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पंचकूला की मार्केट कमेटी में प्लॉट अलॉटमेंट में घोटाला

8 वर्ष पहले
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गौरव भाटिया - चंडीगढ़
अनाज मंडी सेक्टर-20 पंचकूला में 2008 में दो प्लॉट नीलाम किए गए। इनके मालिकों ने 25 फीसदी रकम उसी समय चुका दी। कुछ रकम 2011 में दी। 2013 में इन दोनों को प्लॉट सरेंडर करने के 99 लाख रुपए रिफंड किए गए।
नियम के मुताबिक इन दो प्लॉट ओनर्स का कोई रिफंड नहीं बनता था, बल्कि इंटरेस्ट और बिडिंग अमाउंट का डिडक्शन करें तो इन्हें मार्केट कमेटी को रकम अदा करनी थी। दरअसल यह घपला हुआ प्लॉट सरेंडर की एंट्री बैकडेट में करके। एंट्री 2013 के बजाय, 2008 की दिखाई गई, जिससे इंटरेस्ट नाममात्र का लगा। धांधली के इस आरोप में मार्केट कमेटी की सेक्रेटरी सुमन लता और अकाउंटेंट अनीता देवी के खिलाफ हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर आनंद मोहन शरण को शिकायत दी गई है। शरण ने जांच का जिम्मा बोर्ड के सेक्रेटरी विरेंद्र दहिया को सौंपा है।
2 सितंबर 2008 को मार्केट कमेटी ने खुली बोली में अनाज मंडी में 73 प्लॉट्स की अलॉटमेंट की। इनमें से प्लॉट नंबर 61 1.91 करोड़ रुपए और प्लॉट नंबर-63 1.75 करोड़ में नीलाम हुए। दोनों के ओनर्स ने कुल रकम का 25 फीसदी उसी दिन जमा करा दिया। लेकिन इसके बाद तीन साल तक बकाया रकम नहीं अदा की। 24 अगस्त 2011 को प्लॉट-61 के ओनर ने 35 लाख और 63 के ओनर ने 14 लाख रुपए जमा कराए। 17 अक्टूबर 2013 में इंटरेस्ट की रकम और बिडिंग के 10 परसेंट काटकर 99 लाख रुपए दोनों को रिफंड कर दिए गए। कहा गया कि ओनर्स ने अपना प्लॉट सरेंडर कर दिया है। प्लॉट-61 के ओनर को 61 लाख रुपए और प्लॉट-63 के ओनर को 43 लाख रुपए दिए गए।

प्लॉट ओनर्स को देने पड़ते त्र5 करोड़ - रजिस्टर में एंट्री 2013 की होती तो 19 परसेंट एनुअल इंट्रेस्ट और बिडिंग अमाउंट के हिसाब से 10 फीसदी की एनुअल डिडक्शन होती। यह दोनों 2008 से 2013 तक कैल्कुलेट किया जाता। ऐसा होता तो अमाउंट रिफंड होना तो दूर, इन प्लॉट ओनर्स पर करीब ढाई-ढाई करोड़ की रकम बकाया होती।

2013 में रिक्वेस्ट, 2008 की एंट्री

शिकायत के मुताबिक प्लॉट को सरेंडर करने की रिक्वेस्ट 2013 में आई थी, लेकिन डेली डायरी रजिस्टर में इसकी एंट्री बैकडेट में 27 व 31 दिसंबर 2008 दिखाई गई। पांच साल बाद यानी 2013 में प्लॉट ओनर्स पर तीन महीने का इंट्रेस्ट काटकर 99 लाख रुपए रिफंड कर दिए गए। यह सारा रिकॉर्ड मैनुअली मेनटेन किया जाता है। वर्ष 2008 में जीके बंसल सेक्रेटरी व सुमन लता असिस्टेंट सेक्रेटरी थीं, लेकिन बंसल को इस बाबत कुछ नहीं बताया गया। कमेटी ने इसके लिए मार्केटिंग बोर्ड से रकम ली, लेकिन इसकी अप्रूवल नहीं ली। एसडीएम गुरमीत सिंह से साइन करवाकर रिफंड दे दिया गया।



॥मेरे पास शिकायत आई है। मैंने बोर्ड सेक्रेटरी विरेंद्र दहिया को डीटेल जांच करने के लिए कहा है। दो-तीन दिन में इस केस में काफी कुछ साफ हो जाएगा।

-आनंद मोहन शरण, चीफ एडमिनिस्ट्रेटर, हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड

॥मेरे पास शिकायत आई है। मैं अपने लेवल पर जांच करूंगा। मैं खुद भी रिफंड के साइन करते हुए इतनी डिटेल में नहीं गया, एसडीएम के पास काफी काम रहता है।

-गुरमीत सिंह, एसडीएम, पंचकूला

॥मेरा कार्यकाल जनवरी 2009 तक रहा। उस दौरान ऐसी कोई एप्लीकेशन नहीं आई जिसमें कि प्लॉट सरेंडर और अमाउंट रिफंड करने की बात हो। अगर ऐसी कोई एप्लीकेशन थी, तो सुमन लता ने मुझे क्यों नहीं बताया इसके बारे में वही बेहतर बता सकती हैं।

-जीके बंसल, तत्कालीन सेक्रेटरी, मार्केट कमेटी पंचकूला

॥मैंने सब कुछ नियमों के दायरे में किया। अगर कोई 2011 में किस्त जमा करा रहा है, तो मैं उसे रोक नहीं सकती। रिफंड 2008 में नहीं दिया जा सका था, कई बार मामले ओवरलुक हो जाते हैं।

-सुमन लता, सेक्रेटरी, मार्केट कमेटी पंचकूला

॥मैंने कोई गड़बड़ी नहीं की है। सब कुछ नियमों के तहत हुआ है। यह सारे आरोप झूठे हैं।

अनीता देवी, अकाउंटेंट

ऐसे हुआ घपला