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नालंदा विवि में यूरोपीय यूनियन भी होगा भागीदार, 28 राजदूतों ने देखा प्रजेंटेशन

7 वर्ष पहले
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नेशनल ब्यूरो - नई दिल्ली
नालंदा विश्वविद्यालय में पहले से मौजूद देशों के अलावा यूरोपियन यूनियन के देश भी शामिल हो सकते हैं। विदेश मंत्रालय, जो इस विवि के वैश्विक स्वरूप की वजह से संयोजनकर्ता है, ने गुरुवार को यूरोपियन यूनियन के 28 राजदूतों को इस विवि की महत्ता और इसके स्वरूप को लेकर प्रस्तुतिकरण दिया। इसके बाद कई यूरोपीय देशों के राजदूतों ने इसको लेकर सकारात्मक रुख दिखाया है। उम्मीद है कि इनमें से कुछ देशों के साथ आने वाले समय में आपसी समझौता पत्र पर भी हस्ताक्षर हो सकते हैं। फिलहाल भारत में स्थापित होने वाले इस विवि में ऑस्ट्रेलिया, ब्रनुेई, कंबोडिया, लाओ पीडीआर, म्यांमार, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, चीन और दक्षिण कोरिया शामिल हैं।
सितंबर तक राजगीर कार्यालय: नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना से खुश, लेकिन इसके मुख्य कैंप कार्यालय के दिल्ली में होने और वहीं से इस साल से इस विवि के शुरू होने से नाखुश स्थानीय लोगों की इ\\\'छा को देखते हुए सरकार ने सितंबर तक इसके राजगीर कार्यालय को खोलने का निश्चय किया है। एक अधिकारी ने कहा कि कोशिश यह है कि जब प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो तो राजगीर में एक कार्यालय हो। उसके साथ ही इस अवधि तक वहां पर कैंपस स्थापित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी जाएगी।
रेल-आईटी शहर- सड़क: इस अधिकारी ने कहा कि इस विवि को लेकर बिहार सरकार की ओर से लगातार सहयोग मिल रहा है। उसने 455 एकड़ भूमि मुफ्त में दी है। बिहार सरकार ने यहां पर एक आईटी सिटी बनाने का इरादा जताने के साथ ही यहां पर एक पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज खोलने की दिशा में भी कार्य किया है।
इसके अलावा इस जगह को बेहतर सड़क-रेल नेटवर्क से जोडऩे के साथ ही यहां पर मिनी एयरपोर्ट को लेकर भी विचार किया जाएगा। सरकार ने वर्ष 2010-11 से लेकर 2021-22 तक के लिए 2727.10 करोड़ रु. के बजट को संस्तुति दी है।
निर्माण प्रक्रिया: सरकार ने इसके वास्तुशिल्प डिजाइन के लिए कंपनी अनुबंधित करने का काम पूरा कर लिया है। पहला फेज के कैंपस निर्माण का कार्य 2014-15 तक करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं वर्ष 2017-18 तक समस्त कैंपस निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। विवि के चांसलर नोबेल विजेता अमत्र्यसेन हैं। वहीं वाइस चांसलर डॉ. गोपा सब्बरवाल है। इसमें दुनिया के सभी मुल्कों के छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा। यहां की शिक्षा का मूल तत्व नौकरी के लिए छात्र तैयार करने की जगह शोधार्थी तैयार करना होगा।
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