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दवा कंपनियोंं को स्वै\'िछक जुर्माने पर ऐतराज
बिजनेस भास्कर - नई दिल्ली
दवा कंपनियां ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर ((डीपीसीओ)) १९९५ की अवधि के दौरान तय समय में नई कीमतें लागू न करने के लिए जुर्माने की रकम जमा कराने को तैयार नहीं दिख रही हैं। कुछ दवा कंपनियां पिछले एक दशक की अवधि में हुई दवाओं की बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड न होने की बात कह रही हैं। वहीं, कुछ कंपनियों का कहना है कि इस बारे में हमारा उद्योग संगठन जो फैसला करेगा हम उसी के आधार पर आगे कदम उठाएंगे।
एक अग्रणी दवा कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘बिजनेस भास्कर’ को बताया कि आम तौर पर कंपनियां उत्पादन और बिक्री से जुड़े चार-पांच वर्ष पुराने आंकड़े मेंटेन करती हैं। हालांकि इसको लेकर कोई कानूनी बाध्यता नहीं है। कंपनियां अपनी सुविधानुसार आंकड़े मेंटेन करती हैं। अधिकारी के मुताबिक इस कैटेगरी में आने वाले हमारे उत्पादों की संख्या बहुत कम है।
फिर भी हमारा उद्योग संगठन इस पर जो फैसला करेगा हम उसी के आधार पर आगे कदम उठाएंगे।
घरेलू दवा कंपनियों के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाले उद्योग संगठन इंडियन फार्मास्युटिकल एलाएंस ((आईपीए)) के सेक्रेटरी जनरल डी.जी शाह का कहना है कि कोई भी कंपनी दवाओं की बिक्री से जुड़े दस वर्ष पुराने आंकड़े मेंटेन नहीं करती है। यहां तक कि आज अगर किसी कंपनी से पूछा जाए कि उसके पास कितना स्टॉक है तो उसने होलसेलर को जितनी दवा बेची वह तो बता सकती है लेकिन केमिस्ट ने कितनी दवा बेची और कितना स्टॉक बचा है, इसको ट्रैक करने का कोई सिस्टम नहीं है। शाह के मुताबिक नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी ((एनपीपीए)) के पास भी इस तरह का कोई आंकड़ा नहीं है। ऐसे में दवा कंपनियों पर इसकी जिम्मेदारी डालना व्यावहारिक नहीं है।
वहीं, दवा उद्योग संगठन इंडियन ड्रग मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन ((आईडीएमए)) के सेक्रेटरी जनरल दारा बी पटेल का कहना है कि हमने इस बारे में एनपीपीए के पत्र को अपनी सदस्य दवा कंपनियों को फॉरवर्ड कर दिया है। दवा कंपनियां इस बारे में खुद फैसला कर सकती हैं। हम इस बारे में किसी पर दबाव नहीं डाल सकते हैं। पटेल का कहना है कि व्यक्तिगत रूप से मेरा मानना है कि दवा कंपनियां दवाओं की बिक्री से जुड़ा एक दशक पुराना रिकॉर्ड नहीं रखती हैं।
हाल ही में एनपीपीए ने दवा उद्योग संगठनों को पत्र लिखकर 15 दिन की अवधि में नई दवा कीमतें लागू न करने वाली दवा कंपनियों को स्वै\\\'िछक रूप से ओवरचार्जिंग की रकम 15 फीसदी ब्याज के साथ जमा कराने को कहा था। एनपीपीए ने पत्र में सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में दिए गए आदेश का हवाला दिया था जिसमें कहा गया था कि दवा कंपनियों को नई दवा कीमतें 15 दिन में लागू करनी होंगी।