- Hindi News
- डिम्ट्स के खातों की कैग से जांच कराने के आदेश
डिम्ट्स के खातों की कैग से जांच कराने के आदेश
भास्कर न्यूज - नई दिल्ली
दिल्ली सरकार ने दिल्ली इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल ट्रांजिट सिस्टम ((डिम्ट्स)) के खातों का कैग ऑडिट कराने का फैसला लिया है। डिम्ट्स विवादित बीआरटी ((बस रेपिड ट्रांजिट)) गलियारे सहित कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का संचालन कर रही है। मंगलवार को डिम्ट्स के प्रचालन को पारदर्शी बनाने के लिए दिल्ली कैबिनेट ने इस फैसले को मंजूरी दी। कैग, डिम्ट्स की २००६ में स्थापना के समय से वित्तीय खातों की जांच करेगा। अरविंद केजरीवाल सरकार की ओर से कैग ऑडिट का यह दूसरा आदेश है। इससे पहले, सरकार ने वितरण कंपनियों के कैग ऑडिट के आदेश दिए थे। २००६ में डिम्ट्स की स्थापना एक पूर्ण स्वामित्व वाली विशेष वाहन उपलब्ध कराने वाली कंपनी के रूप में की गई थी। जून २००७ में डिम्ट्स दिल्ली सरकार व ढांचागत विकास वित्त निगम के साथ संयुक्त कंपनी बन गया जिसमें दोनों का हिस्सा ५0-५० फीसदी है। डिम्ट्स बोर्ड में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में दिल्ली सरकार और आईडीएफसी के बराबर-बराबर संख्या में निदेशक नियुक्त किए जाते हैं। परिवहन निगम ने समय-समय पर विभिन्न कार्य आवंटित किए गए जिनमें निर्माण, निगरानी, परियोजना प्रबंधन, बोली प्रक्रिया, सार्वजनिक परिवहन बुनियादी ढांचे, इंटेलिजेंट संकेतक और जीपीएस ट्रैकिंग का प्रबंधन तथा अन्य संबंधित कार्य भी देख रहा है। डिम्ट्स ने कश्मीरी गेट बस अड्डे का नवीकरण, बस अड्डों का निर्माण, बीआरटी कॉरिडोर के प्रबंधन आदि के काम देख रहा है।
डिस्कॉम के बाद डिम्ट्स का ऑडिट
सरकार बनने के बाद से ट्रांसपोर्टर डिम्ट्स के कामकाज की ऑडिट की मांग कर रहे थे। ट्रांसपोर्टर की ओर से आरोप लगाया गया था कि डिम्ट्स कोई भी प्रोजेक्ट खुद नहीं करता बल्कि अन्य ठेकेदारों को बिना किसी उपयुक्त कीमत के कोटेशन दिए ही काम दे देता है। आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए डिम्ट्स के प्रवक्ता ने कहा कि हमारी कुछ परियोजनाओं में कुछ कामों को ठीक उसी तरह आउटसोर्स किया गया जैसे सरकार की दूसरे प्रतिष्ठानों में होता है। हमने काफी ध्यान से सभी काम आवंटित किए हैं और साथ ही हर प्रोजेक्ट के सभी पहलुओं पर निगरानी कर रहे हैं।
महिला सुरक्षा पर बनी समिति
महिलाओं की सुरक्षा के लिए ‘महिला सुरक्षा दल’ के गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मंगलवार को दिल्ली सरकार की कैबिनेट बैठक में इस बाबत मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की गई। कमेटी में तीन सदस्यों को शामिल किया गया है, जो 15 फरवरी तक महिला सुरक्षा दल के बाबत एक प्रारूप रिपोर्ट तैयार करके सरकार को सौंपेगी और उसी के आधार पर दल का गठन किया जाएगा। कमेटी में मुख्य सचिव के अलावा प्रधान गृह सचिव, होमगार्ड्स डिपार्टमेंट के महानिदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशक शामिल होंगे। यह समिति ‘महिला सुरक्षा दल’ के संदर्भ में सभी पहलूओं का अध्ययन करेगी।
वार्ड स्तर पर तैयार होगी कमेटी
महिलाओं, बुजुर्गों व ब\\\"ाों की सुरक्षा के लिए वार्ड स्तर पर ‘महिला सुरक्षा दल’ का गठन किया जाएगा। इस दल में सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों व जवानों,इत्यादि को प्राथमिकता दी जाएगी। इस दल पर खर्च होने वाली धनराशि का वहन दिल्ली सरकार करेगी।
पुलिस पॉवर नहीं
कैबिनेट ने स्पष्ट कर दिया है कि दल के पास पुलिस का कोई अधिकार नहीं होगा। यह केवल सरकारी मशीनरी के साथ मिलकर महिलाओं, बुजुर्गों व ब\\\"ाों की सुरक्षा में अहम् भूमिका निभाएंगे।
फास्ट टै्रक कोर्ट पर सिफारिश
यह कमेटी दिल्ली की जिला अदालतों में महिलाओं से संबंधित मामलों की भी समीक्षा करेगी और सरकार को बताएगी कि दिल्ली में कितने फास्ट टै्रक कोर्ट की जरूरत है। ताकि महिलाओं से जुड़े अपराधों में तेजी से सुनवाई हो और तत्काल न्याय मिले।
अस्थायी कर्मचारी भी होंगे नियमित
दिल्ली सरकार की कैबिनेट बैठक में सरकारी विभागों में अस्थायी तौर, अनुबंध और अनियमित कर्मचारियों के नियमितिकरण को लेकर दिल्ली सरकार ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी अगले एक महीने में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। मुख्य सचिव एसके. श्रीवास्तव की अध्यक्षता में गठित कमेटी में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी प्रकाश चंद्र, वित्त सचिव डॉ. एमएम. कुट्टी, विधि सचिव एएस. यादव, पीडब्ल्यूडी के प्रधान सचिव अरुण बारोका, श्रम विभाग के अतिरिक्त आयुक्त पीयुष शर्मा शामिल होंगे। इनके अलावा सात कोऑप्ट मेंबर्स को भी शामिल किया जाएगा। कमेटी विभिन्न पहलुओं पर प्रस्ताव तैयार करेगी। इसके तहत दिल्ली सरकार के सभी विभागों में अस्थायी, अनुबंधित और अनियमितत कर्मचारियों की कुल संख्या का पता लगाया जाएगा।