एक मां ने कहा
उमेश शर्मा. चंडीगढ़ - भारत को 28 साल बाद 2011 में वल्र्ड कप जिताने में अहम योगदान देने वाले युवराज सिंह के करियर में शनिवार को एक और ताज जुड़ गया। अर्जुन ((अवॉर्डी)) युवराज अब पद्मश्री युवराज सिंह कहलाएंगे। शनिवार को जब युवराज की मां शबनम सिंह से बात की गई। उन्होंने कहा- मुझे नाज है कि मैं एक फाइटर बेटे की मां हूं, जिसने कभी हारना नहीं सीखा है।
चंडीगढ़ - अपने 40 साल के करियर में 40 हजार आई सर्जरी कर चुके पीजीआई के एडवांस आई केयर सेंटर के प्रोफेसर डॉ. अमोद गुप्ता को पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। प्रो. गुप्ता का नाम हरियाणा ने प्रस्तावित किया था। एडवांस रेटिनल सर्जरी में महारत हासिल करने वाले डॉ. गुप्ता आखों की टीबी के इलाज में भी नंबर वन हैं। वह 1973 से पीजीआई में काम कर रहे हैं। इस उपलब्धि पर डॉ. गुप्ता ने कहा- पीजीआई दुनिया के प्रमुख आईकेयर सेंटर्स में शामिल हो चुका है। आज हमारा सेंटर दुनिया के किसी भी सेंटर को टक्कर दे सकता है। मेरी सफलता का क्रेडिट मेरे पेरेंट्स, मेरी फैमिली को जाता है। मेरी आदत है, जो अच्छा काम करो उसे भूलकर आगे की ओर देखो।
डॉ. अमोद गुप्ता ने न केवल अपनी पढ़ाई हरियाणा से की है, बल्कि मास्टर ऑफ सर्जरी भी पीजीआई रोहतक से की है।
डॉ. अमोद गुप्ता को पद्मश्री
40 साल के करियर में 40 हजार सर्जरी
पद्मश्री तो मिला, श्रीमती कब मिलेगी
जहां भी गई, युवी के लिए दुआ
मैं जहां भी जाती हूं, लोग कहते है कि हमने युवी के लिए दुआ की थी। मैं उन सबको हाथ जोड़ कर थैंक्स करना चाहती हूं। जितना प्यार युवी को मिला है, उतना कम ही लोगों को नसीब होता है। लोग उसे फील्ड में आज भी मिस करते हैं।
कैंसर को मात देना मिसाल बन गया
लड़की तो पसंद आए... - युवराज अब पद्मश्री हो गए हैं, अब उनके लिए श्रीमती कब ला रही हैं? इस सवाल के जवाब में शबनम सिंह हंसते हुए कहती हैं- अरे लड़की तो पसंद आए, शादी तो हो जाएगी। हम भी जोर-शोर से ढूंढ़ रहे हैं। मुझे भी बहू चाहिए।
मुझे लगता है कि युवी को यह अवॉर्ड मिला क्योंकि जिस तरह उसने कैंसर को हराकर लोगों के लिए नई उम्मीद जगाई, वह हर इंसान के लिए एक मिसाल बन गई। सच कहूं तो यह युवी ही था जो इस बीमारी से पार पा गया, पैसा और सुविधाएं होते हुए भी लोग हार जाते हैं। आप यकीन नहीं करोगे कि जब भी उससे कोई कैंसर का पेशेंट मिलने आता है, तो वह उसकी बातों को बड़े ध्यान से सुन कर उसे हौसला देता है। वह कहता है- जब मुझे हुआ था तो असली दर्द पता चला था, अगर मैं किसी की हेल्प कर पा रहा हूं तो मुझे खुशी मिलती है।
वापसी तो करेगा ही
वह इन दिनों अपने आप से ही खुश नहीं रहता। रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल में भी कम रन बनाने से नाखुश था और मुझसे भी कम बात करता था। इन तमाम उतार-चढ़ावों के बाद भी वह हिम्मत नहीं हारेगा और बेहतरीन वापसी कर टीम में लौटेगा।
सबसे बड़ी जीत
उसने करियर शुरू किया तो टीम इंडिया में खेलने का सपना था। वल्र्ड कप टी-ट्वेंटी में 6 छक्के , 2011 में वल्र्ड कप। लेकिन कैंसर को हरा कर मैदान में लौटना सबसे बड़ी जीत थी। सब ऊपरवाले का रहम और लोगों की दुआओं का असर है।
क्रिकेटर युवराज सिंह को पद्मश्री से नवाजा गया, मां शबनम सिंह को यकीन टीम में वापसी करेंगे युवी