरिए हितग्राही मूलक योजनाओं का लाभ जरूरतमंद लोगों को पहुंचाने के मकसद से मध्यप्रदेश के वित्तीय समावेशन मॉडल ’समृद्धि’ की व्यापक सराहना हुई है। प्रदेश के इस अनूठे नवाचार की सफलताओं के बारे में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम ((यूएनडीपी)) द्वारा तैयार की गई मूल्यांकन रिपोर्ट को शुक्रवार को आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में समारोहपूर्वक जारी किया गया।
सचिव वित्त विभाग, भारत सरकार सुमित बोस, मुख्य सचिव मध्यप्रदेश एंटोनी डिसा और संयुक्त राष्ट्र की नई दिल्ली स्थित रेसीडेंट को-आर्डिनेटर और यूएनडीपी की रेसीडेंट रिप्रजेंटेटिव लिज ग्रेंद ने दीप प्र\\\'जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस मौके पर अतिरिक्त सचिव वित्त विभाग भारत सरकार स्नेहलता श्रीवास्तव, भारतीय रिजर्व बैंक सहित प्रमुख बैंकिंग संस्थानों के शीर्ष अधिकारी और जाने-माने वित्त विशेषज्ञ भी मौजूद थे। इस मौके पर मुख्य अतिथि सुमित बोस ने मध्यप्रदेश के वित्तीय समावेशन मॉडल ’समृद्धि’ की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश नवाचारों के क्षेत्र में अग्रणी है। मप्र आबादी के साथ ही भौगोलिक दृष्टि से भी बड़ा रा\\\'य है। सुदृढ़ वित्तीय अधोसंरचना से ही देश-प्रदेश की तरक्की संभव है और वित्तीय समावेशन का मध्यप्रदेश मॉडल इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे देश के अन्य रा\\\'य भी प्रेरणा लेंगे। बोस ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में विस्तार के लिए बैंकिंग संस्थाएं पोस्ट आफिस की तरह क्लाइंट फ्रेंडली वातावरण में कार्य करें।
मुख्य सचिव एंटोनी डिसा ने कहा कि पहले मध्यप्रदेश को बीमारू रा\\\'य कहा जाता था लेकिन अब यह विकास के विभिन्न क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि सामाजिक समावेशन के लिए आर्थिक समावेशन जरूरी है और सूचना प्रौद्योगिकी के बेहतर इस्तेमाल से इसमें सफलता हासिल की जा सकती है। इस दिशा में मध्यप्रदेश में समग्र सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम एक अनूठी पहल है। उन्होनें ग्रामीण क्षेत्रों में खोले जा रहे अल्ट्रा स्माल बैंकों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाए जाने के लिए उन्हें विभिन्न आर्थिक गतिविधियों से जोडऩे की जरूरत भी बताई।
अतिरिक्त सचिव वित्त विभाग भारत सरकार स्नेहलता श्रीवास्तव ने भारत सरकार द्वारा प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
इस मौके पर संयुक्तराष्ट्र विकास कार्यक्रम की प्रतिनिधि लिज ग्रेंद ने वित्तीय समावेशन के लिए मध्यप्रदेश द्वारा तैयार मॉडल की सराहना करते हुए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह एक सफल एकीकृत मॉडल है जिसमें सामाजिक सुरक्षा की सभी महत्वपूर्ण योजनाओं को शामिल किया गया है। उन्होंने ग्रामीण अंचलों में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच के सफल कार्यों को सराहा। कार्यशाला के प्रारंभ में अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास मध्यप्रदेश अरुणा शर्मा ने बताया कि समावेशी विकास के उद्देश्य से सुदूर ग्रामीण अंचलों तक सड़क संपर्क सुविधाएं, संचार और सूचना प्रौद्योगिकी सुविधाएं तथा वित्तीय संस्थाओं और साधनों की पहुंच सुनिश्चित की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों के आर्थिक विकास के लिए मध्यप्रदेश में वित्तीय समावेशन मॉडल ’समृद्धि’ के अंतर्गत बैंकिंग सुविधाओं से वंचित 14 हजार 667 गांवों के लिए करीब तीन हजार अल्ट्रा स्माल बैंकों की स्थापना की जा रही है। डेढ़ वर्ष में अब तक 2071 अल्ट्रा स्माल बैंक सुदूर गांवों में खुल चुके हैं जबकि पहले सुदूर गांवों में बैंकिंग सुविधाओं के लिए लोगों को 20 से 90 किमी की दूरी तक जाना पड़ता था। इन अल्ट्रा स्माल बैंकों के जरिये प्रत्यक्ष लाभ का हस्तांतरण सफलता से हो रहा है। ग्रामीण अंचलों में बी.पी.एल. परिवारों, वृद्धजन, निराश्रित, नि:शक्तजन और विधवाओं को भारत सरकार और रा\\\'य सरकार से मिलने वाली आर्थिक सहायता तथा पेंशन राशि सीधे बैंक खाते में जमा हो रही है। विद्यार्थियों को छात्रवृत्तियां तथा स्वास्थ्य योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ भी अल्ट्रा स्माल बैंकों के माध्यम से आसानी से मिल रहा है। अरुणा शर्मा ने बताया कि अल्ट्रा स्माल बैंकों को व्यावसायिक स्तर पर भी सफलता मिली है और 800 करोड़ रुपए से अधिक की राशि का लेन-देन अब तक इनके जरिए हो चुका है।
कार्यशाला के प्रथम तकनीकी सत्र में भारतीय रिजर्व बैंक की कार्यपालक निदेशक दीपाली पंत जोशी ने कहा कि सिर्फ बैंक खाते खोलना ही वित्तीय समावेशन नहीं है वरन बैंकिंग सुविधाओं के जरिए ग्रामीणों का आर्थिक विकास सुनिश्चित किया जाना जरूरी है।