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ऑपरेशन किया बाईं आंख का और चिपका दी दाईं आंख की फोटो

8 वर्ष पहले
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ञ्च बिहार एनआरएचएम में अनियमितताओं और गड़बडिय़ों की खुलने लगी परतें
ञ्च मोतियाबिंद ऑपरेशन से लेकर टैक्सी की रसीद तक सब फर्जी
प्रदीप सुरीन - नई दिल्ली
बिहार में विकास दिखाने की होड़ में कागजी खानापूर्ति के नाम पर कुछ भी किया जा रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन ((एनआरएचएम)) के तहत बिहार के सीतामढ़ी जिले में पिछले साल 120 लोगों का मोतियाबिंद का इलाज कर दिया गया। सबसे रोचक बात यह है कि कागजों में बताया गया बाईं आंख का ऑपरेशन हुआ और फोटो चिपका दिया गया दाईं आंख का। बात यहीं खत्म नही होती, जांच में पता चला कि \\\'यादातर मरीजों के ब्यौरे चिपकाए गए फोटो से बिलकुल नहीं मिलते। ऐसे कई खुलासे सूचना के अधिकार ((आरटीआई)) के तहत मांगी गई बिहार ऑडिट रिपोर्ट से सामने आए हैं।
एनआरएचएम मेनं अब परत-दर-परत गड़बडिय़ों की कलई खुलने लगी है। 2011-12 और 2012-13 की वित्तीय ऑडिट रिपोर्ट में कई और बड़ी अनियमितताएं सामने आई हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को सौंपी गई ऑडिट रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि कई स्वास्थ्य केंद्रों मे डॉक्टर, मेडिकल ऑफिसर गड़बडिय़ां कर रहे हैं। इन गतिविधियों में स्थानीय एनजीओ की मिलीभगत की बात भी सामने आई है।
मोतियाबिंद ऑपरेशन के नाम पर गड़बड़ी : 2012-13 की ऑडिट रिपोर्ट में बताया गया है कि सीतामढ़ी जिले में मोतियाबिंद ऑपरेशन के नाम पर ‘नेत्र सेवा समिति’ को 85,500 रुपए का भुगतान कर दिया गया। जांच में सामने आया है कि मात्र एक दिन में किए गए 120 ऑपरेशनों में से \\\'यादातर के ब्यौरे चिपकाए गए फोटो से मिलान तक नहीं कर रहे हैं। मसलन, 75 वर्षीय थूनी ठाकुर की बनाईं आंख का ऑपरेशन किया गया। लेकिन इस ब्यौरे के साथ जो फोटो चिपकाई गई वह बताई उम्र में कहीं कम उम्र की महिला थी। चौंकाने वाली बात यह है कि फोटो में बनाईं की जगह दाईं आंख की फोटो चिपकाई गई। जांच रिपोर्ट में ऐसे कई दूसरे मामलों के बारे में भी बताया गया है जिनमें खराब आंख की बजाए ऑपरेशन के बाद की आंख की फोटो लगा दी गई है।
एक ही दिन में दो लाख तक की गैर-कानूनी निकासी : गोरखपुर की चार्टर्ड एकाउंटेंट्स कंपनी हबीबुल्लाह एंड कंपनी ने लगातार दोनों वित्तीय वर्ष में नीतीश सरकार को चेताया है कि रा\\\'य के कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एक ही दिन में दो लाख या \\\'यादा की निकासी की जा रही है। ये निकासी टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 40ए((3)) का सीधे-सीधे उल्लंघन है। 2011-12 और 2012-13 वित्तीय वर्ष में जिन स्वास्थ्य केंद्रों में ऐसी अनियमितताएं पकड़ी गई हैं वहां के अधिकारी इन निकासियों के बारे में संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए हैं।
भाड़े के नाम पर आशा वर्करों को रेवड़ी : बिहार में एनआरएचएम का पैसा सिर्फ बड़े नहीं, बल्कि आशा वर्करों तक को बांटकर हजम किया जा रहा है। जननी सुरक्षा योजना के तहत बिहार की आशा वर्करों को हर एक संस्थागत प्रसव के लिए 600 रुपए प्रोत्साहन राशि दी जाती है। लेकिन बहीखातों से पता चलता है कि लगभग सभी आशा वर्करों को भाड़े के नाम पर 200 रुपए \\\'यादा दिए जा रहे हैं जबकि बिना किराए भाड़े की रसीदें दिखाया जाना गलत है।
स्थानीय स्वयंसेवी संगठनों से साठगांठ : ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन में सिर्फ सरकारी अफसर ही नहीं, बल्कि स्थानीय स्वयंसेवी संगठनों से साठगांठ कर फायदा पहुंचाया जा रहा है। लगभग सभी जिला अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के बहीखातों की जांच में सामने आया है कि परिवार नियोजन के नाम पर अनियमितताएं मौजूद हैं। परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत हर एक नसबंदी पर एनजीओ को 1500 रुपए दिए जाते हैं। लेकिन इसी नसबंदी कार्यक्रम को अगर सरकारी डॉक्टर खुद करते हैं तो इसके लिए मात्र एक हजार रुपए का खर्च आता है। ऑडिट जांच में सामने आया है कि हर नसबंदी को सरकारी डॉक्टर ही कर रहे हैं और पांच सौ रुपए का सीधा फायदा स्थानीय स्वयंसेवी संगठनों को पहुंचाया जा रहा है।