‘बंटवारे की आग’ में जोडऩे का संदेश
भास्कर न्यूज - चंडीगढ़
विनोद रस्तोगी द्वारा लिखित नाटक, ‘बटवारे की आग’ एक नौटंकी शैली का नाटक है। वीरवार शाम पंजाब कला भवन में 9वें टीएफटी नेशनल थिएटर फेस्टिवल-2014 के पांचवे दिन इसे खेला गया। इसका निर्देशन किया था अजय मुखर्जी ने और इसे प्रस्तुत किया था, इलाहाबाद के विनोद रस्तोगी स्मृति संस्थान ने। सभी किरदारों और खासतौर से नाटक के खलनायक का अभिनय काफी सराहनीय था। नाटक में इस्तेमाल किए गए डायलॉग मजबूत और वजनदार थे। जहां तक लाइटिंग और सेट की बात है तो वह कहानी के मुताबिक सामान्य ही थे। भले ही नाटक की कहानी दो परिवारों के अलग होने की कहानी थी पर इसमें सूत्रधार और किरदारों ने एकजुट रहकर देश और समाज को जोड़े रखने का संदेश दिया।
नाटक की कहानी - एक गांव की है। दो भाई, रामू और श्यामू एक खुशहाल संतुष्ट जीवन व्यतीत कर रहे होते हैं लेकिन खलनायक नौरंगी लाल दोनों भाईयों को जुदा करने की कोशिश करता है। वह उन्हें कई तरह से परेशान करता है और आखिरकार अपने मकसद में कामयाब भी हो जाता है। पर यह ज्यादा देर तक नहीं रहता क्योंकि जैसे ही दोनों परिवारों को नौरंगी लाल की मंशाएं समझ आती हैं, दोनों परिवार पहले से भी ज्यादा एकजुट हो जाते हैं।
मिलकर ला सकते हैं बदलाव
अंत में नाटक दर्शकों को बहुत ही गंभीर मैसेज देता है कि हम सब को उन सब बुरे लोगों के खिलाफ लडऩा चाहिए जो देश के विघटन और जात, धर्म, राज्यों के आधार पर समाज के बटवारे के लिए जिम्मेदार हैं। और अगर हम सब मिलकर रहें तो एक बदलाव ला सकते हैं।
 फेस्टिवल में हुए प्ले में अपनी परफॉर्मेंस देते आर्टिस्ट।