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बिना आधार एलपीजी : छोटू सिलेंडर और सरकार की करोड़ों की योजना पर आघात

7 वर्ष पहले
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संतोष ठाकुर - नई दिल्ली
बिन आधार के एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी और रियायती सिलेंडर की संख्या 9 से बढ़ाकर 12 करने के फैसले से सरकार की उस महत्वाकांक्षी योजना को करारा झटका लगा है, जिसके तहत वह कालाबाजारी रोकने और लोगों को मांग पर घर के पास ही एलपीजी देने की तैयारी कर रही थी। सरकार के इस फैसले से हाल ही में शुरू की गई छोटू सिलेंडर योजना पर तो प्रतिकूल असर पड़ेगा ही, सरकार की ओर से आधार से एलपीजी योजना का लाभ लेने वाले लाखों ग्राहकों के बैंक खाते में एडवांस के तौर पर स्थानांतरित करोडों़ रुपए की वापसी की समस्या भी पैदा हो जाएगी।
दरअसल 5 किलो वाले छोटू सिलेंडर को देशभर के पेट्रोल पंप पर उपलब्ध कराने का उद्देश्य यह था कि लोग अपने पास के पंप से मांग के आधार पर बाजार भाव पर एलपीजी हासिल कर लें। अब जबकि रियायती सिलेंडरों की संख्या बढ़कर 12 हो गई है तो ऐसे में आशंका है कि जो डिलीवरी मेन पहले इसके लिए 1200 रुपए तक कालाबाजार में हासिल कर रहे थे, वह अब इन्हीं सिलेंडर को पहले की तरह 500 रुपए तक में कालाबाजार में बेचना शुरू कर देंगे। ऐसे में कोई भी व्यक्ति, जिसे 500 रुपए में 14.200 किग्रा का सिलेंडर मिलेगा, वह पेट्रोल पंप पर जाकर बाजार भाव वाला 5 किग्रा का सिलेंडर क्यों खरीदेगा। यही नहीं, इससे कालाबाजारी की आशंका भी बढ़ गई है।
दूसरी ओर, आधार से एलपीजी योजना के तहत सरकार ने योजना के तहत आए लोगों को एडवांस में रियायत का पैसा भेजना शुरू कर दिया था। ऐसे लाखों लोग हैं जिनके बैंक खातों में एडवांस में पैसा जाता है। अगर एक या दस लाख ग्राहकों के आधार पर ही उनके खाते में जाने वाली 415 रुपए की राशि को जोड़ा जाए तो यह करोड़ों में हो जाती है।
एडवांस में जारी की गई यह राशि इन ग्राहकों से कैसे हासिल की जाएगी, इसे लेकर कोई स्पष्ट नीति भी पेट्रोलियम मंत्रालय पेश नहीं कर पाया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के एक अधिकारी ने माना कि ये समस्याएं सामने आएंगी। इस अधिकारी ने कहा कि जहां तक छोटू सिलेंडर के विस्तार की बात है तो उस पर फिलहाल रोक लगा दी जाएगी। दूसरी ओर लोगों के एकाउंट में गए एडवांस का क्या किया जाए, इसे लेकर वित्त मंत्रालय से बात की जाएगी।