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तो बदल जाएगा राजपथ पर गणतंत्र दिवस की परेड का रंग रूप

8 वर्ष पहले
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ञ्चफ्री टिकट व पास बंद करने पर विचार
नेशनल ब्यूरो. नई दिल्ली
अगर सरकार के अंदर चल रहे विचारों को गति मिली तो संभव है कुछ वर्षो के बाद राजपथ पर गणतंत्र दिवस की परेड एक नए रंग-रूप में नजर आए। इसके लिए ऊंची दर की टिकट के साथ ही इसे सीमित करने पर सरकार के अंदर एक बहस बढ़ रही है। आला अधिकारियों के एक वर्ग का मानना है कि दुनिया अब जान चुकी है कि भारत एक सुपर पावर है। ऐसे में विजय चौक से लाल किला तक परेड और झांकी निकालने की जगह इसे मात्र राजपथ तक ही सीमित किया जाए। यही नहीं, राजपथ पर इसके प्रदर्शन को देखने के इ\\\'छुकों के लिए उ\\\'च दर वाली टिकट लगाई जाए, जिससे फ्री टिकटों-पास का चलन बंद हो। जिसे देखना हो वह एक निश्चित राशि चुकाए और परेड का लाइव आनंद ले।
असल में गणतंत्र दिवस की परेड को मात्र राजपथ तक सीमित करने के विचार को बढ़ाने वाले अधिकारियों के वर्ग का कहना है कि जब यह चलन शुरू हुआ था, उस जमाने में दुनिया और देश की जनता भी जानना चाहती थी कि हमारी सैन्य और तकनीकी ताकत क्या है। लेकिन अब जबकि हम परमाणु संपन्न राष्ट्र हैं, कई मसलों पर अमेरिका जैसे मुल्को से सीधा दो-चार करने को तैयार हो जाते हैं, तो इसे सीमित करना ही उचित है। खासकर फ्री पास-टिकट को खत्म करना चाहिए। वीवीआईपी के आसपास के बाड़ों के लिए उ\\\"ा दर टिकट हो। इसी तरह दूसरे छोर के लिए सस्ती दर हो। लेकिन यह राजपथ पर मुफ्त न हो। जिसे फ्री परेड-झांकी देखनी हो, उन्हें टीवी पर सीधा प्रसारण की सुविधा दी जाए। इस वर्ग का मानना है कि बड़े स्तर पर परेड आयोजन से न केवल सरकारी मशीनरी बल्कि सरकारी धन का भी दुरुपयोग हो रहा है। इस पर विचार होना चाहिए।
एक दिन के लिए 4 महीने की मशक्कत
लोगों को भले ही लगता हो कि यह आयोजन सेना करती है, लेकिन सच यह है कि वह केवल मुख्य संयोजनकर्ता है। असल में परेड के दौरान करीब 70 विभाग कार्यरत होते हैं। इसमें सबसे अहम भूमिका सीपीडब्ल्यूडी की होती है। वह परेड का करीब 80 प्रतिशत कार्य करता है। वहीं उसे इन सभी 70 विभाग से तालमेल भी करना होता है। गणतंत्र दिवस की परेड के लिए नवंबर से कार्य शुरू हो जाता है। जबकि परेड संपन्न होने पर फरवरी तक इसके लिए लगाया गया तामझाम हटाया जाता है। इन चार महीनों में करीब 90 हजार स्थाई-अस्थाई-अनुबंधित कर्मचारी-दैनिक दिहाड़ी मजदूर करीब 6 लाख मानव घंटे तक कार्य करते हैं। परेड मार्ग पर करीब 160 किमी पाइप की बैरीकेड लगते हैं।

वहीं 1.25 लाख कुर्सियां लगाई जाती है। यहां मौजूद तालाबों पर 24 अस्थाई पुल बनाए जाते हैं। इस सभी कार्य के लिए यहां पर 2200 मीट्रिक टन सामान अंधेरिया मोड़ स्थित सीपीडब्ल्यूडी के गोदाम से यहां पहुंचाया जाता है। इसके लिए हजारों ट्रक का आवागमन रात को किया जाता है जिससे दिन में ट्रैफिक पर असर न हो। सुरक्षा में करीब 30 हजार से अधिक जवान-अधिकारी तैनात होते हैं।