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संघ का आग्रह माना तो लोकसभा की राजनीति से अलग होंगे आडवाणी

8 वर्ष पहले
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सुजीत ठाकुर. नई दिल्ली
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी से रा\\\'यसभा सदस्य बनने का आग्रह किया है। मकसद, पार्टी में पीढ़ीगत परिवर्तन को मूर्तरूप देते हुए भविष्य के लिए परंपरा स्थापित करना है। गौरतलब है कि संघ ७० से अधिक उम्र के लोगों को सक्रिय राजनीति से दूर रखने का हिमायती रहा है।
इस बारे में भास्कर के सवाल पर भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने इस मसले पर कुछ भी कहने से इंकार करते हुए सिर्फ यह बोला कि आडवाणी जो चाहेंगे, वही होगा। वहीं , आरएसएस के प्रचार विभाग से जुड़े राम माधव ने न तो इस बात की पुष्टि की है न ही खंडन किया है। उन्होंने इस बारे में जानकारी नहीं होने की बात की है। भाजपा नेता भी आडवाणी को रा\\\'यसभा भेजे जाने के मुद्दे का न तो खंडन कर रहे हैं न ही समर्थन बल्कि प्रश्न को टालने की कोशिश कर रहे हैं। इस बारे में भाजपा प्रवक्ताओं से लेकर संसदीय बोर्ड के सदस्यों तक से बातचीत की गई लेकिन किसी ने भी खंडन नहीं किया न ही पुष्टि। सूत्रों का कहना है कि संघ यह चाह रहा है कि आडवाणी, रा\\\'यसभा के सदस्य बनते हुए एक परंपरा स्थापित करें ताकि भविष्य में ७० से अधिक उम्र के नेता समय रहते स्वयं को सक्रिय राजनीति से दूर रखने के लिए खुद को तैयार कर सकें। यह परंपरा स्थापित होने से पार्टी को भविष्य में पीढ़ीगत परिवर्तन के दौरान सियासी झंझावतों से नहीं गुजरना होगा।
गुजरात से बनेंगे सांसद
लाल कृष्ण आडवाणी ने यदि संघ का आग्रह माना तो उन्हें गुजरात से रा\\\'यसभा का सदस्य बनाया जाएगा। संघ से जुड़े सूत्रों का कहना है कि आडवाणी से हरी झंडी मिलते ही पार्टी, आडवाणी को गुजरात से रा\\\'यसभा का प्रत्याशी घोषित करेगी। गौरतलब है कि रा\\\'यसभा के लिए चुनाव प्रक्रिया चल रही है और २७ जनवरी को नामांकन की अंतिम तारीख है।
मोदी की राह और सरल : यदि आडवाणी रा\\\'यसभा के सदस्य बनते हैं तो लोकसभा चुनाव के बाद उनके समझ आडवाणी चुनौती नहीं बन सकते हैं। दरअसल, आडवाणी कई बार सार्वजनिक मंच से कह चुके हैं कि उनका मानना है कि प्रधानमंत्री लोकसभा से चुना हुआ सांसद होना चाहिए।


ऐसे में यदि आडवाणी आगामी चुनाव में लोकसभा की राजनीति से दूर रहते हैं तो मोदी के पीएम बनने को लेकर किंतु-परंतु का अवसर कम हो जाएगा।
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