पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • मोङ्क्षरडा अस्पताल में रात को इमरजेंसी सेवा नहीं मिलती

मोङ्क्षरडा अस्पताल में रात को इमरजेंसी सेवा नहीं मिलती

8 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
अमरजीत सिंह धीमान - मोरिंडा
जिला रोपड़ के सभी अस्पतालों से आकर्षक व आधुनिक तकनीक से बनाया गए नए सरकारी अस्पताल मोरिंडा में डॉक्टरों की कमी के कारण पिछले लगभग एक सप्ताह से रात को इमरजेंसी की सुविधा काम बंद पड़ा है। इसके चलते इलाके के 80 गावों के लोगों को डॉक्टरी सुविधा प्राप्त करने में दिक्कत हो रही है और उन्हें इलाज के लिए मजबूरन दूर दराज के अस्पतालों में जाना पड़ता है। कभी भी किसी गंभीर मरीज की जिंदगी के लिए खतरा पैदा हो सकता है। उधर मोरिंडा हाईवे पर रोजाना दर्जनों सड़क हादसे होते हैं जिनमें घायल लोगों को रात के समय मोरिंडा के लोगों ने मांग की है कि मोरिंडा के सरकारी अस्पताल में उपचार नहीं मिलता और गंभीर घायलों की जिंदगी दांव पर लगी रहती है। लोगों ने मांग की है कि यहां आवश्यकता अनुसार तुरंत डाक्टर भेजे जाएं।
डॉक्टर नहीं उपलब्ध: अस्पताल में डॉक्टरों के तबादलों के बाद कई विभागों के डॉक्टर उपलब्ध नहीं। इस समय अस्पताल में जो डाक्टर व अन्य संबंधित स्टाफ उपलब्ध नहीं उनमें मेडीसन, सर्जरी, बच्चों का डॉक्टर, ईएनटी, डेंटल, ऑरथो, रेडियोग्राफ्र, ओटी अटेंडेंट व ईसीजी आदि उपलब्ध नहीं। अस्पताल में जरूरत अनुसार वार्ड ब्वॉय की संख्या भी पूरी नहीं। इसी तरह अस्पताल धोबी, माली व ड्राइवर आदि की कमी से भी जूझता आ रहा है।
नहीं है एंबुलेंस की सुविधा
मोरिंडा अस्पताल की अपनी एंबुलेंस भी पिछले कई साल से खराब पड़ी है। इसके चलते अस्पताल में इमरजेंसी के समय गंभीर मरीजों को अन्य बड़े अस्पतालों में रेफर किए जाने के समय मरीजों को भारी दिक्कत होती है। हालांकि अस्पताल में 108 एंबुलेंस रहती है, लेकिन डॉक्टर इसका उप्योग सीधे से नहीं कर सकते। 108 सेवा प्राप्त करने में लंबी परिक्रिया में से गुजरना पड़ता है। जिसे प्राप्त करने के लिए कुछ समय लग सकता है और ऐसे में गंभीर मरीज के लिए संकट पैदा हो सकता है।
कार्य जो हो रहे प्रभावित: अस्पताल में 7 डॉक्टरों के पैनल की पोस्टें सेंक्शन हैं। इनमें 4 विशेषज्ञ डॉक्टरों व 3 ईएमओ की पोस्टें हैं। इस समय अस्पताल में एक ईएमओ की पोस्ट खाली पड़ी है, जबकि 3 विशेषज्ञों की पोस्टें रिक्त पड़ी हैं। इसके चलते मरीजों को मेडिकल एड प्राप्त करने में भारी दिक्कत रहती है। यहां सिजेरियन के केस भी जीएमसीएच या अन्य बड़े अस्पतालों को रेफर किए जाते हैं। रात के समय आवश्यक अन्य कार्यों में फस्ट एड, एक्सरे करवाने, एमएलआर, पुलिस को किसी आरोपी का मेडिकल करवाने में व मेडिको लीगल ओपीनियन प्राप्त करने में दिक्कत आती है।
हादसों में गंभीर घायलों को हो रही दिक्कत: मोरिंडा बाईपास पर पर रोजाना गंभीर हादसे होते रहते हैं। यहां हादसों कारण होते गंभीर घायलों को अस्पताल लाया जाता है तो शाम 5 बजे के बाद अस्पताल में कोई नहीं मिलता। इस कारण गंभीर घायलों को दिक्कत होती है। पिछले दिनों हादसे में गंभीर घायल हुए टोडरपुर निवासी गुरदीप सिंह, बूथगढ़ निवासी हरमेश कौर, बूथगढ़ निवासी गुरजीत कौर के आलावा अन्य भी कई ऐसे केस सामने आए हैं जिन्हें तुरंत डॉक्टरी सहायता की जरूरत होते हुए भी दूर दराज के अस्पतालों में भटकना पड़ा।


॥सरकारी अस्पताल मोरिंडा में डॉक्टरों की कमी का मामला मेरी जानकारी में है। अभी डॉक्टरों की कमी चल रही है, लेकिन फिर भी मोरिंडा अस्पताल में एक दो दिन में एक डाक्टर भेज दिया जाएगा। अन्य डाक्टर भी जल्द भेजे जाएंगे। -रजनीश सूद, सिविल सर्जन रोपड़

नजर आते हैं ताले ही ताले

लोगों का कहना है कि जिस दिन से डाक्टरों के तबादले के बाद डॉक्टरों की कमी आई है तब से अस्पताल में अधिकांश डाक्टरों के कमरों में ताले जड़े मिलते हैं। जिसमें सर्जीकल, डेंटल, एक्सरे रूम , डार्क रूम व अन्य इमरजेसीं डॉक्टर रूम आदि में ताले जड़े मिलते हैं।