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ग्रामीण क्षेत्रों में पहली बार बढ़ा प्राइवेट स्कूलों में दाखिला

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - चंडीगढ़
प्रदेश में पहली बार ऐसा हुआ है जब ग्रामीण क्षेत्रों में भी सरकारी स्कूलों के बजाय प्राइवेट स्कूलों में छोटे बच्चों का दाखिला बढ़ा है। स्वयंसेवी संस्था ‘असर’ की ओर से बुधवार को चंडीगढ़ में जारी की गई रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक रूरल हरियाणा में प्राइवेट स्कूलों में दाखिले का स्तर लगातार बढ़ रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार 6 से 14 साल की आयु वर्ग के 51.4 प्रतिशत बच्चे प्राइवेट स्कूलों में जा रहे हैं जबकि पिछले साल ((वर्ष 2012)) में 49.2 फीसदी बच्चे ही प्राइवेट स्कूलों में दाखिला ले रहे थे। सर्वे में लड़कियों की शिक्षा को लेकर भी चिंता जाहिर की गई है। वर्ष 2006 की तुलना में 2013 में स्कूल जाने वाली लड़कियों में 3.1 प्रतिशत की गिरावट आई है। संस्था के अनुसार लड़कियों को स्कूल तक लाना और उन्हें पढ़ाई के लिए रोके रखना ((ठहराव)) बड़ी चुनौती है।



साढ़े 16 फीसदी स्कूलों में पीने के

पानी की व्यवस्था नहीं

राइट टू एजुकेशन एक्ट आने के बाद सुविधाओं में हालांकि सुधार हुआ है, लेकिन सर्वे के दौरान पाया गया कि 16.5 फीसदी स्कूलों में पीने के पानी की सुविधा नहीं थी, जबकि टायलेट्स की सुविधा वर्ष 2010 की तुलना में वर्ष 2013 में 67.9 फीसदी से बढ़कर 80.2 हो गई है। परंतु इनमें 78 प्रतिशत स्कूल ही ऐसे थे जिनमें छात्राओं के लिए अलग से टॉयलेट की सुविधा थी।

लड़कियों की शिक्षा पर और ध्यान देंगे: भुक्कल

शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल का कहना है कि इस तरह की रिपोर्ट हमारे लिए मार्गदर्शक का काम करती हैं। कहीं कमी-खामियां सामने आई हैं तो हम उन्हें दूर करने के प्रयास करेंगे। प्राइवेट स्कूल भी हमारी शिक्षा व्यवस्था का ही एक भाग हैं। वे क्वालिटी एजुकेशन दे रहे हैं तो उनमें दाखिला बढऩा शुभ संकेत है। हालांकि इसकी वजह हरियाणा में प्रति व्यक्ति आय बढऩा है। लड़कियों की शिक्षा पर हम और ध्यान देंगे। पिछले काफी समय से यह मांग उठती रही है कि सरकारी स्कूलों में महिला शिक्षकों की संख्या ज्यादा बढ़ाई जानी चाहिए, इस बारे में विचार किया जा रहा है। हम रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद सरकारी स्कूलों की पढ़ाई व्यवस्था की ओर ध्यान देंगे।



98 प्रतिशत छोटे बच्चों का स्कूलों में दाखिला

ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को पढ़ाने को लेकर रुझान बढ़ा है। पिछले 3 साल से लगभग 98 प्रतिशत छोटे बच्चों का स्कूलों में दाखिला करवाया जा रहा था। जबकि वर्ष 2013 में यह संख्या बढ़कर 98.7 प्रतिशत हो गई है। हालांकि बच्चे का पहली बार स्कूल में दाखिला कराए जाने की आयु 6 साल है, लेकिन अब इससे पहले ही बच्चों को स्कूल भेजने की संख्या में भी इजाफा हुआ है। वर्ष 2012 में जहां 85.1 फीसदी बच्चे ही 6 साल से पहले स्कूलों में दाखिला लेते थे, वहीं वर्ष 2013 में यह संख्या बढ़कर 89.8 प्रतिशत हो गई है।

असर ने ऐसे किया सर्वे

असेस्टमेंट, सर्वे, मूल्यांकन और रिसर्च ((असर)) संस्था ने अपने सर्वे में हरियाणा के 20 जिलों, 582 गांवों में 11,835 परिवारों के ((3 से 16 आयु वर्ग)) 15000 बच्चों को शामिल किया है। स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं और अन्य संगठनों के माध्यम से कराए जाने वाले सर्वे में संस्था स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं, बच्चों की स्कूलिंग और लर्निंग लेवल का पता लगाती है।

स्कूल में मास्टर ज्यादा, बच्चे कम आते हैं

वर्ष 2013 में असर ने हरियाणा में 561 सरकारी प्राइमरी स्कूलों का सर्वे किया। इस दौरान पता चला कि प्राइमरी और अपर प्राइमरी कक्षाओं में अध्यापकों की उपस्थिति 85 प्रतिशत से ज्यादा थी, जबकि छात्रों की उपस्थिति वर्ष 2012 की तुलना में 2 प्रतिशत कम होकर करीब 75 फीसदी ही रही।



6 से 14 साल की आयु के 51.4 फीसदी बच्चे दे रहे निजी स्कूलों को प्राथमिकता

पॉजिटिव ‘असर’