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डाउनलोड करेंनई दिल्ली. पिछले 16 दिनों से नियमितीकरण की मांग को लेकर धरने पर बैठे ठेके के शिक्षकों ने गुरुवार को अपना धरना समाप्त कर दिया। शिक्षकों ने कहा कि यदि दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसौदिया पहले दिन ही शिक्षकों को लिखित आश्वासन दे देते तो 16 दिनों तक धरना देने की नौबत नहीं आती। हालांकि इस मौके पर शिक्षकों ने गेस्ट टीचर्स को बुलाकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा निष्कासित करने की धमकी देने की आलोचना की। गौरतलब है कि दिल्ली के सरकारी विभागों में अस्थायी, अनुबंधित और ठेके पर कार्यरत कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर दिल्ली सरकार ने 2 दिन पहले एक कमेटी का गठन किया है, जिसमें सरकार के आला अधिकारियों को शामिल किया गया है।
अगले एक महीने में कमेटी विभिन्न पहलुओं पर प्रस्ताव तैयार करेगी। इसके तहत दिल्ली सरकार के सभी विभागों में अस्थायी, अनुबंधित और अनियमित कर्मचारियों की कुल संख्या का पता लगाया जाएगा। इसके अलावा स्थायी पद कब से रिक्त हैं? नियुक्ति करने का क्या प्रोसेस है, इस मामले में कानूनी, तकनीकी और आर्थिक पहलू क्या हैं, जैसे मुद्दों की भी समीक्षा की जाएगी और इसके बाद रिपोर्ट तैयार करके सरकार को सौंपी जाएगी। इसके अलावा यह शर्त भी निर्धारित की जाएगी कि जब तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती है, तब तक कोई भी कर्मचारी डिस्टर्ब नहीं करेगा।
डीटीसी कर्मियों की हड़ताल से यात्रियों को हुई परेशानी
डीटीसी के अस्थाई कर्मचारियों के काम पर न जाकर खुद को नियमित करने की मांग को लेकर धरना देने के चलते गुरुवार को भी पूरी दिल्ली के यात्रियों को परेशानियां झेलनी पड़ीं। अस्थायी कर्मचारियों को नियमित किए जाने की मांग को लेकर दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के करीब दो हजार अस्थायी कर्मचारियों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। हड़ताल की वजह से मिलेनियम बस डिपो से विभिन्न रूटों पर चलने वाली 650 बसें डिपो में ही खड़ी रहीं। पुलिस मुख्यालय के बाहर लोगों को घंटों बसों का इंतजार करना पड़ा। बसें कम चलने की वजह से ऑटो चालकों ने यात्रियों से मनमाना किराया वसूला। हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो 30 जनवरी के बाद वे दिल्ली सचिवालय पर प्रदर्शन को बाध्य होंगे। वर्तमान में डीटीसी में 11 हजार से ज्यादा अस्थायी कर्मचारी हैं। ये सोमवार से हड़ताल पर हैं।
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