बिहार में भी ‘आधार से एलपीजी’ की तैयारी
संतोष ठाकुर - नई दिल्ली
बिहार में जदयू सरकार के साथ कांग्रेस के लगातार बिगड़ रहे संबंधों में आने वाले समय में एक नया अध्याय जुडऩे वाला है। आम चुनाव से पहले केंद्र सरकार यहां पर ‘आधार से एलपीजी’ योजना की शुरुआत करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए बाकायदा आधार के मौजूदा अधिकार क्षेत्र
का विस्तार की तैयारी भी की जा रही है।
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ के साथ ही बिहार में भी आधार प्राधिकरण को स्थानीय नागरिकों को आधार नंबर देने का अधिकार दिया जा रहा है। जबकि पहले यह तय हुआ था कि जिन रा\\\'यों में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के डाटा जुटाने का कार्य चल रहा है, वहां पर इसका कार्य संपन्न होने के बाद आधार को यह डाटा देकर सभी नागरिकों के लिए आधार नंबर लिया जाएगा। लेकिन, अब बीच में ही आधार के हस्तक्षेप की तैयारी की जा रही है। एक बार यहां के जिलों में आधार संख्या वितरण के बाद स्थानीय लोगों को आधार से ही रियायती एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी होगी। इस योजना के लागू होने पर बिना सब्सिडी के सिलेंडर की कीमत 1200 से अधिक हो सकती है।
इस स्थिति में बिहार में असंतोष बढ़ सकता है। बिहार में पहले ही गैस एजेंसियों की संख्या सीमित है। उस पर भी यहां पर 90 प्रतिशत से अधिक लोगों को रियायती सिलेंडर की डिलीवरी घर पर नहीं होती है। उन्हें गैस गोदाम में जाकर अलसुबह लाइन लगानी होती है। उसके बाद भी सभी को सिलेंडर नहीं मिलता है। चुनिंदा लोगों को ही रियायती सिलेंडर मिल पाता है। जिससे इसकी डिलीवरी को लेकर लोगों में हमेशा रोष रहता है। अगर ऐसे में आधार से एलपीजी योजना शुरू होती है तो लोगों के सामने एक नई समस्या आएगी।
यहां के अधिकतर लोगों के पास बैंक एकाउंट नहीं है। एकाउंट खुलवाना भी आसान नहीं है। इसका मतलब यह हुआ कि अगर जिसके पास एक निश्चित अवधि तक आधार नंबर नहीं आया और उसका बैंक एकाउंट नहीं है तो उसे रियायत का पैसा हासिल नहीं होगा। यही नहीं, उसके बाद सिलेंडर की मारा-मारी पहले की तरह रहेगी।
हालांकि पेट्रोलियम मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि इसका मकसद सभी को सब्सिडी उनके एकाउंट में पहुंचाने की योजना को गति देना है। लेकिन यह अधिकारी यह नहीं बता पाए कि जब यहां पर राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर ने सभी नागरिकों का डाटा जुटाना था और उसके बाद उसे आधार से लिंक करना था तो अचानक आधार प्राधिकरण को इस कार्य के बीच में
लाने की कवायद क्यों की जा रही है।