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84 दंगों की एसआईटी जांच तो बाटला हाउस की क्यों नहीं?
हंगामे के पहले सीएम ने गिनाईं सरकार की उपलब्धियां व
भावी योजनाएं
भास्कर न्यूज - नई दिल्ली
84 के सिख विरोधी दंगों की एसआईटी से जांच होगी तो बाटला हाउस एनकाउंटर की जांच एसआईटी से क्यों नहीं हो सकती? ओखला से कांग्रेस विधायक आसिफ मोहम्मद खान के इसी सवाल के उठाने और हंगामा करने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सचिवालय में गुरुवार को अपनी सरकार के कामकाज के एक महीने का लेखा-जोखा पेश करने के लिए बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म कर दी।
कांग्रेस विधायक किसी काम से सचिवालय आए थे और मुख्यमंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बाटला हाउस एनकाउंटर पर पूछे गए एक सवाल के दौरान हॉल के बाहर से गुजर रहे थे। एक सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बाटला हाउस एनकाउंटर पर अदालत का फैसला आ चुका है और वे अदालत का सम्मान करते हैं और वे इस मामले में किसी भी किस्म की जांच पर विचार नहीं कर रहे हैं। इस जवाब पर आसिफ भड़कते हुए उस हॉल में घुस आए जहां प्रेस कॉन्फ्रेंस चल रही थी और जोर-जोर से चिल्लाने लगे कि अरविंद केजरीवाल रेडियो झूठिस्तान का डायरेक्टर है। उनके इतना कहते ही सभी टीवी कैमरामैन आसिफ की ओर लपके और केजरीवाल इस हंगामे के बीच पत्रकारों के सवाल जवाब का सिलसिला बीच में ही छोड़कर अपने चैंबर की ओर निकल गए।
इससे पहले केजरीवाल ने एक माह की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि उनकी सरकार ने 84 के सिख विरोधी दंगों की एसआईटी से जांच कराने का फैसला लिया है। यह प्रस्ताव अगले हफ्ते कैबिनेट में आएगा और फिर उसे उप-रा\\\'यपाल नजीब जंग के पास मंजूरी के लिए भेजेंगे। उन्होंने कहा, सिख समुदाय की वर्षों से मांग है कि दंगों के मामले में विधिवत व समग्र तरीके से विशेष जांच दल बने जो सभी सुबूतों को एकत्र करके कार्रवाई करे। इन दंगों में एक पार्टी का नाम सीधे तौर पर आ रहा है, इसलिए उनसे तो कोई अपेक्षा नहीं की जा सकती लेकिन दूसरी पार्टी भी दिल्ली में पांच साल और केंद्र में छह साल शासन कर चुकी पर वह भी केवल मांग ही करती रही।
नहीं होंगी राजनैतिक नियुक्तियां
महिला आयोग की नई अध्यक्ष के लिए मैत्रेयी पुष्पा का नाम आगे बढ़ाने के साथ-साथ उन्होंने कहा कि सरकार के सभी बोर्ड, समितियों, आयोग व संस्थाओं में राजनैतिक नियुक्तियां नहीं होंगी। दिल्ली विश्वविद्यालय के 28 कॉलेजों की प्रबंधन समितियों में शिक्षाविदों व विद्वानों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया है। हाईकोर्ट व जिला एवं सत्र न्यायालयों में भी स्टैंडिंग काउंसिल, पब्लिक प्रोसिक्यूटर व गवर्नमेंट काउंसिल की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी होगा और स्वतंत्र कमेटी उनका चयन करेगी।
आगे की योजनाएं
दिल्ली के 946 स्कूलों की मैपिंग की गई है कि कहां लेडी टॉयलेट तो कहां डेस्क व दरियों की कमी है। अब इनमें बुनियादी ढांचा दुरुस्त करने के लिए खाका तैयार हो रहा है। इसी तरह स्वास्थ्य को लेकर भी विस्तृत योजना बनाई जा रही है। महिला सुरक्षा को लेकर कमेटी बनाई है जो महिला सुरक्षा दल के बारे में विस्तृत खाका बताएगी। यह भी बताएगी कि दिल्ली में और कितने फास्ट ट्रैक कोर्ट चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि तीन से छह महीने में रेप के मामलों में ट्रायल होकर सजा भी मिल जाए।
यह अध्ययन भी किया जा रहा है कि जस्टिस जेएस वर्मा रिपोर्ट की किन सिफारिशों को दिल्ली में लागू किया जा सकता है।