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किसी के अहसान को नजरअंदाज न करें : मुनि विनय
भास्कर न्यूज - चंडीगढ़
जीवन में किसी का अहसान मानने में कुछ नहीं जाता। न ही इंसान अहसान मानने से छोटा हो जाता है। अहसान दूसरों के प्रति हमारी श्रद्धा और सम्मान को बढ़ाता है। ये प्रवचन मुनि विनय कुमार आलोक ने अणुव्रत भवन सेक्टर-24 में दिए। मुनिश्री ने कहा कि किसी अपना काम होने पर किसी का धन्यवाद करना और उसका अहसान कभी भूलना नहीं चाहिए। क्योंकि उस इंसान ने मुसीबत के विपरीत परिस्थितियों में आपका साथ दिया और उस समय को सफल बनाया। जब आपको मुसीबत में कहीं से भी आशा की किरण नजर नहीं आ रही थी तब उस व्यक्ति ने आपका साथ दिया। ऐसे लोग भगवान के रूप में मदद के लिए आते हैं। ईश्वर से मदद करने वाले ऐसे लोगों का अहसान चुकाने की मुराद करनी चाहिए। मुनि ने कहा कि मनुष्य द्वारा किए जाने वाले कर्म का एक लौकिक स्वरूप यह होता है कि जो जैसा कर्म करता है, उसके जीवन का स्वभाव भी वैसा ही हो जाता है। इसलिए हमें अपने जीवन में हमेश अच्छे कर्म करने चाहिए। अच्छे कर्म करोगे तो अच्छा फल मिलेगा।
बुरे करोगे तो बुरा लेकिन जो इंसान प्रभु ईश्वर को जानकर उसकी भक्ति में सदा लीन रहता है वह इन अच्छे बुरे कर्मों के हेरफे र से बच जाता है। क्योंकि उसका तो एेसा बर्ताव हो जाता है उसके लिए सर्दी गर्मी, सुख दुख सब एक समान हो जाते हैं और दुनिया वाले या तो उसे मूर्ख बताते हैं। वह दुनिया में रहते हुए भी दुनिया की इस मायावी रूपी माया जाल में नहीं फंसता है।
सेक्टर-30 के संत निरंकारी सत्संग भवन और सेक्टर-२४ के अणुव्रत भवन में प्रवचन